एक ऐसा गांव जहां बेरोजगारी युवाओं को बना रही है बहरा
भोपाल। हमारे देश में शादी की उम्र कानूनी रूप से 21 वर्ष तय की गयी है। लेकिन मध्य प्रदेश में इस उम्र तक पहुंचने से पहले ही यहां के युवा बहरे हो जाते हैं यानि उन्हें सुनाई देना बंद हो जाता है। अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है कि 21 वर्ष की उम्र आने से पहले ही कोई कैसे बहरा हो सकता है।

इस बहरेपन की वजह ना तो कोई संक्रमण ना ही कोई आनुवंशिक बीमारी है, बल्कि बेरोजगारी है। दरअसल मध्य प्रदेश के मंडला जिले के बिछिया जनपद में आने वाले मांद गांव में नौकरी नहीं मिलने की वजह से यहां के युवा नौकरी पाने के लिए खुद को जानबूझकर बहरा बताते हैं और फर्जी प्रमाण पत्र बनवा लेते हैं।
इस गांव में तकरीबन 300 लोग सरकारी नौकरी में हैं। लेकिन यहां के स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन लोगों ने नौकरी के लिए फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र बनवाया और नौकरी हासिल कर ली। मामला सामने आने के बाद यहां के सरपंच ने जांच के आदेश दे दिये हैं।
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यहां के पंचायत सचिव गणेश आर्मो का कहना है कि गांव के करीब एक दर्जन लोग विकलांग हैं जिनको सरकारी योजना के तहत पेंशन मिलती है, यही नहीं कई लोगों को विकलांगता का प्रमाण पत्र की वजह से नौकरी भी मिल गयी है। गणेश का कहना है कि हमने आरटीआई के जरिए इस बात की जानकारी मांगी है कि कितने लोगों को यहां विकलांगता के आधार पर नौकरी दी गयी है। हम इस मामले में पूरी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
वहीं इस विवाद पर कांग्रेस पार्टी भी सामने आयी और उसने यहां भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। कांग्रेस के विधायक संजीव उइके ने मामले को विधानसभा में उठाने की बात कही है। उनका कहना है कि इस मामले की जांच होनी चाहिए। उन्होंने सीधे तौर पर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री शरद जैन व सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते सहित मौजूदा स्वास्थ्य मंत्री को कटघरे में खड़ा किया है।












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