Bhopal News: रेप के आरोप में सेंट्रल जेल में बंद वैराग्यानंद गिरी उर्फ मिर्ची बाबा बरी, कोर्ट ने किया दोषमुक्त
Bhopal mirchi baba News: रेप के आरोप भोपाल की सेंट्रल जेल में बंद वैराग्यानंद गिरि उर्फ मिर्ची बाबा को बड़ी राहत मिली है। दरअसल, साक्ष्यों की कमी होने के चलते कोर्ट ने मिर्ची बाबा को दोष मुक्त कर दिया है। बता दे पिछले साल मिर्ची बाबा पर रायसेन की एक महिला ने रेप का आरोप लगाया था। तब 9 अगस्त 2022 से मिर्ची बाबा जेल में बंद थे।
भोपाल जिला कोर्ट ने उन्हें रेप के आप से भारी कर दिया है। जस्टिस स्मृता सिंह की कोर्ट ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। इसकी पुष्टि मामले की पैरवी कर रहे एडवोकेट श्री कृष्ण धौसेला ने की है। बता दे रायसेन की रहने वाली 28 वर्षीय महिला ने बाबा पर नशीली भभूति खिलाकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। लेकिन सबूत नहीं होने के कारण मिर्ची बाबा को दोष मुक्त कर दिया गया है। हालांकि मिर्ची बाबा पहले से ही इसे राजनीतिक षड्यंत्र बता रहे थे।

ऑयल मिल में काम करने वाला कैसे बना मिर्ची बाबा
भिंड के रहने वाले गुड्डू सिंह ने बताया था कि मिर्ची बाबा चार भाइयों में तीसरे नंबर का था और उसका नाम राकेश दुबे है। राकेश दुबे उर्फ मिर्ची बाबा 1995 में ऑयल मिल में तेल निकालने का काम करता था। 1997 में गांव के एक व्यापारी के यहां ऑयल मिल में काम करने लगा। उसके बाद उसका मन नहीं लगा तो उसने अपने हिस्से की 4 बीघा जमीन बेचकर ट्रक खरीद लिया। घाटा हुआ तो ट्रक बेचकर गुजरात के अहमदाबाद चला गया। वहां प्राइवेट फैक्ट्री में काम करने लगा। वहीं से उसके अंदर नागाओं बाबाओं के प्रति आकर्षण और सन्यासी बनने की जिज्ञासा उत्पन्न हुई। इसके बाद में वापस लौटा तो मिर्ची बाबा बन चुका था।
कैसे चर्चित हुआ मिर्ची बाबा
मिर्ची बाबा के पिता का निधन 2018 में हो गया था। उसने अपने पिता की तरहवीं को एक बड़े आयोजन के तौर पर लिया। मिर्ची बाबा ने करीब 20 हजार से अधिक लोगों को पिता की तेरहवीं में भोज कराया। इस कार्यक्रम में प्रदेश के कई मंत्री और विधायक शामिल हुए थे। यहीं से मिर्ची बाबा ने कांग्रेस के बड़े नेताओं को साधने की कोशिश की और 2019 के लोकसभा इलेक्शन में भोपाल से सांसद के उम्मीदवार दिग्विजय सिंह को जिताने के लिए उसने साधु-संतों की टीम उतार दी। इस दौरान उसने दिग्विजय सिंह की जीत के लिए 500 किलो मिर्च का हवन किया और भविष्यवाणी की कि अगर दिग्विजय सिंह नहीं जीते, तो वे जल समाधि ले लेगा, हालांकि जल समाधि मुद्दे पर उसकी खूब किरकिरी हुई थी, क्योंकि दिग्विजय सिंह चुनाव हार गए थे।












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