MP News: SIR सर्वे का खौफ! 6 राज्यों में 15 BLO की मौत—MP में सबसे ज्यादा 4; परिजनों का आरोप: “काम का आतंक
मध्य प्रदेश में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) सर्वे ने अब जानलेवा रूप धारण कर लिया है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण के नाम पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की जिंदगियां दांव पर लग गई हैं। मात्र चार दिनों में 50 BLO बीमार पड़े, दो को हार्ट अटैक आया, और चार की मौत हो चुकी है।
पूरे देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR अभियान चल रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा हादसे हुए हैं - कुल 15 मौतों में से 4 सिर्फ यहां। परिजनों का रो-रोकर बयान है, "ये सर्वे जीवनभर का दर्द दे गया।

काम का अत्यधिक दबाव, रोजाना नोटिस, सस्पेंशन की धमकी - यही मौत की वजह है।" चुनाव आयोग (ECI) ने BLOs को चेतावनी दी है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। क्या यह सर्वे लोकतंत्र की मजबूती के लिए है या BLOs की कमजोरी का शिकार?
देशभर में SIR का खौफ: 6 राज्यों में 15 मौतें, MP सबसे प्रभावित
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) - मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण - 19 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन यह अभियान BLOs के लिए काल बन गया है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात और मध्य प्रदेश में प्रत्येक में 4-4, पश्चिम बंगाल में 3, राजस्थान, तमिलनाडु और केरल में एक-एक BLO की मौत हो चुकी है। अधिकांश मामलों में कारण हार्ट अटैक, स्ट्रेस या सुसाइड बताया गया। पश्चिम बंगाल में तो दूसरी BLO रिंकू तारफदार (53 वर्ष) ने नोट लिखकर सुसाइड कर लिया, जिसमें ECI को जिम्मेदार ठहराया। ममता बनर्जी ने CEC ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर SIR रोकने की मांग की। गुजरात के गिर सोमनाथ में एक BLO ने नोट में लिखा, "मैं थक गया हूं। SIR का वर्कलोड असहनीय है।" तमिलनाडु के कल्लाकुरिची में एक BLO ने फांसी लगा ली।
मध्य प्रदेश में स्थिति सबसे चिंताजनक है। ETV भारत और द हिंदू की रिपोर्ट्स के मुताबिक, रायसेन और दमोह जिलों में दो BLOs की मौत हो गई। रायसेन के टीलाखेड़ी प्राइमरी स्कूल के शिक्षक रमाकांत पांडे (50 वर्ष) को हार्ट अटैक आया, जबकि दमोह में एक अन्य BLO की मौत बीमारी से बताई गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि SIR ड्यूटी के दबाव ने उन्हें तोड़ दिया। एक BLO छह दिनों से लापता है। भोपाल में दो BLOs को हार्ट अटैक के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। इंडिया टुडे और फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार, MP में चार मौतें हुईं, जो देशभर की 15 में से सबसे ज्यादा हैं।
MP में SIR की रफ्तार: 100% फॉर्म वितरण, लेकिन सिर्फ 51% डिजिटल एंट्री
मध्य प्रदेश में SIR 1 नवंबर से शुरू हुआ और 19 नवंबर तक 100% गणपति पत्रक (वोटर फॉर्म) वितरित हो चुके हैं। लेकिन डिजिटल एंट्री सिर्फ 51% ही हुई है। जॉइंट चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) आरपीएस जादौन ने कहा, "जो वोटर्स घर पर नहीं मिले, BLO अभियान खत्म होने पर पूरी लिस्ट देंगे। अभी कोई अंतिम सूची नहीं है।" लेकिन जमीनी स्तर पर समस्या बनी हुई है। SIR ऐप में तकनीकी खराबी से एंट्री अपलोड नहीं हो रही, जिससे BLOs का तनाव दोगुना हो गया। एक BLO ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "जो काम तीन महीने का था, वो हमें 20 दिन में करना है। ऐप क्रैश हो जाता है, रिपोर्ट न जमा होने पर नोटिस आता है।"
प्रदेश में 35 लाख वोटर 'गायब' बताए जा रहे हैं, लेकिन जादौन ने स्पष्ट किया कि यह प्राविजनल आंकड़ा है। SIR का लक्ष्य फर्जी वोटर हटाना और नए वोटर जोड़ना है, लेकिन BLOs को घर-घर जाकर फॉर्म भरना, फोटो लेना और डिजिटल अपलोड करना पड़ रहा है।
काम का बोझ: रोज 12-14 घंटे, नोटिस का डर, कोई राहत नहीं
BLOs - ज्यादातर सरकारी स्कूल शिक्षक या पेंशनभोगी - SIR में फ्रंटलाइन वर्कर हैं। लेकिन कोई स्वास्थ्य जांच, सुरक्षा या राहत सुविधा नहीं। गर्मी-सर्दी की परवाह किए बिना घर-घर जाना पड़ता है। एक BLO ने कहा, "सुबह 6 बजे निकलते हैं, रात 10 बजे लौटते हैं। टारगेट बड़ा, समय कम। देरी पर नोटिस, सस्पेंशन की धमकी। कई BLO बिना छुट्टी के काम कर रहे।"
परिजनों का फूट-फूटकर बयान: रमाकांत पांडे की पत्नी रेखा ने कहा, "पति रोज थककर लौटते, SIR की बात पर रो पड़ते। नोटिस आया तो डर गए। यही दबाव था।" दमोह की एक विधवा ने बताया, "ये सर्वे जीवनभर का दर्द दे गया। सरकार को BLOs की जिंदगी की कीमत समझनी चाहिए।"
कई जिलों में रात तक ड्यूटी हो रही है। SIR ऐप की खराबी से रिपोर्टिंग में देरी, जिस पर ECI ने सख्ती की। 19 नवंबर को ECI ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि लापरवाही पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी।
BLOs की जुबानी: "सांसें फूल रही हैं, टारगेट पूरा करने का दबाव"
- रायसेन के एक BLO: "100 घर कवर करने हैं, लेकिन 50% लोग घर पर नहीं। ऐप हैंग हो जाता है, फिर नोटिस। हार्ट पेशेंट हूं, दवा लेना भूल जाता हूं।"
- भोपाल की एक BLO: "महिलाओं को घर-घर जाना मुश्किल। कोई सुरक्षा नहीं, लेकिन टारगेट मिस न हो।"
- दमोह के BLO: "तीन महीने का काम 20 दिन में। सस्पेंशन का डर रातों की नींद उड़ा देता है।"
सरकार-ECI का रुख: जांच का वादा, लेकिन BLOs निराश
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने स्वास्थ्य विभाग को BLOs की जांच के निर्देश दिए। CEO जादौन ने कहा, "BLOs की परेशानी समझते हैं। ऐप की समस्या ठीक हो रही है।" लेकिन BLO एसोसिएशन ने SIR रोकने की मांग की। दैनिक जागरण के अनुसार, ECI ने BLOs को मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन दी, लेकिन जमीनी बदलाव नहीं।
क्या हो समाधान? विशेषज्ञों की राय
- समय बढ़ाएं: 19 दिन के बजाय 30-45 दिन दें।
- तकनीकी सुधार: SIR ऐप को अपग्रेड करें।
- राहत: स्वास्थ्य बीमा, ओवरटाइम भत्ता, छुट्टियां दें।
- मानसिक सहायता: काउंसलिंग सेंटर स्थापित करें।
SIR का उद्देश्य अच्छा है - लोकतंत्र को मजबूत बनाना। लेकिन BLOs की कीमत पर नहीं। परिजनों की पुकार है, "सर्वे से ज्यादा सांसों की चिंता करो।" क्या ECI और सरकार सुनेंगी, या और जिंदगियां दांव पर लगेंगी? MP में SIR खत्म होने तक सतर्कता जरूरी है।
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