Bhopal News: नगर निगम की बैठक में हंगामा, न्यू मार्केट की प्रीमियम पार्किंग पर सवाल, पप्पू विलास ने लगाए आरोप
Bhopal News: भोपाल नगर निगम परिषद की हालिया बैठक में कांग्रेस पार्षदों ने जमकर हंगामा किया और विभिन्न मुद्दों पर निगम अधिकारियों और महापौर को घेरा। खासतौर पर न्यू मार्केट की प्रीमियम पार्किंग और निगम इंजीनियरों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर बैठक में तीखी बहस हुई।
न्यू मार्केट की प्रीमियम पार्किंग पर सवाल
बैठक में वार्ड 34 के पार्षद पप्पू विलास ने न्यू मार्केट की प्रीमियम पार्किंग को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि निगम अधिकारियों ने अख्तर इंटरप्राइजेस को फायदा पहुंचाने के लिए पार्किंग संचालन की शर्तों में समझौता किया है।

विलास ने आरोप लगाया कि निगम ने करोड़ों रुपये खर्च करके न्यू मार्केट में मल्टीलेवल पार्किंग बनाई, लेकिन यह अब खाली पड़ी हुई है, जबकि पार्किंग का संचालन अख्तर इंटरप्राइजेस को सौंप दिया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह कदम भ्रष्टाचार और समझौते का परिणाम है, जिस पर निगम अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने की जरूरत है।
निगम इंजीनियरों पर कमीशनखोरी का आरोप
कांग्रेस पार्षद मोहम्मद सरवर ने बैठक में निगम के इंजीनियरों पर गंभीर आरोप लगाए। सरवर ने कहा कि गारंटी अवधि में बनी सड़कों की हालत अब खराब हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि नई सड़कों के निर्माण में डामर की बजाय डीजल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठता है।
इसके अलावा, सरवर ने यांत्रिक विभाग के इंजीनियरों पर 10 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप भी लगाया। इन आरोपों से निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं, और पार्षदों ने इन मुद्दों पर जांच की मांग की।

महापौर की गैरमौजूदगी और नारेबाजी
बैठक के दौरान महापौर की गैरमौजूदगी को लेकर कांग्रेस पार्षदों ने नाराजगी जाहिर की। पार्षदों ने नारेबाजी करते हुए कहा, "महापौर होश में आओ, परिषद की बैठक चालू करो!" और "अध्यक्ष जी होश में आओ, परिषद की बैठक चालू करो!" इस दौरान पार्षद पप्पू विलास ने न्यू मार्केट की प्रीमियम पार्किंग के भ्रष्टाचार पर चर्चा करने की मांग की, जिस पर परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी और उनके बीच तीखी बहस हुई। बाद में, अध्यक्ष ने इस मामले पर चर्चा करने का आश्वासन दिया।
अपर आयुक्त निधि सिंह के खिलाफ निंदा प्रस्ताव
बैठक में सबसे गंभीर कदम के रूप में अपर आयुक्त निधि सिंह के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश किया गया। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ने उनके कामकाजी रवैये पर सवाल उठाए। आरोप था कि निधि सिंह जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुनतीं, फोन नहीं उठातीं, और फाइलों को अटकातीं हैं। इन आरोपों के बाद निगम परिषद की बैठक में उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश किया गया, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। यह घटना निगम प्रशासन में आंतरिक संघर्ष और लापरवाही को उजागर करती है।

भोपाल नगर निगम की इस बैठक ने निगम अधिकारियों और महापौर के खिलाफ कांग्रेस पार्षदों के गुस्से को दिखाया। न्यू मार्केट की पार्किंग से लेकर इंजीनियरों की भ्रष्टाचार और अपर आयुक्त की लापरवाही तक कई गंभीर मुद्दों पर बहस हुई। इन घटनाओं ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, और अब देखने की बात यह होगी कि इन आरोपों की जांच होती है या नहीं, और क्या निगम प्रशासन इन मुद्दों का समाधान निकालता है।
कमिश्नर और निगम अधिकारियों द्वारा मीटिंग छोड़ने पर हंगामा, कांग्रेस पार्षदों ने किया विरोध
भोपाल नगर निगम की हालिया बैठक में एक विवाद ने तूल पकड़ा, जब कमिश्नर और अन्य निगम अधिकारी मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मीटिंग को बीच में ही छोड़कर चले गए। इस पर कांग्रेस और बीजेपी के पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
कमिश्नर और निगम अधिकारियों का मीटिंग छोड़ना
पार्षद पप्पू विलास ने कमिश्नर और निगम अधिकारियों के मीटिंग छोड़ने पर तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि निगम प्रशासन को अपने कार्यों की प्राथमिकता तय करनी चाहिए, और बैठक में भाग लेने के बजाय अधिकारियों को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने का निर्णय उचित नहीं था। इस पर परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने सफाई दी कि मुख्यमंत्री जी का कार्यक्रम बड़ा था, और नगर निगम को कई प्रकार की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, इसलिए अधिकारियों को कार्यक्रम में जाना पड़ा।
कांग्रेस पार्षदों का विरोध
इस मुद्दे पर विरोध बढ़ा जब नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने भी अधिकारियों के बैठक छोड़ने पर आपत्ति जताई। इसके बाद, बैठक शुरू होने से पहले ही कांग्रेस पार्षदों ने 16 दिसंबर को कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान हटाए गए होर्डिंग्स को लेकर नारेबाजी की। कांग्रेस का आरोप था कि नगर निगम प्रशासन ने भेदभावपूर्ण तरीके से होर्डिंग्स हटाए। पार्षदों ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ "नगर निगम प्रशासन होश में आओ, मनमानी नहीं चलेगी" जैसे नारे लगाए और परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी की आसंदी को घेर लिया।
बीजेपी पार्षदों की प्रतिक्रिया
बीजेपी पार्षदों ने कांग्रेस के आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि यदि होर्डिंग्स के लिए अनुमति नहीं ली गई थी और किराया नहीं दिया गया था, तो उन्हें हटाया जाना उचित था। बीजेपी ने इस मुद्दे को निगम प्रशासन के नियमों के तहत तर्कसंगत बताते हुए कांग्रेस के आरोपों को नकारा।












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