21 साल का मोह या 'अशुभ' बंगले का खौफ? आखिर क्यों 10 नंबर वाला आवास खाली नहीं करना चाहतीं राबड़ी देवी?
Rabri Devi Residence Controversy: बिहार की राजनीति में इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का सरकारी आवास चर्चा का केंद्र बना हुआ है। राज्य सरकार ने उन्हें 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस दिया है, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। यह वही आवास है जहां राबड़ी देवी पिछले करीब 21 वर्षों से रह रही हैं।
सरकार ने अब यह बंगला मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित कर दिया है, जबकि राबड़ी देवी को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर 39 हार्डिंग रोड स्थित नया आवास दिया गया है। हालांकि राबड़ी देवी ने साफ कहा है कि वह आसानी से यह बंगला खाली नहीं करेंगी। इस पूरे विवाद के बीच पुलिस की एंट्री, प्रशासन की अपील और नए बंगले को लेकर फैली चर्चाओं ने मामले को और गर्मा दिया है।

बंगला खाली करने पर अड़ीं राबड़ी देवी
सरकारी नोटिस मिलने के बाद राबड़ी देवी ने कहा कि अगर सरकार चाहती है तो पुलिस भेजकर बंगला खाली करा सकती है, लेकिन वह खुद से इसे छोड़ने वाली नहीं हैं। उनके इस बयान के कुछ ही घंटों बाद पटना सचिवालय थाना की पुलिस राबड़ी आवास पहुंची। इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से उनसे अनुरोध किया गया कि वह 15 दिनों के भीतर 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास खाली कर दें।
RJD ने कोर्ट जाने के दिए संकेत
इस पूरे मामले पर आरजेडी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कहा कि जरूरत पड़ने पर पार्टी इस मामले को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक ले जा सकती है। उनके अनुसार यह केवल एक आवास का मामला नहीं बल्कि राजनीतिक सम्मान से जुड़ा मुद्दा भी है।
शिव चंद्र राम ने सरकार पर लगाए आरोप
पूर्व मंत्री शिव चंद्र राम ने सरकार को घेरते हुए कहा कि महिला सशक्तीकरण की बात करने वाली सरकार को राबड़ी देवी के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इसी आवास से कई दलित नेताओं को राजनीति में आगे बढ़ने का मौका मिला था।
उन्होंने कहा कि वह स्वयं भी इसी आवास से राजनीतिक पहचान बनाकर आगे आए हैं। साथ ही आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में एक दलित नेता को आगे कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रही है।
39 हार्डिंग रोड को लेकर क्यों हो रही चर्चा?
राबड़ी देवी को जो नया आवास आवंटित किया गया है, वह 39 हार्डिंग रोड पर स्थित है। राजनीतिक गलियारों में इस बंगले को लेकर वर्षों से एक अलग तरह की चर्चा होती रही है। कई लोग इसे राजनीतिक रूप से "अनलकी" बंगला मानते हैं।
चर्चा यह है कि जो भी मंत्री इस आवास में रहे, उनका राजनीतिक प्रभाव धीरे-धीरे कम होता गया और बाद में वे दोबारा मंत्री नहीं बन सके। हालांकि इस दावे का कोई आधिकारिक आधार नहीं है, लेकिन बिहार की राजनीति में यह धारणा लंबे समय से चर्चा का विषय रही है।
इस आवास में रह चुके हैं कई पूर्व मंत्री
39 हार्डिंग रोड स्थित आवास में पहले कई बड़े नेता रह चुके हैं। इनमें RJD के पूर्व मंत्री भूपेंद्र प्रसाद वर्मा और शमीम अहमद, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मदन मोहन झा, बीजेपी के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री चंद्र मोहन राय, पूर्व मंत्री विनोद नारायण झा और रामसूरत राय शामिल हैं।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा अक्सर होती रही है कि इस आवास में रहने के बाद इन नेताओं का राजनीतिक प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा। इसी वजह से नए आवास को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
नोटिस पर बीजेपी का पलटवार
उधर बीजेपी ने राबड़ी देवी और आरजेडी के आरोपों का जवाब दिया है। बिहार बीजेपी के प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि सरकारी नियम सभी के लिए समान हैं और आवास आवंटन की प्रक्रिया भी नियमों के अनुसार होती है। उन्होंने कहा कि सत्ता किसी व्यक्ति या परिवार की निजी संपत्ति नहीं होती। लोकतंत्र में सरकारी आवास और सरकारी सुविधाएं नियमों के तहत दी जाती हैं और समय आने पर उन्हें वापस भी लिया जाता है।
आवास विवाद से गरमाई बिहार की राजनीति
10 सर्कुलर रोड और 39 हार्डिंग रोड को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। एक तरफ आरजेडी इसे सम्मान और राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बता रही है, वहीं बीजेपी इसे प्रशासनिक और नियमों से जुड़ा फैसला बता रही है। पुलिस की मौजूदगी, प्रशासन की अपील और नए बंगले को लेकर चल रही चर्चाओं ने इस मुद्दे को बिहार की राजनीति के बड़े विवादों में शामिल कर दिया है।
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