भोपाल में सड़क पर दिखा बाघ, जानिए कैसे संस्कार वैली स्कूल के पास टाइगर का VIDEO हुआ वायरल
MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल, जो अपनी हरियाली और झीलों के लिए मशहूर है, आज एक हैरान करने वाली घटना का गवाह बनी। शहर की सड़कों पर एक बाघ खुलेआम घूमता दिखा, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
यह घटना रविवार, 17 अगस्त 2025 की दोपहर करीब 2 बजे की है, जब संस्कार वैली स्कूल के पास कालियासोत इलाके में एक बाघ सड़क पर टहलता नजर आया। इस दृश्य ने न केवल स्थानीय लोगों को दहशत में डाल दिया, बल्कि यह भोपाल के अनोखे शहरी-जंगली मेल का एक और सबूत बन गया। वन विभाग ने इस घटना के बाद इलाके में गश्त बढ़ा दी है और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।

घटना का विवरण: सड़क पर टाइगर का रास्ता
यह रोमांचक और डरावनी घटना भोपाल के कालियासोत क्षेत्र में हुई, जो रातापानी वन्यजीव अभयारण्य के करीब है। रविवार दोपहर एक युवक अपनी कार की टेस्ट ड्राइव कर रहा था, जब उसने सड़क पर एक बाघ को टहलते देखा। बाघ अपनी पूरी शान के साथ सड़क पर खड़ा था और कुछ देर तक आसपास का मुआयना करता रहा। युवक ने तुरंत अपने मोबाइल से इस दृश्य का 28 सेकंड का वीडियो बनाया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।
वीडियो में बाघ सड़क पर शांतिपूर्वक चलता दिख रहा है, फिर धीरे-धीरे झाड़ियों की ओर बढ़ जाता है। इस दौरान, सड़क पर करीब 100 मीटर दूर एक कपल भी टहल रहा था, जिसे युवक ने सावधानी से सुरक्षित निकाल लिया। इस घटना ने भोपाल की उस अनोखी विशेषता को फिर से उजागर किया, जहाँ शहरी और जंगली जीवन एक साथ साँस लेते हैं।
भोपाल: बाघों का शहरी गढ़
भोपाल को दुनिया का एकमात्र ऐसा शहर माना जाता है, जहाँ शहरी सीमा के अंदर जंगली बाघ स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं। रातापानी अभयारण्य के आसपास के जंगल भोपाल की सीमाओं से सटे हैं, और यहाँ करीब 25 बाघों की मौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से 5 बाघ नियमित रूप से शहर के बाहरी इलाकों में देखे जाते हैं, खासकर कालियासोत और केरवा क्षेत्र में।
इस घटना से पहले भी भोपाल में बाघों की आवाजाही की कई खबरें सामने आ चुकी हैं। जनवरी 2025 में कालियासोत क्षेत्र में 5 बाघों, जिनमें शावक भी शामिल थे, को दिन के समय सड़कों पर देखा गया था, जिससे स्थानीय लोग दहशत में आ गए थे। इसी तरह, अक्टूबर 2022 में मॉलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MANIT) के परिसर में एक बाघ देखा गया था, जिसके बाद छात्रों को हॉस्टल में रहने की सलाह दी गई थी।
वन विभाग की कार्रवाई
बाघ के सड़क पर दिखने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत हरकत में आई। भोपाल के डीएफओ लोकप्रिया भारती ने बताया, "हमें संस्कार वैली स्कूल के पास बाघ के दिखने की सूचना मिली थी। हमने तुरंत इलाके में गश्त बढ़ा दी है और कैमरा ट्रैप्स लगाए हैं। लोगों से अपील है कि वे कालियासोत और केरवा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सावधानी बरतें।"
वन विभाग ने यह भी कहा कि बाघ आमतौर पर रात 11 बजे से सुबह 6 बजे के बीच सक्रिय रहते हैं और इंसानों से दूरी बनाए रखते हैं। हालांकि, दिन में बाघ का सड़क पर दिखना चिंता का विषय है। विभाग ने स्थानीय लोगों को सलाह दी है कि वे सुबह और शाम के समय इन क्षेत्रों में अकेले न जाएँ और बच्चों को जंगल के पास खेलने से रोकें।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
बाघ के सड़क पर दिखने से कालियासोत और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। स्थानीय निवासी रमेश वर्मा ने कहा, "हम भोपाल में बाघों की मौजूदगी के आदी हो चुके हैं, लेकिन दिनदहाड़े सड़क पर बाघ देखना डरावना है। प्रशासन को कुछ ठोस कदम उठाने चाहिए।"
दूसरी ओर, कुछ लोग इस अनोखे सह-अस्तित्व की तारीफ करते हैं। पर्यावरण कार्यकर्ता रशीद नूर ने कहा, "भोपाल दुनिया का एकमात्र शहर है, जहाँ बाघ और इंसान इतने करीब रहते हैं। लेकिन हमें उनके प्राकृतिक आवास को बचाने के लिए और सख्त कदम उठाने होंगे।"
बाघों का शहरी अनुकूलन
भोपाल के "शहरी बाघ" अपनी अनुकूलन क्षमता के लिए जाने जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये बाघ रात में सक्रिय रहकर और इंसानों से दूरी बनाकर शहर के बाहरी इलाकों में रहना सीख चुके हैं। भोपाल शहरी बाघ परियोजना के अनुसार, शहर के आसपास के जंगलों में 83 बाघों की पहचान की गई है, जिनमें 13 शावक शामिल हैं।
पर्यावरणविद् सुहास कुमार ने कहा, "भोपाल के बाघों ने इंसानों के साथ रहना सीख लिया है। लेकिन शहरीकरण और जंगल के कटाव के कारण वे शहर की सीमाओं में घुस रहे हैं। हमें रातापानी अभयारण्य को टाइगर रिजर्व घोषित करना चाहिए और इन क्षेत्रों को विकास परियोजनाओं से बचाना चाहिए।"
सियासी और सामाजिक हलचल
इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोरी है। कुछ लोगों ने इसे भोपाल की अनोखी पहचान के रूप में देखा, तो कुछ ने इसे सुरक्षा की कमी का प्रतीक बताया। "ये भोपाल है जहां शहर की आबादी के पास ही बीस से ज़्यादा बाघों का डेरा है, बिना मास्टर प्लान के बेतरतीब शहर आसपास के जंगलों में पसर रहा है।"
भविष्य की चुनौतियां
भोपाल में बाघों की मौजूदगी शहर की एक अनोखी विशेषता है, लेकिन यह एक गंभीर चुनौती भी है। शहरीकरण, जंगल कटाई, और बाघों के प्राकृतिक आवास में कमी के कारण ये जानवर शहर की सीमाओं में घुस रहे हैं। वन विभाग और प्रशासन के सामने सवाल है कि इस अनोखे सह-अस्तित्व को कैसे बनाए रखा जाए, ताकि न तो बाघों को नुकसान हो और न ही इंसानों की सुरक्षा खतरे में पड़े।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में कहा था, "भोपाल में इंसान दिन में सड़कों का इस्तेमाल करते हैं, और रात में बाघ। यह हमारा अनोखा सह-अस्तित्व है।" लेकिन इस घटना ने सवाल उठाया है कि क्या यह सह-अस्तित्व अब खतरे में है?
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