Success Story: सब्जी की खेती से बदली जिंदगी, महिलाओं का कमाल, प्रतिदिन 20 से 50 हजार तक कमाई
MP News Success Story: मध्य प्रदेश के देवरी विकासखंड के छोटे-छोटे गांवों में एक क्रांति आ रही है। यहां की महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि परिवार की बड़ी जिम्मेदारियां भी निभा रही हैं। सब्जी की खेती और थोक व्यापार से ये महिलाएं सीजन में प्रतिदिन 20,000 से 50,000 रुपये तक की कमाई कर रही हैं।
आस्था स्व-सहायता समूह की सदस्य शांति पटेल, निर्मला पटेल, अनुराधा काछी और संगीता कुर्मी जैसी महिलाओं की कहानियां प्रेरणादायक हैं, जो बताती हैं कि कैसे छोटे लोन से बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं। कलेक्टर संदीप जीआर का कहना है कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर इन महिलाओं ने अपने परिवारों को नई दिशा दी है। आइए, इनकी सफलता की कहानी जानते हैं।

शांति पटेल: सब्जी व्यापार से बेटियों की शादी तक का सफर
बिछुआ भावतरा गांव की शांति पटेल की कहानी संघर्ष और सफलता का अनोखा मिश्रण है। आस्था स्व-सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने अलग-अलग किस्तों में लगभग 3 लाख रुपये का लोन लिया। इस राशि से उन्होंने सब्जी का थोक व्यापार शुरू किया और अपने खेतों में भी सब्जियां उगानी शुरू कीं। शांति बताती हैं कि उनके परिवार में सबसे बड़ी जिम्मेदारी दो ननदों की शादी थी। दोनों की शादी में लगभग 10 लाख रुपये खर्च हुए, लेकिन सब्जी व्यापार की कमाई से उन्होंने यह सब संभव किया।
शांति की दुकान देवरी में है, जहां वे किसानों से थोक में सब्जियां खरीदती हैं। मुख्य सब्जियां हैं प्याज, टमाटर, मिर्ची, गिलकी, बैंगन और खीरा। ये सब्जियां मध्य प्रदेश के बाहर ललितपुर, झांसी, महोबा, लखनऊ जैसे शहरों में जाती हैं, साथ ही जबलपुर, भोपाल, नरसिंहपुर और करेली के व्यापारियों से उनका सीधा संपर्क है। शांति कहती हैं, "जब सीजन चलता है, तो सारी खर्च काटने के बाद प्रतिदिन 20,000 से 50,000 रुपये तक का नेट प्रॉफिट होता है। यह कमाई हमें आत्मनिर्भर बनाती है।" उनकी सफलता की कहानी गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो दिखाती है कि छोटे कर्ज से बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है।
निर्मला पटेल: आधुनिक खेती से चार महीने तक लगातार कमाई
समूह की ही एक अन्य सदस्य निर्मला पटेल ने आधुनिक तकनीकों को अपनाकर सब्जी उत्पादन में महारत हासिल की है। उनके खेतों में पॉली मल्चिंग और ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगा है, जो पानी की बचत करता है और उत्पादन बढ़ाता है। निर्मला बताती हैं कि उन्होंने अभी खीरा लगाया है। हफ्ते में दो दिन खीरे की तोड़ाई होती है, और एक तोड़ाई में लगभग 12 क्विंटल खीरा निकलता है। यह फसल डेढ़ महीने तक चलती है, और हर तीसरे दिन तोड़ाई होती है।
खीरे के बाद टमाटर की बारी आती है, जो प्रतिदिन 10 से 12 क्विंटल तक देता है और लगातार चार महीने तक चलता है। निर्मला कहती हैं, "परिवार में बड़े खर्च हैं। विवाह के लिए बाकी सदस्यों की जिम्मेदारी निभाने के बाद, अब अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ा रही हूं। मकान बनवाया है, खुद के लिए आभूषण खरीदे हैं, और खेती को और बेहतर बनाया है। घर में दो-पहिया वाहन है, और सभी कृषि यंत्र उपलब्ध हैं।" उनकी कमाई न केवल परिवार की जरूरतें पूरी कर रही है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रोत्साहित कर रही है कि आधुनिक खेती से कितना फायदा हो सकता है।
अनुराधा काछी: नेट हाउस में धनिया से बारिश में भी मुनाफा
ग्राम बिछुआ भावतरा की अनुराधा काछी ने नेट हाउस बनाकर सब्जी उत्पादन में नया प्रयोग किया है। उन्होंने नेट हाउस में धनिया लगाया, जो बारिश के मौसम में कीमतें आसमान छूती हैं। अनुराधा बताती हैं, "पिछले साल केवल धनिया से 60,000 रुपये से ज्यादा की कमाई हुई थी। बारिश में धनिया की डिमांड बहुत बढ़ जाती है, और नेट हाउस की वजह से फसल खराब नहीं होती।" यह तरीका न केवल मौसम की मार से बचाता है, बल्कि ऑफ-सीजन में भी अच्छा मुनाफा देता है। अनुराधा की सफलता दिखाती है कि इनोवेटिव तरीकों से कैसे ग्रामीण महिलाएं बाजार की चुनौतियों का सामना कर सकती हैं।
संगीता कुर्मी: दूध और सब्जी से सपनों की उड़ान
ग्राम जमनापुर परासिया की संगीता कुर्मी परी स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। उन्होंने समूह से अब तक 4 लाख रुपये का लोन लिया, जिसे भैंस खरीदने, खेती करने और दूध संग्रह केंद्र चलाने में लगाया। संगीता की कमाई बढ़ी, और उनका सपना था कि रक्षाबंधन पर अपनी कार से मायके जाकर भाई को राखी बांधें। समूह से जुड़कर यह सपना पूरा हुआ। वे कहती हैं, "इस राखी मैं अपनी कार से मायके जाऊंगी। समूह ने मुझे आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है।" संगीता की कहानी बताती है कि कैसे छोटे लोन से महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से स्वतंत्र होती हैं, बल्कि अपने सपनों को भी साकार करती हैं।
कलेक्टर का बयान: आधुनिक तकनीक से नई दिशा
देवरी के कलेक्टर संदीप जीआर ने इन महिलाओं की सफलता पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "आधुनिक तकनीकों को अपनाकर समूह की महिलाओं ने सब्जी उत्पादन में लाखों कमाए हैं। थोक व्यापार, हाई वैल्यू वेजिटेबल क्रॉप और हाई प्रोडक्शन वेजिटेबल क्रॉप को अपनाकर उन्होंने अपने परिवारों के आर्थिक जीवन को एक नई दिशा दी है। यह ग्रामीण विकास की सच्ची मिसाल है।" कलेक्टर ने समूहों को और मजबूत बनाने के लिए सरकारी योजनाओं का जिक्र किया, जो महिलाओं को लोन और ट्रेनिंग प्रदान करती हैं।












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