Bhopal News: दिवाली की रौनक के बीच भोपाल में लगे सांस्कृतिक पोस्टर-बैनर "मैं सनातनी हूं" ने सभी को चौंकाया
Bhopal news: दिवाली का त्योहार अपनी रौनक और खुशी के साथ बाजारों में छाया हुआ है। इस दौरान भोपाल के बाजारों में एक अनूठा और विवादास्पद दृश्य देखने को मिल रहा है। संस्कृति बचाओ मंच और बजरंग दल द्वारा शहर के कई प्रमुख बाजारों और सड़कों पर विशेष पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं, जो एक विशेष संदेश को प्रसारित कर रहे हैं।
इन पोस्टरों में लिखा है, "मैं सनातनी हूं। सनातन धर्मियों से ही सामान की खरीदी करें।" इस संदेश के पीछे की मंशा यह है कि लोग दीपावली पर सामान खरीदते समय केवल सनातन धर्म से जुड़े व्यवसायियों से ही खरीदारी करें। संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि न्यू मार्केट समेत कई बाजारों में वे दुकान-दुकान जाकर ये पोस्टर लगा रहे हैं।

इन पोस्टरों पर 'ॐ', 'स्वास्तिक' और 'श्री' जैसे धार्मिक चिह्नों के साथ, सनातन धर्मियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। अध्यक्ष तिवारी ने बताया कि उनकी अपील है कि सनातन धर्म के अनुयायी दीपावली पर जो भी सामग्री खरीदें, वह केवल सनातन धर्मियों से ही खरीदें।
तिवारी ने आगे कहा, "हम यह संदेश देना चाहते हैं कि ऐसा न हो कि आपका पैसा जिहादियों के पास चला जाए और लव जिहाद की घटनाओं का अंजाम देने वाले लोग इसका उपयोग करें।" उनका यह कथन स्पष्ट रूप से बताता है कि वे सांस्कृतिक संरक्षण को लेकर कितने चिंतित हैं और इस संबंध में समाज को जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं।
इन गतिविधियों ने भोपाल के बाजारों में चर्चा का एक नया विषय पैदा किया है। कुछ लोग इसे सकारात्मक पहल मानते हुए इसे संस्कृति की रक्षा का एक साधन मानते हैं, वहीं अन्य इसे विभाजनकारी और साम्प्रदायिकता की ओर बढ़ने वाला कदम मानते हैं।
दिवाली का त्योहार परंपरागत रूप से सभी धर्मों और संस्कृतियों को एक साथ लाने का अवसर होता है, लेकिन इस प्रकार के पोस्टर और बैनर ने इस परंपरा को चुनौती दी है। यह स्थिति लोगों को इस बात पर विचार करने के लिए मजबूर कर रही है कि क्या इस तरह की पहलों से समाज में एकता बढ़ेगी या फिर विभाजन का कारण बनेगी।
भोपाल में इस समय दिवाली का माहौल तो है, लेकिन साथ ही इस प्रकार के सांस्कृतिक पोस्टरों ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इस दिवाली, जब हम एकता और भाईचारे का जश्न मनाते हैं, ऐसे संदेश हमें यह याद दिलाते हैं कि हम किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अब यह देखना है कि क्या इस प्रकार की पहलें समाज में वास्तविकता में सकारात्मक परिवर्तन ला पाएंगी या नहीं।












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