रंगे हाथ पकड़ाया रिश्वतखोर! सिवनी में 1500 रुपये लेते हुए लोकायुक्त ने दबोचा खरीदी प्रभारी और कंप्यूटर ऑपरेटर
जबलपुर लोकायुक्त इकाई ने एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। धान खरीदी केंद्र पर किसानों से चालान जारी करने के एवज में 1800 रुपये रिश्वत मांगने वाले खरीदी प्रभारी हसीब अंसारी और सहआरोपी कंप्यूटर ऑपरेटर मुकेश ठाकुर को रंगे हाथ पकड़ लिया गया।
आरोपी मुकेश ठाकुर को 1500 रुपये की रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया गया। यह पूरी कार्रवाई पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के सख्त निर्देशों और पुलिस उप महानिरीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन में की गई।

आवेदक दुर्गेश चंद्रवंशी (पुत्र कुंजीलाल चंद्रवंशी, उम्र 30 वर्ष, निवासी ग्राम भौमाटोला, थाना कान्हीवाडा, जिला सिवनी) ने लोकायुक्त से शिकायत की थी कि समनापुर खरीदी केंद्र के प्रभारी हसीब अंसारी उनके धान की तुलाई के बाद चालान जारी करने के एवज में 1800 रुपये रिश्वत मांग रहे थे।
जब दुर्गेश ने रिश्वत देने से इनकार किया तो उन्हें बार-बार परेशान किया जा रहा था। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त जबलपुर ने त्वरित ट्रैप टीम गठित की।
ट्रैप कैसे सफल हुआ?
15 जनवरी 2026 को ट्रैप टीम ने समनापुर खरीदी केंद्र पर छापा मारा। आवेदक दुर्गेश ने आरोपी मुकेश ठाकुर (कंप्यूटर ऑपरेटर, दैनिक वेतन भोगी) को 1500 रुपये की रिश्वत दी। जैसे ही मुकेश ने पैसे लिए, टीम ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया। मौके पर ही दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
ट्रैप दल में शामिल थे:
- निरीक्षक शशिकला मस्कुले
- टीएलओ निरीक्षक जितेंद्र यादव
- लोकायुक्त जबलपुर की पूरी टीम
ट्रैप के दौरान 315 बोर का कट्टा नहीं मिला, लेकिन रिश्वत की राशि, चालान और अन्य सबूत जब्त किए गए।
आरोपियों पर लगी धाराएं
दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7, 12, 13(1)B और 13(2) के तहत कार्यवाही की जा रही है। यह धाराएं रिश्वत लेने, देने और आपराधिक विश्वासघात से संबंधित हैं।
पीड़ित किसान का दर्द: "रिश्वत नहीं दी तो चालान नहीं मिलता था"
दुर्गेश चंद्रवंशी ने बताया, "हम गरीब किसान हैं। धान बेचकर परिवार चलाते हैं। प्रभारी ने कहा था - 1800 रुपये दो, तभी चालान मिलेगा। हमने लोकायुक्त से शिकायत की और आज रंगे हाथ पकड़ा गया।"
लोकायुक्त की सख्ती: भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख ने इस ट्रैप की सफलता पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि किसानों से जुड़ी योजनाओं में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस उप महानिरीक्षक मनोज सिंह ने ट्रैप टीम की तारीफ की और कहा कि ऐसी कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।
यह ट्रैप धान खरीदी केंद्रों पर रिश्वतखोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई है। किसान संगठन इसे राहत की बात बता रहे हैं। विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा और कहा कि "खरीदी केंद्रों पर भ्रष्टाचार आम है, सरकार अब जागी है।"
1500 रुपये की रिश्वत में फंसे रिश्वतखोर
एक गरीब किसान की शिकायत पर लोकायुक्त ने महज 1500 रुपये की रिश्वत में दो कर्मचारियों को रंगे हाथ पकड़ लिया। यह कार्रवाई साबित करती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति धरातल पर उतर रही है। अब सवाल यह है कि क्या अन्य खरीदी केंद्रों पर भी ऐसी कार्रवाई होगी? किसानों को न्याय मिलेगा या नहीं? वनइंडिया हिंदी अपडेट लाता रहेगा।












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