Satna School building damaged: मौत के साए में पढ़ रहीं 13 सौ छात्राएं, स्कूल भवन के गेट पर जड़ा ताला
सतना, 18 अगस्त। सरकार उच्च गुणवत्ता की शिक्षा के दावे करती है, लेकिन मौजूदा हालात का अंदाजा मध्यप्रदेश के सतना जिले के बिरसिंहपुर में हुए छात्राओं के हंगामे के बाद लगाया जा सकता है। कन्या उच्चतर शासकीय माध्यमिक बिरसिंहपुर विद्यालय की 13 सौ छात्राओं ने विद्यालय के गेट में तालाबंदी कर दी और जमकर नारेबाजी करने लगीं। हालांकि हंगामे की जानकारी मिलने पर आला अधिकारी मौके पर आए और उन्होंने छात्राओं आश्वासन देकर देकर ताला खुलवाया गया।

खतरे के साए में कर रही है पढ़ाई
छात्राओं का आरोप है कि जिस भवन में उन्हें पढ़ाया जाता है। वह जर्जर हो चुका है और कभी भी गिर सकता है। इससे कभी भी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती है। शिकायत करने पर अध्यापकों अभद्र तरीके से बात करते हैं। इसी के विरोध में 17 अगस्त को विद्यालय में तालाबंदी की गई।

बीते दिनों हो चुकी है घटना
बताते चलें कि बीते दिनों जर्जर भवन में सीलिंग पंखा गिरने से कुछ छात्राएं बाल बाल बची थी, जान का जोखिम देख कर आज छात्राओं ने स्कूल भवन की मांग करते हुए विद्यालय के दरवाजे में तालाबंदी कर दी है।

नव जर्जर कमरे 13 सौ छात्राएं
बिरसिंहपुर कन्या उच्चतर शासकीय माध्यमिक स्कूल में 13 सौ छात्राएं अध्ययनरत है, लेकिन यहां सिर्फ 9 कमरे हैं। वह भी जर्जर हालत में हैं। ऐसे में छात्राएं पठन-पाठन का कार्य नहीं हो पा रहा है। छात्राओं ने बताया कि बीते दिन जर्जर भवन होने के कारण सीलिंग पंखा कक्षा के दौरान नीचे गिर गया था। इस घटना में छात्राएं बाल-बाल बची थी।

अधिकारियों ने कहा होगी जांच
मामले की खबर जब शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को मिली तो मौके पर पहुंचकर उन्होंने छात्राओं को समझाइश दी। इसके साथ ही उन्होंने जल्द नए भनव का आश्वासन भी दिया। अधिकारियों की मानें तो भवन का निर्माण की राशि स्वीकृत है। लेकिन जमीनी विवाद होने के कारण भवन अब तक नहीं बन सका। वहीं छात्राओं से शिक्षकों द्वारा अभद्र तरीके से बात करने के आरोप में उन्होंने जांच के बाद कार्रवाई करने की बात कही है।

परसवाही स्कूल में भी मौत के साए में पढ़ रहे बच्चे
अमरपाटन क्षेत्र में स्थिति शासकीय पूर्व माध्यमिक स्कूलपरसवाही में बने कमरों की छत पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। छत कब गिर जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता है। लेकिन, छत के नीचे बैठकर सैकड़ों बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। मासूम बच्चों की जिंदगी पर मौत का संकट मंडरा रहा है। लेकिन, शिक्षा विभाग के अफसरों पर इस ओर भी कोई ध्यान नहीं है। इस सरकारी स्कूल में शिक्षा के नाम पर मासूमों को मौत के मुंह में धकेलने का काम चल रहा है, लेकिन यहां भी शिक्षा विभाग नींद की आगोश में है।












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