सीहोर के 3 गांवों में अनोखी होली, होली दहन पर किसानों ने ली शराब छोड़ने की शपथ, नशा मुक्त समाज का संकल्प
होली के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के तीन गांवों-चंदेरी, राम खेड़ी और उल्लास खुर्द-की धरती पर एक अनोखी और प्रेरणादायक घटना घटी। इन गांवों के किसानों ने न केवल पारंपरिक होली दहन किया, बल्कि इस दहन के साथ ही नशे और शराब को जलाने का संकल्प भी लिया।
किसान व समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों किसानों ने एकजुट होकर शराब छोड़ने की शपथ ली और नशा मुक्त समाज बनाने का ऐलान किया। किसानों का कहना था कि "जब होली दहन में बुराइयों को जलाया जाता है, तो हमें भी कुछ त्याग करना चाहिए। आज हम शराब जैसी बुराई को त्यागने की शपथ लेते हैं।"

कार्यक्रम का विवरण और शपथ ग्रहण
कार्यक्रम की शुरुआत होली दहन के साथ हुई। तीनों गांवों के किसान एक साथ जुटे और होली की अग्नि में नशे और शराब के प्रतीक को जलाया। इसके बाद सभी उपस्थित किसानों ने सामूहिक रूप से शपथ ली: "आज के बाद हम सब उपस्थित किसान शराब नहीं पिएंगे। हम अपने परिवार और समाज को नशा मुक्त रखेंगे।" इस शपथ ग्रहण में विशेष रूप से शामिल रहे किसान रमेश चंद्र वर्मा (उल्लास खुर्द), राम सिंह मेवाड़ा, मोतीलाल मेवाड़ा, सिंह अचल सिंह, पदम सिंह, बटन सिंह, जसराज सिंह मेवाड़ा, नरेश, विकास, रूप सिंह, अनिल और अन्य।
किसान व समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, "होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि बुराइयों को जलाने और नई शुरुआत का प्रतीक है। आज हमने शराब जैसी लत को जलाया है। यह शपथ केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन बदलने का संकल्प है। हम चाहते हैं कि हमारे गांव नशा मुक्त हों, बच्चे सुरक्षित रहें और परिवार खुशहाल रहें।" मेवाड़ा ने कहा कि किसान समाज में शराब की लत ने कई परिवारों को बर्बाद किया है, और अब समय आ गया है कि हम खुद बदलाव लाएं।
किसानों की भावनाएं और सामाजिक संदेश
उल्लास खुर्द के किसान रमेश चंद्र वर्मा ने कहा, "हम रोज खेतों में मेहनत करते हैं, लेकिन शराब ने कई किसानों की जिंदगी बर्बाद कर दी। आज हमने शपथ ली है कि अब शराब नहीं पिएंगे। यह होली हमारे लिए नई शुरुआत है।" राम खेड़ी के मोतीलाल मेवाड़ा ने बताया कि गांव में कई परिवार शराब की वजह से कर्ज में डूबे हैं। इस शपथ से अब गांव में जागरूकता फैलेगी।
कार्यक्रम में मौजूद अन्य किसानों ने भी कहा कि यह शपथ केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक है। वे चाहते हैं कि पूरा गांव नशा मुक्त बने और आने वाली पीढ़ियां स्वस्थ और शिक्षित रहें। इस दौरान नारे लगाए गए-"नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो", "होली दहन में बुराई जलाओ, नशा मुक्त गांव बनाओ"।
सामाजिक और राजनीतिक मायने
यह कार्यक्रम केवल एक होली दहन नहीं था, बल्कि सामाजिक जागरूकता का बड़ा संदेश था। सीहोर जिले के इन तीन गांवों में किसान समाज ने खुद पहल करके नशा मुक्ति का संकल्प लिया है। स्थानीय स्तर पर इसे बहुत सकारात्मक कदम माना जा रहा है। कई सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन इसे मॉडल के रूप में देख रहे हैं, ताकि अन्य गांवों में भी ऐसे अभियान चलाए जा सकें।
एमएस मेवाड़ा ने कहा कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। वे विभिन्न गांवों में जाकर किसानों को नशा मुक्ति के लिए प्रेरित करेंगे। कार्यक्रम के अंत में सभी किसानों ने एक साथ "नशा मुक्त भारत, नशा मुक्त मध्य प्रदेश" का नारा लगाया।
यह घटना होली के मौके पर एक अलग संदेश लेकर आई है-रंगों के साथ-साथ बुराइयों को जलाने और नई जिंदगी की शुरुआत का। सीहोर जिले के इन तीन गांवों ने न केवल होली मनाई, बल्कि समाज के लिए एक मिसाल भी पेश की है।












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