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ये दो लक्ष्मी यूं ही नहीं बनीं अपने-अपने शहर की पहली महिला कुली, दोनों की दास्तां है बेहद दर्दभरी

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भोपाल/जबलपुर। इन दोनों महिलाओं का नाम लक्ष्मी है। दोनों पर पहले दुखों का पहाड़ टूटने और फिर पहाड़ सा हौसला बनाए रखने की इनकी दास्तां लगभग समान है। परिवार के खातिर दोनों ने ऐसा पेशा चुना, जहां आमतौर पर पुरुषों का वर्चस्व है। तभी तो हर कोई मुसाफिर इनकी हिम्मत को सैल्यूट करता नजर आता है।

story of women Coolie Lakshmi at Bhopal and jabalpur railway station

हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के भोपाल और जबलपुर रेलवे स्टेशन पर बतौर कुली कार्यरत लक्ष्मी नाम की उन दो महिलाओं की, जो हर किसी के लिए मिसाल हैं। दरअसल, भोपाल की लक्ष्मी शिवहरे ने ​अपने पति राकेश और जबलपुर की लक्ष्मी ने पिता की मौत के बाद कुली बनी हैं। दोनों ही अपने-अपने शहर के रेलवे स्टेशन की पहली महिला कुली हैं।

भोपाल रेलवे स्टेशन की कुली लक्ष्मी शिवहरे

भोपाल रेलवे स्टेशन की कुली लक्ष्मी शिवहरे

बता दें कि 30 वर्षीय महिला कुली लक्ष्मी शिवहरे भोपाल के बरखेड़ा पठानी की रहने वाली है। 2009 में राकेश शिवहरे के साथ शादी हुई थी। उसी साल पति को बतौर कुली बैज (बिल्ला नंबर 13) मिला था। शादी के दो साल बाद दोनों के एक बेटा हुआ। सब कुछ ठीक चल रहा था। इसी बीच पति को शराब पीने की लत लग गई। परिवार में सबने समझाइश की, मगर राकेश से शराब नहीं छूटी। नतीजतन फरवरी 2019 में उसकी मौत हो गई। इसके बाद लक्ष्मी ने पति का बिल्ला नंबर 13 अपने नाम अलॉट करवाया और अगस्त 2019 से लक्ष्मी ने भोपाल रेलवे स्टेशन पर बतौर कुली काम शुरू कर दिया।

एसोसिएशन दे रही ट्रेनिंग

एसोसिएशन दे रही ट्रेनिंग

मीडिया से बातचीत में भोपाल स्टेशन कुली एसोसिएशन की रात की शिफ्ट के अध्यक्ष प्रभुलाल महावर ने बताया कि राकेश ने उनके साथ 10 साल काम किया। अब उसकी पत्नी लक्ष्मी को परेशानी न हो इसके लिए ट्रेनिंग दे रहे हैं। बुजुर्ग यात्रियों की बुकिंग लक्ष्मी को ही दी जाती है। वहीं, कुली एसाेसिएशन के पूर्व संरक्षक राजेश तिवारी का कहना है कि रेलवे स्टेशन के कुलियाें काे जाे बिल्ला अलाॅट हाेता है, उस पर केवल पत्नी और बच्चों का ही अधिकार हाेता है।

जबलपुर रेलवे स्टेशन की कुली है लक्ष्मी

जबलपुर रेलवे स्टेशन की कुली है लक्ष्मी

पश्चिम मध्य रेलवे जोन मुख्यालय के जबलपुर रेलवे स्टेशन पर काम करने वाली लक्ष्मी यहां की पहली महिला कुली है। पुरुष कुलियों के बीच इस महिला कुली को यात्रियों का सामान ले जाते देख बाहरी लोगों को थोड़ा आश्चर्य होता है, लेकिन यहां के बाशिंदे लक्ष्मी को भली भांति पहचानते हैं। खास बात यह है कि ओमती निवासी लक्ष्मी ने माता गुजरी बाई कॉलेज जबलपुर से बीकॉम कर रखा है।

पहला आवेदन लक्ष्मी का

पहला आवेदन लक्ष्मी का

पश्चिम मध्य रेलवे के जोन मुख्यालय ने महिला कुलियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की तब लक्ष्मी वह पहली महिला थी जिसका आवेदन प्राप्त हुआ। रेलवे ने नियुक्ति पत्र देने के साथ ही लक्ष्मी को 23 नंबर का बैज प्रदान किया। पिता के स्वर्गवास के बाद परिवार को सहारा देने व आत्मनिर्भर बनने के लिए उसने पुरुषों के एकाधिकार वाला यह काम चुना।

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story of women Coolie Lakshmi at Bhopal and jabalpur railway station
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