MP News: भोपाल में प्रॉपर्टी रेट में 18% की बढ़ोतरी का प्रस्ताव, 1 अप्रैल से नई कलेक्टर गाइडलाइन, विरोध शुरू
Bhopal MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रॉपर्टी खरीदना अब और महंगा होने वाला है! 1 अप्रैल 2025 से लागू होने वाली नई कलेक्टर गाइडलाइन में 1283 लोकेशनों पर प्रॉपर्टी रेट्स में औसतन 18% की बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। कहीं-कहीं तो यह बढ़ोतरी 5% से लेकर 300% तक है। इस प्रस्ताव को अब केंद्रीय मूल्यांकन कमेटी को भेजा जा रहा है, लेकिन इससे पहले ही इसका जमकर विरोध शुरू हो गया है।
रियल एस्टेट डेवलपर्स की संस्था क्रेडाई (CREDAI) ने इसे रोकने के लिए मंत्रियों, सांसदों और विधायकों से मुलाकात की है, और अब मुख्य सचिव अनुराग जैन से भी मिलने की तैयारी में है। इतना ही नहीं, कुछ एक्सपर्ट्स इस बढ़ोतरी को रोकने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कह रहे हैं। यह प्रस्ताव भोपाल के प्रॉपर्टी मार्केट में भूचाल ला सकता है, और आम लोगों की जेब पर भारी बोझ डाल सकता है।

1283 लोकेशनों पर 18% की औसत बढ़ोतरी, ग्रामीण इलाकों में 300% तक उछाल
13 मार्च 2025 को भोपाल में उप मूल्यांकन समिति की बैठक में यह प्रस्ताव तैयार किया गया। इसमें भोपाल जिले की 2887 लोकेशनों में से 1283 पर प्रॉपर्टी रेट्स में 5% से लेकर 300% तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। खासकर कोलार और होशंगाबाद रोड जैसे इलाकों में दरें बढ़ाने को लेकर सबसे ज्यादा आपत्तियाँ आई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो यह बढ़ोतरी 200% से 300% तक प्रस्तावित है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया है।
हालांकि, 1601 लोकेशनों पर दरें जस की तस रहेंगी, और 7 नई लोकेशनों को इस गाइडलाइन में जोड़ा गया है। पिछले साल 1443 लोकेशनों पर 7.19% की औसत बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन इस बार 18% की औसत बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। तुलना करें तो 2011-12 में जमीनों के दाम में 31.50% की बढ़ोतरी हुई थी, जो अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी। इस बार ग्रामीण इलाकों में 300% तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव चर्चा का केंद्र बन गया है।
200 से ज्यादा आपत्तियां : कोलार-होशंगाबाद रोड पर सबसे ज्यादा विरोध
नई कलेक्टर गाइडलाइन लागू करने से पहले दावा-आपत्ति माँगी गई थीं, जिसमें करीब 200 से ज्यादा आपत्तियाँ दर्ज की गईं। सबसे ज्यादा आपत्तियां कोलार और होशंगाबाद रोड जैसे तेजी से विकसित हो रहे इलाकों से आई हैं। यहाँ प्रॉपर्टी की डिमांड पहले से ही ज्यादा है, और अब रेट्स में बढ़ोतरी से खरीदारों पर बोझ बढ़ने की आशंका है। ग्रामीण क्षेत्रों में 200% से 300% तक की बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी बढ़ोतरी से ग्रामीण इलाकों में जमीन खरीदना मुश्किल हो जाएगा।
क्रेडाई का तीखा विरोध: "गाइडलाइन तुरंत रोकी जाए!"
रियल एस्टेट डेवलपर्स की संस्था क्रेडाई इस बढ़ोतरी के खिलाफ खुलकर सामने आ गई है। क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज सिंह मीक ने इस प्रस्ताव को अनुचित बताते हुए कहा, "इसे लेकर हम मंत्रियों, सांसदों और विधायकों से मिल चुके हैं। उन्होंने भी गाइडलाइन को बढ़ाना अनुचित बताया है। इसलिए भोपाल की कलेक्टर गाइडलाइन तुरंत रोकी जानी चाहिए।" मीक ने यह भी कहा कि भोपाल में लगातार कलेक्टर गाइडलाइन बढ़ रही है, जिससे प्रॉपर्टी मार्केट अस्थिर हो गया है।

क्रेडाई ने इस बढ़ोतरी को रोकने के लिए कई मांगें रखी हैं:
- कलेक्टर गाइडलाइन दरों में वृद्धि पर तुरंत रोक लगाई जाए।
- दरों को प्री-कोविड स्तर (2019-20) पर वापस लाया जाए।
- कृषि भूमि सहित सभी जरूरी उपबंध खत्म किए जाएँ।
- अगले तीन साल तक किसी भी बढ़ोतरी पर प्रतिबंध लगाया जाए।
- एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाकर गाइडलाइन दर तय करने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
- क्रेडाई ने इस मुद्दे को मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के सामने उठाने के बाद अब मुख्य सचिव अनुराग जैन से मुलाकात की योजना बनाई है। मीक ने कहा, "हम इस बढ़ोतरी को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देंगे। जरूरत पड़ी तो कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे।"
केंद्रीय मूल्यांकन कमेटी को भेजा गया प्रस्ताव
13 मार्च को हुई उप मूल्यांकन समिति की बैठक के बाद यह प्रस्ताव अब केंद्रीय मूल्यांकन कमेटी को भेजा जा रहा है। इस कमेटी की मंजूरी के बाद ही यह गाइडलाइन लागू होगी। लेकिन 200 से ज्यादा आपत्तियों को देखते हुए संभावना है कि इस बढ़ोतरी को आंशिक रूप से वापस लिया जा सकता है। भोपाल जिले में लोकेशनों की संख्या भी 3883 से घटाकर 2885 कर दी गई है, जिससे कुछ इलाकों को राहत मिल सकती है। लेकिन कोलार और होशंगाबाद रोड जैसे हॉटस्पॉट्स पर बढ़ोतरी का असर साफ दिखेगा।
भोपाल में प्रॉपर्टी मार्केट पर क्या होगा असर?
यह बढ़ोतरी अगर लागू होती है, तो भोपाल के प्रॉपर्टी मार्केट पर इसका बड़ा असर पड़ेगा। कोलार में पहले से ही प्लॉट्स की मार्केट रेट 33,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर है, जबकि निर्मित क्षेत्रों की कीमत 55,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर और कमर्शियल प्लॉट्स की कीमत 1.10 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर है। अब 18% की औसत बढ़ोतरी से ये दरें और ऊपर जाएँगी, जिससे मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना और मुश्किल हो जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में 300% तक की बढ़ोतरी से जमीन खरीदने का सपना देख रहे लोगों को बड़ा झटका लगेगा।
विभिन्न लोकेशन की मौजूदा और प्रस्तावित दर
1. लालघाटी से एसबीआई चौराहा
- मौजूदा दर: ₹1600
- प्रस्तावित दर: ₹6800
2. सुलतानिया रोड
- मौजूदा दर: ₹4200
- प्रस्तावित दर: ₹6500
3. मैकेनिक मार्केट
- मौजूदा दर: ₹2900
- प्रस्तावित दर: ₹4000
4. नयापुरा सर्व धर्म
- मौजूदा दर: ₹1600
- प्रस्तावित दर: ₹2300
5. बैरागढ़ चिचली
- मौजूदा दर: ₹1000
- प्रस्तावित दर: ₹1180
6. जहांगीराबाद
- मौजूदा दर: ₹1500
- प्रस्तावित दर: ₹2000
7. चिकलोद रोड
- मौजूदा दर: ₹3800
- प्रस्तावित दर: ₹4600
8. गांधीनगर
- मौजूदा दर: ₹1550
- प्रस्तावित दर: ₹1800
9. जुमेराती
- मौजूदा दर: ₹3200
- प्रस्तावित दर: ₹3800
10. एमएलबी कॉलेज
- मौजूदा दर: ₹1600
- प्रस्तावित दर: ₹3600
11. होशंगाबाद रोड
- मौजूदा दर: ₹1600
- प्रस्तावित दर: ₹2300
12. दानिश हिल्स
- मौजूदा दर: ₹1600
- प्रस्तावित दर: ₹2000
13. हेमू कॉलोनी वार्ड
- मौजूदा दर: ₹4300
- प्रस्तावित दर: ₹6800
सोशल मीडिया पर बहस: "आम आदमी की जेब पर डाका!"
इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। एक यूजर ने लिखा, "18% की बढ़ोतरी? यह तो आम आदमी की जेब पर डाका है! पहले ही भोपाल में प्रॉपर्टी के दाम आसमान छू रहे हैं।" एक अन्य यूजर ने लिखा, "ग्रामीण इलाकों में 300% की बढ़ोतरी? यह तो किसानों को जमीन बेचने से रोकने की साजिश है।" वहीं, कुछ लोगों ने क्रेडाई के विरोध का समर्थन करते हुए कहा, "क्रेडाई सही कह रही है। इस बढ़ोतरी को तुरंत रोका जाना चाहिए।"
कोर्ट जाने की तैयारी: क्या होगा अगला कदम?
कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह बढ़ोतरी लागू होती है, तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएँगे। एक प्रॉपर्टी एक्सपर्ट ने कहा, "यह बढ़ोतरी तर्कसंगत नहीं है। कोलार और होशंगाबाद रोड जैसे इलाकों में पहले से ही मार्केट रेट्स गाइडलाइन से ज्यादा हैं। फिर इतनी बढ़ोतरी क्यों? हम कोर्ट में इसकी वैधता को चुनौती देंगे।" क्रेडाई भी कोर्ट जाने की बात कह रही है, जिससे यह मामला और गरमा सकता है।
एक सवाल: क्या यह बढ़ोतरी जायज है?
यह प्रस्ताव कई सवाल खड़े करता है। पहला सवाल यह कि क्या इतनी बड़ी बढ़ोतरी जायज है? भोपाल में पहले से ही प्रॉपर्टी के दाम मार्केट रेट्स से कम हैं, लेकिन रजिस्ट्री के दौरान लोग ज्यादा कीमत चुकाते हैं। ऐसे में गाइडलाइन रेट्स बढ़ाने से क्या फायदा होगा? दूसरा सवाल यह कि ग्रामीण इलाकों में 300% की बढ़ोतरी का क्या आधार है? क्या यह किसानों और ग्रामीणों को जमीन बेचने से रोकने की कोशिश है? और तीसरा सवाल यह कि क्या सरकार इस बढ़ोतरी से होने वाले विरोध को झेल पाएगी?
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