Bhopal news: रिटायर्ड इंस्पेक्टर और उसके साथी पर 27 हजार स्क्वायर फीट जमीन की फर्जी बिक्री का आरोप
भोपाल के बावड़िया कला इलाके में एक बड़े जालसाजी का मामला सामने आया है, जिसमें रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर और उसके साथी पर आरोप है कि उन्होंने एक 27 हजार स्क्वायर फीट के प्लॉट को फर्जी तरीके से बेच दिया।
इस मामले में ऑटो डीलर पवन यादव की शिकायत पर शाहपुरा पुलिस ने धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का केस दर्ज किया है। हालांकि, अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

घटना का विवरण
ऑटो डीलर पवन यादव (48), जो भोपाल के दानिशकुंज इलाके के निवासी हैं, ने बताया कि सितंबर 2023 में उन्होंने 27 हजार स्क्वायर फीट की जमीन का सौदा हनुवंत सिंह राजपूत से किया था। हनुवंत सिंह राजपूत रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर हैं और उनके साथ इस सौदे में दो अन्य लोग शामिल थे - अतुल ब्योहार और हरीष पटेल। हनुवंत ने पवन को बताया कि वह सरकारी कर्मचारी हैं, इसलिए वह सीधे तौर पर सौदा नहीं कर सकते, लिहाजा उन्होंने अपने परिचितों अतुल और हरीष को पावर ऑफ अटॉर्नी (कानूनी प्रतिनिधि) दे रखा था।
पवन यादव ने जब जमीन को पसंद किया, तो उन्होंने हनुवंत को 55 लाख रुपए का भुगतान तीन किश्तों में किया। ये भुगतान चेक के जरिए किए गए थे, और जमीन के कब्जे के बाद फेंसिंग करने और बाकी की राशि चुकता करने का समझौता हुआ था।
जालसाजी का खुलासा
जब पवन यादव अपनी जमीन की स्थिति देखने के लिए मौके पर पहुंचे, तो उन्हें यह जानकर झटका लगा कि जिस 27 हजार स्क्वायर फीट के प्लॉट को उन्होंने खरीदा था, वह और आसपास की जमीन विवादित है। यह पता चला कि रिटायर्ड इंस्पेक्टर हनुवंत सिंह राजपूत ने जालसाजी करके यह जमीन फर्जी तरीके से बेच दी थी।
पवन यादव ने मामले की जानकारी शाहपुरा पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और धोखाधड़ी, अमानत में खयानत जैसी धाराओं में केस दर्ज किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में पूरी जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
शाहपुरा थाना पुलिस ने बताया कि पवन यादव की शिकायत पर रिटायर्ड इंस्पेक्टर हनुवंत सिंह राजपूत और उनके साथियों अतुल ब्योहार व हरीष पटेल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस द्वारा कहा गया कि मामले की गहन जांच की जा रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
इसके अलावा, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस फर्जी बिक्री में और भी कोई व्यक्ति शामिल है, और क्या यह जमीन किसी और के नाम पर थी। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस मामले में सरकारी विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता है, जिन्होंने इस जमीन के दस्तावेजों पर सही तरीके से जांच नहीं की।












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