CRPF का टर्मिनेटेड सिपाही फर्जी जॉइनिंग लेटर लेकर ड्यूटी ज्वाइन करने पहुंचा, DIG के FAKE साइन किए

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल कैंप बंगरसिया में बर्खास्त कॉन्स्टेबल डीआईजी का फर्जी जॉइनिंग लेटर लेकर सेक्टर कार्यालय में ज्वाइन करने पहुंच गया। लेकिन अधिकारियों ने बर्खास्त सिपाही को तुरंत ही पकड़ लिया इसके बाद मिसरोद पुलिस

राजधानी के बंगरसिया स्थित सीआरपीएफ कैंप में एक टर्मिनेटेड सिपाही गुरुवार को फर्जी जॉइनिंग लेटर लेकर दोबारा ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए डीआईजी ऑफिस पहुंच गया। जहां पर अधिकारियों ने उसकी जालसाजी पकड़ ली। आरोपी ने फर्जी जॉइनिंग लेटर पर डीआईजी के फर्जी हस्ताक्षर भी कर रखे थे। सीआरपीएफ ने आरोपी को हिरासत में लेकर मिसरोद थाना पुलिस के हवाले कर दिया। वही उसके खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है।

भोपाल में CRPF का टर्मिनेटेड सिपाही फर्जी जॉइनिंग लेटर लेकर ड्यूटी ज्वाइन करने पहुंचा

मिसरोद थाना के एएसआई राजेंद्र यादव ने बताया कि सीआरपीएफ कैंप बंद रसिया के रहने वाले रामचंद्र गौतम सीआरपीएफ में निरीक्षक के पद पर पदस्थ थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि मूलत बिहार के रहने वाले विक्रम सौलंकी सीआरपीएफ का टर्मिनेटेड आरक्षक है। उसे साल 2019 में ड्यूटी से करीब 2 ढाई साल तक गैरहाजिर रहने पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद उसे अपना पक्ष रखने के लिए 1 महीने का समय दिया गया था लेकिन उसने वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपना पक्ष नहीं रखा इस कारण उसकी बर्खास्तगी जारी रही। गुरुवार को अचानक बर्खास्त आरक्षण विक्रम सोलंकी एक जॉइनिंग लेटर लेकर डीआईजी सीआरपीएफ के ऑफिस पहुंचा और स्टाफ से उक्त लेटर के आधार पर दोबारा ड्यूटी ज्वाइन कराने का दबाव बनाने लगा।

जबरन दबाव बनाने को लेकर स्टाफ कर्मियों को शक हुआ। जब उसके जॉइनिंग लेटर की जांच की गई तो पता चला कि ऐसा कोई जॉइनिंग लेटर डीआईजी सीआरपीएफ के ऑफिस से जारी नहीं किया गया है। वहीं उस लेटर पर डीआईजी के फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। पूरे मामले का खुलासा होने पर सीआरपीएफ में आरोपी को हिरासत में ले लिया कोर मिसरोद पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने सीआरपीएफ निरीक्षक की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है।

पत्नी के साथ मिलकर बनाया प्लान !

आरोपी ने सीआरपीएफ अधिकारियों को पूछताछ के दौरान बताया कि आईजी के आदेश पर डीआईजी ने उसे अपील करने का पत्र दिया था। इसमें तत्कालीन डीआईजी के साइन, सील लगी थी। जैसे उसने स्कैन कर लिया। बाद में दूसरा लेटर बनाया उसमें सीबीआई में जॉइनिंग का आदेश लिखकर स्कैन किए हुए डीआईजी के साइन सील को पोस्ट कर दिया। आरोपी ने बताया कि उसकी पत्नी भी क्राइम ब्रांच में है, उसी ने ऐसा पत्र बनाने की सलाह दी थी, हालांकि पुलिस ने उसकी पत्नी को आरोपी नहीं बनाया है।

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