umaria: मां-बेटे को घायल करने वाले बाघ को हाथियों ने खदेड़ा, 'मौत' के मुंह से मासूम को बचाया जिंदा

उमरिया 6 सितंबर। बाघों के दीदार के लिए विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र में लगातार बाघों की हलचल देखी जाती है। टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बाघ कहीं भी और कभी भी दिखाई दे देते हैं। इस बीच कई बार बाघ हमलावर होकर आम जनता व मवेशियों पर हमला कर देते हैं। बीते दिनों बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मानपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रोहनिया से खबर आई थी। जहां पर की बाघ ने बच्चे और उसकी मां पर हमला कर दिया था। इसको इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती करने के बाद जबलपुर रेफर कर दिया गया।

गांव में कराई गई मुनादी

गांव में कराई गई मुनादी

उसके बाद टाइगर रिजर्व प्रबंधन के कर्मचारी लगातार गांव में मुनादी करवाकर घर से बाहर ना निकलने की ग्रामीणों से अपील की। हाथियों की मदद से बाघ को गांव से जंगल की तरफ खदेड़ा गया है। बाघ घर के बाड़े से लगे झाड़ियों में छिपा हुआ था। इसके बाद टाइगर रिजर्व प्रबंधन के कर्मचारियों के की निगरानी में हाथियों की मदद से बाघ को जंगल की तरफ खदेड़ा गया।

बीते महीने भी हो चुका है हमला

बीते महीने भी हो चुका है हमला

कुछ महीने पूर्व बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पतौर क्षेत्र अंतर्गत में भी बाघ ने ग्रामीण पर हमला किया था। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वह अब तंदुरुस्त है।

बेटे को बचाने के लिए जब बाघ से भिड़ मां

बेटे को बचाने के लिए जब बाघ से भिड़ मां

इस दौरान बाघ के नाखून उसके फेफड़े तक घुस गए, लेकिन वो लड़ती रही। करीब 15 मिनट तक हुए इस संघर्ष का शोर सुन गांव के लोग लाठियां लेकर पहुंचे तो बाघ जंगल की ओर भाग गया। दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल भेजा गया। गंभीर स्थित होने की वजह से जबलपुर रेफर किया गया।

मां की हालत गंभीर बच्चे की हालत ठीक

मां की हालत गंभीर बच्चे की हालत ठीक

जिला अस्पताल में इलाज के बाद महिला की गर्दन टूटने की बात सामने आई। हालत गंभीर होने पर उसे जबलपुर रेफर कर दिया गया। सिविल सर्जन डॉक्टर एलएन रूहेला ने बताया कि महिला की पीठ पर भी नाखून के गहरे घाव थे। टांके लगाने के बाद भी खून रुक नहीं रहा था। बच्चे के सिर में चोट आई है। लेकिन वह खतरे से बाहर है।

हाथियों की मदद से बाघ को जंगल में खदेड़ा गया

हाथियों की मदद से बाघ को जंगल में खदेड़ा गया

टाइगर रिजर्व के कर्मचारी गांव में लगातार अलर्ट रहने के लिए मुनादी करा रहे थे। उन्होंने लोगों को घर पर ही रहने की सलाह दी थी। घर के पास ही बाड़े मे छिपे बाघ को जंगल में खदेड़ने के लिए हाथियों की मदद ली गई थी।

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