इन जिलों में बारिश से फसलें हो रही चौपट, मानसून की वापसी से किसानों पर दोहरी मार, दशहरे पर भी पानी का अलर्ट
मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद फिर से सक्रिय हो चुका है, और इस बार किसानों की फसलें इसकी चपेट में आ रही हैं। मानसून ट्रफ और लो प्रेशर एरिया के प्रभाव से राज्य के कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है, जिससे खेतों में पानी भर गया है और फसलें चौपट हो रही हैं।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए पूरे प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। सबसे ज्यादा नुकसान धार, बड़वानी, खरगोन, नरसिंहपुर, डिंडौरी और बैतूल जैसे जिलों में हो रहा है, जहां भिंडी, मक्का, कपास जैसी खरीफ फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। अनुमान है कि राज्य में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है, और दशहरे (2 अक्टूबर) पर भी बारिश का खतरा मंडरा रहा है।

यह बारिश न केवल किसानों की कमर तोड़ रही है, बल्कि बाजारों में भी हड़कंप मचा दिया है। खरगोन में कपास की नीलामी एक सप्ताह के लिए बंद हो गई है, जबकि बड़वानी के ग्रामीण इलाकों में खेतों में जलभराव से फसलें सड़ रही हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सितंबर में सामान्य से 17% अधिक बारिश हो चुकी है, जो खरीफ फसलों के लिए घातक साबित हो रही है। आइए, जानते हैं इस बारिश के कारण फसल नुकसान की पूरी तस्वीर, प्रभावित जिलों से लेकर किसानों की आपबीध तक।
मानसून की फिर वापसी: ट्रफ और लो प्रेशर से 15 जिलों में हाहाकार
मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई तो हो चुकी थी, लेकिन 15 सितंबर से एक नया मौसम सिस्टम सक्रिय हो गया। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून ट्रफ के पूर्व की ओर खिसकने और बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर एरिया के कारण राज्य के मध्य, पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में बारिश का दौर लौट आया। रविवार को 15 जिलों - धार, बड़वानी, नरसिंहपुर, बैतूल, नर्मदापुरम, इंदौर, पचमढ़ी, रतलाम, उज्जैन, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, मंडला, सागर और सिवनी - में बारिश दर्ज की गई। धार और बड़वानी में सबसे ज्यादा 2-3 इंच पानी गिरा, जबकि नरसिंहपुर में आधा इंच से अधिक।
सोमवार को डिंडौरी के ग्रामीण इलाकों में दोपहर 12 बजे के आसपास जोरदार बारिश हुई, जिससे नदियां-नालियां उफान पर आ गईं। मौसम वैज्ञानिक डॉ. आर.एस. द्विवेदी ने बताया, "ट्रफ लाइन सक्रिय है, जिससे अगले 24 घंटों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी। 1 अक्टूबर से नया सिस्टम आएगा, जो दशहरे तक असर डालेगा।" यह बारिश खरीफ सीजन के अंत में आ रही है, जब फसलें कटाई के लिए तैयार होती हैं। लेकिन लगातार पानी से खेतों में जलजमाव हो गया, और फसलें सड़ने लगीं। सितंबर में राज्य में औसत से 109% बारिश हो चुकी है, जो 1971-2020 के आंकड़ों से अधिक है।
फसल नुकसान का ब्योरा: भिंडी-मक्का से लेकर कपास तक, करोड़ों का खजाना डूबा
बारिश का सबसे ज्यादा असर पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों पर पड़ा है, जहां कपास, सोयाबीन, मक्का और सब्जी फसलें मुख्य हैं। बड़वानी जिला मुख्यालय से मात्र 11 किलोमीटर दूर तलवाड़ा बुजुर्ग गांव में रविवार की तेज बारिश से खेतों में पानी घुस गया। स्थानीय किसान राकेश मुकाती ने दर्द बयां करते हुए कहा, "मेरे तीन हेक्टेयर खेत में लगी भिंडी और मक्के की फसल पूरी तरह खराब हो गई। लगभग 80 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। कटाई का समय था, लेकिन पानी ने सब बर्बाद कर दिया।" गांव के अन्य किसानों ने भी इसी तरह की शिकायत की, जहां 50 से अधिक हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ।
खरगोन जिले में नमी और बारिश ने कपास की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित किया है। मंडी में नीलामी एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दी गई है, क्योंकि गीली कपास को खरीदार नहीं ले रहे। किसान अपने घरों में तो जिनिंग संचालक फैक्टरियों के परिसर में कपास सुखाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। केके फायबर्स के संचालक प्रितेश अग्रवाल ने बताया, "फैक्ट्री में सुखाने के लिए रखे 700 क्विंटल कपास पर पानी गिर गया, जो बहकर नष्ट हो गया। किसान खेतों से चुनाई नहीं कर पा रहे, गीला कपास पौधों से टूटकर गिर रहा है।" जिले में कपास का उत्पादन 2 लाख हेक्टेयर में होता है, और अनुमान है कि 20-30% फसल नुकसान हो चुका है।
धार जिले में भी मक्का और सोयाबीन की फसलें जलमग्न हो गईं। एक सर्वे के अनुसार, राज्य के 17-18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलें प्रभावित हुई हैं, हालांकि बाढ़ का प्रकोप कम रहा। बैतूल और छिंदवाड़ा जैसे पूर्वी जिलों में सोयाबीन की पिछैती बुआई को फायदा तो हुआ, लेकिन परिपक्व फसलें जलभराव से सड़ रही हैं। नर्मदापुरम और सिवनी में चना और दाल फसलों को नुकसान पहुंचा। कुल मिलाकर, नुकसान का आंकड़ा 500 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है, जो किसानों के लिए वज्रपात जैसा है।
प्रभावित किसानों की व्यथा: "सरकार मुआवजा दे, बीमा क्लेम आसान करे"
बारिश ने न केवल फसलें बर्बाद कीं, बल्कि किसानों की जिंदगी पर भी असर डाला। बड़वानी के तलवाड़ा गांव में राकेश मुकाती जैसे सैकड़ों किसान सड़कों पर उतर आए। उन्होंने कहा, "हमने कर्ज लेकर बीज डाले, लेकिन प्रकृति ने साथ नहीं दिया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का लाभ तो मिलेगा, लेकिन क्लेम प्रक्रिया जटिल है।" खरगोन के किसान संगठन ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा, जिसमें तत्काल मुआवजा और नीलामी फिर शुरू करने की मांग की।
प्रभावित जिलों में राहत कार्य शुरू हो गए हैं। कृषि विभाग ने सर्वे टीम भेजी है, जो नुकसान का आकलन कर रही है। बैतूल के कलेक्टर ने बताया, "हम PMFBY के तहत क्लेम प्रक्रिया तेज करेंगे। किसानों को बीज वितरण भी शुरू कर दिया है।" लेकिन किसान चिंतित हैं कि दशहरे पर बारिश से नुकसान और बढ़ेगा। एक किसान ने कहा, "त्योहार का मजा किरकिरा हो गया। फसल बची नहीं, तो क्या करेंगे?"
दशहरे पर पानी का अलर्ट: 1 अक्टूबर से नया सिस्टम, 2 को भारी बारिश संभव
मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि 1 अक्टूबर से बंगाल की खाड़ी में नया लो प्रेशर एरिया बनेगा, जो दशहरे (2 अक्टूबर) तक असर डालेगा। इससे मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भारी बारिश हो सकती है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ेगा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यदि यह सिस्टम सक्रिय रहा, तो प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान दोगुना हो सकता है। IMD ने कहा, "25 सितंबर से 1 अक्टूबर तक मध्य भारत में घनघोर वर्षा संभव, जो पिछैती फसलों को फायदा तो देगी, लेकिन परिपक्व फसलों को क्षति पहुंचाएगी।"
राजनीतिक-सामाजिक रंग: विपक्ष का हमला, सरकार का बचाव
यह बारिश राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। विपक्ष ने सरकार पर "किसान हित में लापरवाही" का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता कमलनाथ ने ट्वीट किया, "मोहन यादव सरकार सो रही है, जबकि किसानों की फसलें डूब रही हैं। तत्काल राहत पैकेज दें।" वहीं, भाजपा ने कहा कि "सरकार अलर्ट पर है, PMFBY से किसानों को लाभ मिलेगा।" किसान संगठनों ने प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।
मध्य प्रदेश में खरीफ फसलें अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। सोयाबीन, कपास और मक्का का उत्पादन राज्य के GDP में बड़ा योगदान देता है। इस नुकसान से बाजार भाव प्रभावित होंगे, और महंगाई बढ़ सकती है। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि सरकार बायोमैट्रिक सत्यापन और डिजिटल सर्वे से क्लेम प्रक्रिया सुधारें।
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