37 साल पहले अग्नि स्नान करने वाले पुरुषोत्तम आनंद महाराज अब लेंगे भू-समाधि ! प्रशासन ने नहीं दी अनुमति

भोपाल के साउथ टीटी नगर में 30 सितंबर को पुरुषोत्तम आनंद महाराज की भूमिगत समाधि लेने की घोषणा ने प्रशासन के होश उड़ा दिए। जिसके बाद मौके पर पुलिस प्रशासन उनको समझाने पहुंचा।

भोपाल,29 सितंबर। राजधानी भोपाल में एक महाराज ने प्रशासन से भूमिगत समाधि लेने की अनुमति मांगी है। बता दे कि भोपाल में 30 सितंबर को पुरुषोत्तम आनंद महाराज की भूमिगत समाधि लेने की घोषणा ने प्रशासन के होश उड़ा दिए। मामला साउथ टीटी नगर में स्ठित माता मंदिर का है। जिसके बाद मौके पर पुलिस प्रशासन उनको समझाने पहुंचा। स्वामी पुरुषोत्तमानंद ने नवरात्रि में जीवित भूमिगत समाधि लेने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा था कि वे 72 घंटे तक समाधि में लीन रहेंगे। 29 सितंबर को वे समाधि लेंगे और 3 अक्टूबर को समाधि से बाहर आएंगे। बता दे ये महाराज इससे पहले भी जल समाधि, अग्नि स्नान कर चुके हैं। पुलिस प्रशासन ने महाराज से समाधि न लेने का निवेदन किया है।

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    7 फीट गहरा और 5 फीट चौड़ा गड्ढा तैयार

    7 फीट गहरा और 5 फीट चौड़ा गड्ढा तैयार

    महाराज ने 30 सितंबर को भूमिगत समाधि लेने के लिए अपने निवास पर ही 7 फीट गहरा और 5 फीट चौड़ा गड्ढा तैयार कर लिया था। जिसमें बैठकर वे समाधि लेने वाले थे। महाराज का कहना था कि मैं आसन लगाकर समाधि में बैठूंगा जिस तरह से उसे बंद किया जाएगा, संभव है कि ऑक्सीजन भी कम होगी, लेकिन श्वास पर नियंत्रण ही तो साधना है। लेकिन अब प्रशासन ने उन्हें भूमि का समाधि लेने से मना कर दिया है।

    समाधि के समय साधक और भगवान एक दूसरे के होते है निकट

    समाधि के समय साधक और भगवान एक दूसरे के होते है निकट

    महाराज का कहना है कि विश्व कल्याण और भगवान के निकट आने के लिए उन्हें भूमिगत का समाधि लेनी होगी। उनका कहना है कि समाधि अवधि के दौरान साधक और भगवान एक दूसरे के निकट होते हैं। समाधि वे अवस्था है जब मनुष्य शरीर अपने आराध्य के साथ पूरी तरह से जुड़ जाता है। साधक और भगवान में इसके बाद बिल्कुल भी दूरी नहीं रह जाती है। जनकल्याण के लिए महात्माओं का इस प्रकार की समाधि लेनी पड़ती है। इससे पहले भी वह जल समाधि ले चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान वे 12 घंटे तक जल में रहे थे।

    अग्नि स्नान कर चुके हैं महाराज

    अग्नि स्नान कर चुके हैं महाराज

    बता दे भूमिगत समाधि लेने का संकल्प लेने वाले महाराज पुरुषोत्तम आनंद 1985 में अग्नि स्नान भी कर चुके हैं। उन्होंने भोपाल के सोमवारा चौक पर अग्नि स्नान किया था यानी शरीर पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली थी और वे इसे भी अपनी सिद्धि का ही एक हिस्सा मानते है। उन्होंने बताया कि तब वे 80% तक जल गए थे, लेकिन उनके शरीर पर आज भी एक निशान जलने का नहीं है। वे इसे माता की कृपा बताते हैं।

    भूमिगत समाधि की अनुमति देने से प्रशासन ने किया मना

    भूमिगत समाधि की अनुमति देने से प्रशासन ने किया मना

    वही भोपाल जिला प्रशासन ने उन्हें भूमिगत समाधि लेने से मना कर दिया है। प्रशासन ने उन्हें अनुमति नहीं दी है। टीटी नगर थाने की पुलिस ने समझाने पहुंचे। पुलिस अधिकारी चंद शेखर पांडे ने बताया कि प्रशासन ने पुस्तम आनंद महाराज को भागवत कथा और अन्य कार्यक्रमों के लिए परमिशन दे दी है लेकिन भूमिगत समाधि लेने से प्रशासन ने मना कर दिया है। इसकी अनुमति उन्हें नहीं दी गई हैं।

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