Bhopal: अन्ना नगर में इलेक्ट्रिशियन की करंट लगने से मौत पर बवाल, जानिए वायरल VIDEO में मनोज शुक्ला की सच्चाई
Bhopal News: भोपाल के अन्ना नगर इलाके में इलेक्ट्रिशियन की करंट लगने से मौत के बाद कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला को शव यात्रा में शामिल होना महंगा पड़ गया। दरअसल, शुक्ला मृतक इलेक्ट्रीशियन के परिवार की आर्थिक रूप से मदद करना चाहते थे, लेकिन शव यात्रा में चल रहे कुछ लोग इससे नाराज हो गए और उन्होंने मनोज शुक्ला के साथ हाथापाई और झूमाझटकी शरू कर दी।
बताया जा रहा है कि अन्ना नगर में स्थित 30 वर्षीय दीपेंद्र प्रजापति पुत्र कालूराम प्रजापति इलेक्ट्रिशियन का काम करता था और अभी 3 महीने पहले ही उसके पिताजी की कैंसर से मौत हुई थी। वे लाइट फिटिंग का काम करता था। आर्थिक तंगी के चलते वे बिना सेफ्टी गैजेट पहने लाइट फिटिंग का काम कर रहा था। जिसके चलते उसकी करंट लगने से मौत हो गई।

मृतक के भाई ने बताया कि शनिवार की रात करीब 9 बजे दीपेंद्र प्रजापति अन्ना नगर बस्ती में लाइट सुधारने का काम कर रहा था, तभी काम करते समय शनिवार की रात को दीपेंद्र को करंट लग गया। बताया जा रहा है कि मोहल्ले के एक घर की बिजली लाइन का तार टूट गया था। इसे ठीक करने के लिए दीपेंद्र गया हुआ था और लाइन सुधारते समय उसे करंट लग गया। तत्काल उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए पहुंचे थे मनोज शुक्ला
इस मामले में बिजली विभाग की भी लापरवाही सामने आई है। मोहल्ले वालों ने कई बार बिजली विभाग में इसकी शिकायत भी की, लेकिन बिजली विभाग वालों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि मृतक परिवार में इकलौता था, इसलिए परिवार वाले शव रखकर मुआवजे की मांग करना चाहते थे। इसी दौरान नरेला विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार मनोज शुक्ला वहां पहुंच गए। वन इंडिया से बातचीत में मनोज शुक्ला ने बताया कि वह पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए पहुंचे थे, लेकिन उन्हें मदद नहीं करने दी गई। उन्होंने बताया कि वह ₹50,000 की आर्थिक मदद देना चाहते थे।

वहींं वायरल वीडियो पर सफाई देते हुए मनोज शुक्ला ने बताया है कि वार्ड 59 (अन्ना नगर) निवासी दीपेंद्र प्रजापति की सरकार की लापरवाही से करंट से मौत होने पर परिजन से शोक व्यक्त करने जाते समय पुलिस के संरक्षण में मंत्री विश्वास सारंग के समर्थक गुंडों ने मेरे साथ झूमाझटकी की और हिस्ट्रीशीटर बदमाश को साथ लेकर अंतिम संस्कार करा दिया, लेकिन मैं ऐसी गीदड़ भभकी से डरने वाला नहीं हूं। गरीबों के हक में मेरा संघर्ष जारी रहेगा।
परिजनों ने बताई की दीपेंद्र के पिता की 3 महीने पहले कैंसर से मृत्यु हो गई थी। इसके बाद से ही परिवार की सारी जिम्मेदारी उसी के कंधों पर आ गई थी। मृतक के भाई दीपक ने बताया कि दीपेंद्र की मौत के बाद उसके परिवार के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। हालत ये है कि परिवार के पास अंतिम संस्कार तक के पैसे नहीं थे। कुछ रिश्तेदारों और परिचितों की मदद से दीपेंद्र का अंतिम संस्कार किया गया। इसके अलावा कुछ लोगों ने परिवार की आर्थिक रूप से मदद भी की। बता दे मृतक दीपेंद्र की दो बहने हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। जबकि एक बहन और मां साथ रहती है।












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