होली अपने गांव में मनाते थे शरद यादव, नर्मदा पुरम के आंखमऊ गांव को रहता था उनके आने का इंतजार
बिहार पॉलिटिक्स में अलग पहचान रखने वाले शरद यादव का का जन्म 1 जुलाई 1947 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद के बाबई में आंखमऊ गांव में हुआ था। छात्र राजनीति से लेकर बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई थी।
शरद यादव का जन्म 1 जुलाई 1947 को मध्यप्रदेश की नर्मदापुरम (पूर्व होशंगाबाद) जिले के माखन नगर विकासखंड के ग्राम आंखमऊ में हुआ था। उनका बचपन आंखमऊ में ही गुजरा था। होली शरद यादव आंखमऊ में ही मनाते थे यहां पे 2 दिन रहते थे उनके आने का इंतजार परिवार के साथ पूरे गांव को रहता था। लेकिन कोरोना के चलते हुए होली मनाने अपने गांव नहीं आ सके थे।

सहज और सरल स्वभाव के थे शरद यादव
पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी एपीएस यादव के बड़े भाई शरद यादव का कद जितना बड़ा था। वे उतने ही सहज और सरल स्वभाव के थे। होली में पूरे गांव के साथ मिलते थे इस दौरान वे उन परिवारों के बीच जरूर जाते थे जिनके घर गमी हो जाती थी गुरुवार देर रात जैसे ही उनके निधन की खबर पहुंची पूरा गांव स्तंभ रह गया और शोक में डूब गया शरद यादव के बेहद करीबी रहे कांग्रेस के प्रवक्ता धर्मेंद्र तिवारी ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल के दौरान होली पर वह गांव नहीं आ सके थे तब 2019 में वे गांव आए थे तब पूरे गांव ने उनका स्वागत किया था। नर्मदा पुरम वासियों से उनका विशेष लगाव रहता था। नर्मदा पुरम से जो भी दिल्ली जाता था, उसका विशेष स्वागत सत्कार होता था।

जबलपुर में एक नारी के बल पर शरद ने दी थी कांग्रेस को मात
पांचवी लोकसभा में तत्कालीन सांसद सेठ गोविंद दास के निधन पर साल 1974 में जबलपुर सीट पर उपचुनाव हुआ। विपक्ष ने शरद यादव को संयुक्त तौर पर प्रत्याशी बनाया। चुनाव में नारों की अपनी अहमियत है नारू की लहर से जीत निकलती है, यह तब के चुनाव से सामने आया था। शरद यादव के पक्ष में नारा निकला लल्लू को ना जगदर को मोहर लगेगी हलदर को। इसी नारे पर चरण यादव ने जबलपुर में कांग्रेस की नींव को कमजोर कर जीत हासिल की थी उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी जगदीश नारायण अवस्थी को शिकायत दी थी। शरद यादव को चुनाव चिन्ह अंदर किसान नहीं मिला था 1974 में शरद यादव की जीत का कार्यकाल 3 साल का रहा। छठी लोकसभा में 1977 में फिर चुनाव हुए।

JDU के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव का कल रात हुआ था निधन
बता दे JDU के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव का गुरुवार को निधन हो गया। उनकी बेटी शुभाषिनी यादव ने इस दुखद खबर की जानकारी दी है। प्रधानमंत्री सहित कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने भी शरद यादव को श्रद्धांजलि अर्पित की हैं। उन्होंने 75 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। शुभाषिनी यादव ने ट्वीट करते लिखा कि 'पापा नहीं रहे।' उनका निधन गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में हुआ है। उनके परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटी और एक बेटा है।

फोर्टिस अस्पताल में निधन
बता दे फोर्टिस अस्पताल ने बयान जारी कर कहा था कि शरद यादव को गंभीर और अचेत अवस्था में इमरजेंसी वार्ड में लाया गया था। शुरुआती जांच में वह किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं कर रहे थे। इलाज के दौरान ही उन्होंने 10 बजे दम तोड़ दिया। फोर्टिस अस्पताल ने शोक में डूबे परिवार के साथ दुख जताया है। बता दें कि बिहार पॉलिटिक्स में अलग पहचान रखने वाले शरद यादव का का जन्म 1 जुलाई 1947 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद के बंबाई गांव में हुआ था। छात्र राजनीति से लेकर बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई थी। शरद यादव ने एमपी, यूपी और बिहार में अपना परचम लहराया था।
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