उज्जैन में परेशान किसान ने खाया जहर, 3 बीघा से महज 1.20 क्विंटल सोयाबीन पैदावार, परिजनों से मिले जीतू पटवारी
मध्य प्रदेश के उज्जैन में महिदपुर तहसील के बागला ग्राम में एक किसान की आत्महत्या ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। 45 वर्षीय रामसिंह भांभी ने अपनी 3 बीघा जमीन से महज 1.20 क्विंटल सोयाबीन की नाममात्र पैदावार और बढ़ते कर्ज के बोझ तले दबकर जहर खा लिया।
सोमवार शाम को हुई इस घटना ने न केवल परिवार को बर्बाद कर दिया, बल्कि मध्य प्रदेश के किसान संकट को फिर से उजागर कर दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे "भाजपा सरकार की नाकामी का कलंक" बताते हुए मुख्यमंत्री से पीड़ित परिवार से मिलने और तत्काल सहायता देने की अपील की है। पटवारी ने पीड़ित के घर पहुंचकर परिवार से मुलाकात की।

पटवारी ने कहा, "किसान तब आत्महत्या करता है, जब सत्ता की आत्मा मर जाती है और सरकार से भरोसा उठ जाता है।" यह घटना राज्य में सोयाबीन फसल की खराब बैठक, MSP पर विवाद और कर्ज माफी की मांगों के बीच आई है, जहां पिछले एक साल में 200 से अधिक किसान आत्महत्याओं की खबरें आ चुकी हैं।
कर्ज और निराशा ने छीनी किसान की सांसें
महिदपुर तहसील के बागला ग्राम में रहने वाले रामसिंह भांभी एक साधारण किसान थे, जो अपनी छोटी-सी जमीन पर सोयाबीन की खेती करके परिवार का पेट पालते थे। इस खरीफ सीजन में बारिश की अनियमितता और कीटों के प्रकोप ने उनकी फसल को बर्बाद कर दिया। 3 बीघा जमीन से जहां सामान्य पैदावार 6-8 क्विंटल होती है, वहीं रामसिंह को महज 1.20 क्विंटल ही मिला। बाजार में सोयाबीन का भाव भी MSP (4,892 रुपये प्रति क्विंटल) से नीचे रहा, जिससे उनकी आय घटकर कुछ सौ रुपये रह गई। ऊपर से पुराना कर्ज-बीज, खाद और मजूरी के लिए लिया गया-चुकाने का दबाव।
परिवार के मुताबिक, रामसिंह पिछले एक हफ्ते से परेशान थे। रविवार रात को उन्होंने घरवालों को बताया, "फसल बर्बाद हो गई, अब क्या करूं?" सोमवार दोपहर करीब 2 बजे उन्होंने सल्फास घोलकर जहर पी लिया। परिवार ने तुरंत उन्हें महिदपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया, लेकिन हालत गंभीर होने पर इंदौर के MYH अस्पताल रेफर किया गया। वहां शाम 7 बजे रामसिंह ने दम तोड़ दिया। पत्नी रुकमणि बाई ने रोते हुए कहा, "हमने कहा था, सब ठीक हो जाएगा। लेकिन वह टूट चुके थे। सरकार ने कर्ज माफी का वादा किया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ।" रामसिंह के दो बच्चे-15 वर्षीय बेटा और 12 वर्षीय बेटी-अब अनाथ जैसे हो गए हैं। ग्राम पंचायत ने अंतिम संस्कार में मदद की, और स्थानीय समाजसेवी विजय सिंह गौतम ने 10,000 रुपये की सहायता दी।
पुलिस ने मामले को आत्महत्या दर्ज किया है, लेकिन परिवार ने कहा कि कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। SDM ने मौके पर पहुंचकर परिवार को 2 लाख रुपये का सरकारी मुआवजा और 5 लाख का बीमा का भरोसा दिया। लेकिन परिवार की मांग है-पूर्ण कर्ज माफी और बच्चों की पढ़ाई का खर्च।
राजनीतिक तीरंदाजी: कांग्रेस का हमला, भाजपा की चुप्पी
यह घटना मुख्यमंत्री के गृह जिले में होने से राजनीतिक रंग ले चुकी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंगलवार सुबह ट्वीट कर मुख्यमंत्री को टैग किया: "प्रिय डॉ. मोहन यादव जी, आपके गृह जिले में किसान रामसिंह भांभी ने 3 बीघा से 1.20 क्विंटल सोयाबीन पैदावार से तंग आकर आत्महत्या कर ली। यह सिर्फ एक मौत नहीं, भाजपा सरकार की नाकामी का कलंक है।" पटवारी ने कहा, "किसान तब आत्महत्या करता है जब सत्ता की आत्मा मर जाती है। न मुआवजा, न राहत, न सुनवाई। मैं पीड़ित परिवार से मिलने जा रहा हूं।" उन्होंने CM से अपील की कि वे परिवार से मिलें और उचित सहायता दें।
कांग्रेस विधायक महेश परमार (महिदपुर) और दिनेश जैन (बदनावर) ने सोमवार शाम को परिवार से मुलाकात की। परमार ने कहा, "यह घटना किसान हितैषी सरकार की विफलता दिखाती है।
भाजपा की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। CMO स्रोतों ने बताया कि मुख्यमंत्री को घटना की जानकारी है, और जल्द ही कलेक्टर को निर्देश दिए जाएंगे। लेकिन विपक्ष इसे "मौनवृत्ति" बता रहा है। पटवारी ने कहा, "अंधेर नगरी, मुखिया मौन।"
मध्य प्रदेश का किसान संकट: सोयाबीन फसल बर्बादी की मार
यह घटना मध्य प्रदेश के सोयाबीन बेल्ट (मालवा-निमाड़ क्षेत्र) के संकट को उजागर करती है। राज्य सोयाबीन का सबसे बड़ा उत्पादक है (60 लाख हेक्टेयर में 1.2 करोड़ टन पैदावार), लेकिन इस सीजन में कम बारिश, कीटों (सेमीलूपर) और उर्वरक महंगे होने से 30-40% नुकसान हुआ। MSP 4,892 रुपये है, लेकिन बाजार में 4,000-4,200 रुपये मिल रहे। किसान संगठन कहते हैं कि 50% फसल बिना MSP बिक रही।
पैरामीटर,सामान्य पैदावार (प्रति बीघा),रामसिंह की पैदावार,नुकसान (%)
- सोयाबीन,2-3 क्विंटल,0.40 क्विंटल,80-85
- आय (रु.),"10,000-15,000","1,680",85+
पीड़ित परिवार की पुकार: सहायता और न्याय की उम्मीद
रामसिंह के परिवार में पत्नी, दो बच्चे और बुजुर्ग मां हैं। वे अब मजूरी पर निर्भर। रुकमणि ने कहा, "रामसिंह ने कहा था, 'फसल बेचकर कर्ज चुकाएंगे।' लेकिन कुछ नहीं बचा। सरकार मदद करे।" ग्रामवासी शोक में डूबे हैं। पटवारी मंगलवार दोपहर को परिवार से मिलने महिदपुर पहुंचे, जहां उन्होंने कर्ज माफी और 10 लाख मुआवजे की मांग की।
आगे की राह: क्या जागेगी सरकार?
यह मौत मध्य प्रदेश के किसान आंदोलन को नई जान दे सकती है। किसान संघ ने 10 अक्टूबर को उज्जैन में महापंचायत बुलाई है। पटवारी ने कहा, "यदि CM परिवार से नहीं मिले, तो आंदोलन तेज होगा।" सरकार ने कलेक्टर को जांच के आदेश दिए, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं-संकट का समाधान MSP, बीमा और सिंचाई में है। रामसिंह की मौत हर किसान का दर्द है। क्या यह CM के दरवाजे तक पहुंचेगी? समय बताएगा।
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