Bhopal News: सड़कों पर गड्ढे जिंदाबाद, 216 करोड़ का PWD प्लान फेल, पहली बारिश में खुली व्हाइट टॉपिंग की पोल
MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश की सड़कों की हालत इस मानसून में बद से बदतर हो गई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने 216 करोड़ रुपये के मेगा प्लान के तहत व्हाइट टॉपिंग, नाली निर्माण, और सड़क सरफेसिंग का दावा किया था, लेकिन पहली ही बारिश ने इस प्लान की पोल खोल दी।
भोपाल की कोई भी सड़क ऐसी नहीं बची, जहां गड्ढे और जलभराव ने जनता का जीना मुहाल न किया हो। स्थिति इतनी खराब है कि BJP के प्रदेश कार्यालय के सामने की सड़क पर भी बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जहां मंत्रियों, विधायकों, और अफसरों का दिनभर आना-जाना रहता है।

PWD मंत्री राकेश सिंह के बयान, "जब तक सड़कें रहेंगी, गड्ढे होते रहेंगे", ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है। यह विशेष रिपोर्ट, लक्ष्मी नारायण मालवीय द्वारा, वन इंडिया हिंदी के लिए, इस सड़क संकट की पूरी कहानी और इसके पीछे की सच्चाई को सामने लाती है।
216 करोड़ का प्लान: अप्रैल में दावे, जुलाई में हकीकत
लोक निर्माण विभाग (PWD) ने अप्रैल 2025 में भोपाल की सड़कों को बारिश से बचाने के लिए 216 करोड़ रुपये का प्लान तैयार किया था। इस योजना के तहत 27 प्रमुख सड़कों पर व्हाइट टॉपिंग (कंक्रीट की परत), नाली निर्माण, और सड़क सरफेसिंग का काम होना था। दावा था कि यह तकनीक सड़कों को टिकाऊ बनाएगी और बारिश में गड्ढे नहीं बनेंगे। लेकिन मई और जून 2025 की बारिश ने इस प्लान की धज्जियां उड़ा दीं। हमीदिया रोड, रायसेन रोड, भारत टॉकीज, अशोका गार्डन, और रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के सामने की सड़कों पर गड्ढों और जलभराव ने जनता को परेशान कर दिया।
कहां-कहां खर्च हुए 216 करोड़?
- PWD की योजना के तहत भोपाल की निम्नलिखित सड़कों पर काम किया गया, लेकिन सभी की हालत खराब है:
- हबीबगंज नाका से रायसेन रोड: 4.40 करोड़ रुपये
- सूरज नगर से विशन खेड़ी मार्ग: 3.80 करोड़ रुपये
- भोपाल-चिकलोद मार्ग: 5.70 करोड़ रुपये
- कालीपरेड मार्ग: 1.20 करोड़ रुपये
- भारत टॉकीज चौराहे से रेलवे क्रॉसिंग: 2.50 करोड़ रुपये
- लिली टॉकीज चौराहे से भदभदा सेतु: 7.60 करोड़ रुपये
- लिंक रोड नंबर 1: 3.15 करोड़ रुपये
- लिंक रोड नंबर 3: 1.74 करोड़ रुपये
इनके अलावा, क्रोध मंडी पेट्रोल पंप, अशोका गार्डन थाने से सेमरा रोड, सिंधी कॉलोनी चौराहा, डीआईजी बंगला चौराहा से यूनियन कार्बाइड रोड, बैरसिया रोड, करोंद से लामाखेड़ा रोड, कोकता बायपास रोड, सैफिया कॉलेज रोड, हलालपुरा बस स्टैंड रोड, ललिता नगर, अयोध्या नगर, और मिनल रेशिडेंसी की सड़कों पर भी गड्ढों और जलभराव की स्थिति बनी हुई है।

BJP ऑफिस के सामने गड्ढों का 'स्वागत'
भोपाल में रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के सामने BJP के निर्माणाधीन प्रदेश कार्यालय की सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। यह इलाका शहर का एक प्रमुख हिस्सा है, जहां मंत्रियों, विधायकों, और BJP पदाधिकारियों का दिनभर आना-जाना रहता है। इसके बावजूद सड़क की हालत बदतर है, जो सरकार और PWD की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। ट्रिलंगा, अरेरा कॉलोनी, और हमidia रोड जैसे पॉश इलाकों में भी गड्ढे और जलभराव आम हैं।
स्थानीय निवासी सर्वेश पाठक ने कहा, "मेरी बेटी NLIU में पढ़ती है। वहां की पहाड़ी सड़कें ठीक हैं, लेकिन जैसे ही आप मुख्य भोपाल शहर में आते हैं, जलभराव, टूटी सड़कें, और गड्ढे हर जगह हैं।"
रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के पास एक रेस्तरां मालिक जसवीर सिंह ने बताया, "गड्ढों और ट्रैफिक जाम की वजह से हमारा व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।"
PWD मंत्री का बयान और विपक्ष का पलटवार
9 जुलाई 2025 को PWD मंत्री राकेश सिंह ने भोपाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "जब तक सड़कें रहेंगी, गड्ढे होते रहेंगे। दुनिया में कोई ऐसी तकनीक नहीं है, जो गड्ढे-मुक्त सड़कें बना सके।" उन्होंने यह भी कहा कि सड़कों की गुणवत्ता ऐसी होनी चाहिए कि गड्ढे कम हों, और अगर असामान्य रूप से बड़े गड्ढे बनते हैं, तो कार्रवाई की जाएगी।
इस बयान पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला। कांग्रेस प्रवक्ता आनंद जाट ने कहा, "मंत्री जी का बयान गैर-जिम्मेदाराना है। अगर गड्ढे बनना तय है, तो PWD का काम क्या है? 216 करोड़ रुपये कहां गए? वे सड़कों की मरम्मत करें या इस्तीफा दें।"
कांग्रेस नेता कमलनाथ ने भी ट्वीट किया, "मध्य प्रदेश में सड़कों का हाल ऐसा है कि गड्ढे में सड़क है या सड़क में गड्ढे, समझना मुश्किल है। BJP सरकार की नाकामी जनता की जिंदगी को खतरे में डाल रही है।"
व्हाइट टॉपिंग की हकीकत
व्हाइट टॉपिंग, जिसे PWD ने बारिश-प्रतिरोधी तकनीक के रूप में प्रचारित किया था, पहली बारिश में ही फेल साबित हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि व्हाइट टॉपिंग की गुणवत्ता और ठेकेदारों की लापरवाही इसकी असफलता का मुख्य कारण है। ग्वालियर में चेतकपुरी रोड, जिस पर 4.09 करोड़ रुपये खर्च किए गए, 12 दिनों में 10 बार धंस चुकी है, जिसके लिए दो इंजीनियरों को निलंबित किया गया।
प्रो संजय शर्मा, सिविल इंजीनियरिंग विशेषज्ञ, ने कहा, "व्हाइट टॉपिंग में उचित मटेरियल और मोटाई का ध्यान नहीं रखा गया। नाली निर्माण और ड्रेनेज सिस्टम की कमी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।"
जनता का आक्रोश और विरोध
भोपाल और मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों में जनता ने सड़कों की खराब हालत के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया है। छतरपुर के खर्रहोही, उदयपुरा, और धनुपुरा गांवों में ग्रामीणों ने गड्ढों में धान की रोपाई करके अनोखा विरोध जताया।भोपाल के अरेरा कॉलोनी के निवासी अंजलि सक्सेना ने कहा, "हम पॉश कॉलोनी में रहते हैं, लेकिन सड़कें चांद की सतह जैसी हैं। सरकार टैक्स लेती है, लेकिन सुविधाएं कहां हैं?"
BJP सरकार पर सवाल
BJP के प्रदेश कार्यालय के सामने गड्ढों ने सरकार की नाकामी को और उजागर किया है। कांग्रेस ने इसे प्रशासनिक भ्रष्टाचार और ठेकेदारों की मिलीभगत का परिणाम बताया। मुकेश नायक, कांग्रेस प्रवक्ता, ने कहा, "216 करोड़ रुपये का प्लान फेल हो गया, लेकिन कोई जवाबदेही नहीं। शहडोल में ड्राई फ्रूट घोटाला, ग्वालियर में सड़क धंसना, और भोपाल में गड्ढे-यह BJP सरकार की हकीकत है।"
PWD की सफाई और जांच के आदेश
PWD मंत्री राकेश सिंह ने सफाई दी कि "बारिश और भारी ट्रैफिक के कारण सड़कें खराब होती हैं। हम गुणवत्ता पर ध्यान दे रहे हैं।" उन्होंने इंदौर में रेलवे ओवर ब्रिज (RoB) और सड़कों की खराब डिजाइन की शिकायतों के बाद पूरे प्रदेश में निरीक्षण का आदेश दिया है।
भोपाल में शुभाश नगर के एक RoB की सांप जैसी संरचना और गलत डिवाइडर के कारण हाल ही में 8 घंटे में दो हादसे हुए, जिसके बाद PWD ने जांच शुरू की।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
- गड्ढों और जलभराव ने भोपाल की जनता को कई तरह से प्रभावित किया है:
- हादसों में बढ़ोतरी: संगुेम-कुर्चोरेम रोड (गोवा) जैसे मामलों की तरह भोपाल में भी गड्ढों से हादसे बढ़े हैं।
- आर्थिक नुकसान: रेस्तरां और दुकान मालिकों का व्यवसाय ट्रैफिक जाम और जलभराव से प्रभावित हुआ।
- स्वास्थ्य जोखिम: जलभराव से डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा है।
- डॉ अनिल गुप्ता, समाजशास्त्री, ने कहा, "गड्ढे केवल सड़क की समस्या नहीं, बल्कि सरकार के प्रति जनता के भरोसे की कमी का प्रतीक हैं। BJP को इस पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।"












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