Positive news: रेप सर्वाइवर के जख्म भरने आगे आ रहे युवा, बना रहे जीवनसाथी
मध्य प्रदेश में रेप सर्वाइवर के बीच नया ट्रेंड शुरू हुआ हैं। वयस्कता अवधि पूरी करने के बाद ऐसी पीड़िताओं को अपनाने कई युवा आगे आ रहे हैं। भोपाल शेल्टर होम में रहने वाली ऐसी दो लड़कियों की शादी हो चुकी हैं।

Positive news: 'रेप' ऐसा लफ्ज जिसे सुनकर हर कोई पीड़िता की जिंदगी के बारे में सोचने मजबूर हो जाता हैं। भविष्य की उसकी लाइफ की कई काल्पनिक तस्वीरें हमारी आंखों के सामने झिलमिलाने लगती हैं। सर्वाइवर की आगे की जिंदगी क्या गुमनामी के अंधेरे में ही रहेगी? यह सवाल भी बड़ी बहस का मुद्दा रहा हैं। लेकिन ऐसे माहौल में घिरी पीड़िताओं के बीच गुड न्यूज़ भी आई है। उनके जख्म भरने युवा आगे आ रहे है और अपना जीवनसाथी भी बना रहे हैं। इस तरह के नए ट्रेंड की शुरुआत मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हुई हैं।

खुशहाल 'ख़ुशी'...
बदला हुआ नाम 'ख़ुशी'... जिसकी जिंदगी की तमाम खुशियां हंसते-खेलते बचपन में बिखर गई थी। वह गुजरते वक्त के साथ वापस लौट आई हैं। ये खबर सिर्फ मध्य प्रदेश के भोपाल में शेल्टर होम रही रेप सर्वाइवर एक 'ख़ुशी' की ही नहीं है, बल्कि इसके जैसी रह रही और भी पीड़िताओं से जुड़ी हैं। 'ख़ुशी' आज किसी की जिंदगी बन गई है। उसका बेटा भी 10 साल का हो गया है। उसको पिता कहने का क़ानूनी हक़ भी मिल गया है। समाज के दूसरे लोगों की तरह इस परिवार की जिंदगी भी आगे बढ़ रही हैं।

13 साल की उम्र में उजड़ी थी जिंदगी
जानकारी के मुताबिक 'ख़ुशी' नाम की रेप सर्वाइवर जब 13 साल की थी तो वह एक दरिंदे का शिकार हो गई थी। दुष्कर्म की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया था। बाद में वह प्रिग्नेंट हो गई और बेटे को जन्म दिया। उसे ऐसा लगा मानों पहली की जिंदगी के वक्त के पहिए थम गए हो। लेकिन सामाजिक संगठनों और सरकार की मदद से निर्भया शेल्टर होम उसका घर बन गया। उसकी आंखो का तारा 'बेटा' भी अपना घर-परिवार शेल्टर होम को ही समझता रहा। आज 11 साल बाद 'ख़ुशी' के चेहरे पर फिर से नई उम्मीदों की चमक है।

ऐसे 'ख़ुशी' बनी जिंदगी
आज 'ख़ुशी' ताउम्र किसी और की जिंदगी बन गई हैं। भोपाल महिला बाल विकास विभाग की संक्युक्त संचालक नकी जहां कुरैशी ने बताया कि शेल्टर होम में रह रही ऐसी कई पीड़िताओं का अतीत बहुत बुरा रहा। वक्त के सांचे में ढालते हुए कोशिश की जा रही है कि हर किसी जिंदगी में नया सबेरा हो। 'ख़ुशी' को अपनाने कई युवक आगे आए। दोनों के बीच बातचीत हुई और सारे हालात एक दूसरे ने बयां किए। फिर सहमति के बाद क़ानूनी प्रक्रिया के तहत शादी हो गई।

साल के अंत तक 4 और रिश्ते
मध्य प्रदेश में शुरू हुए इस नए ट्रेंड में अभी तक दो शादी हो चुकी हैं। चार और रेप सर्वाइवर लड़कियां इस साल के अंत तक शादी के बंधन में बंध जाएगी। शेल्टर होम में रहने वाली ऐसी अन्य सर्वाइवर को भी नई जिंदगी की उम्मीद की किरण दिखाई देखे लगी हैं। बाल कल्याण समिति और ऐसे लोगों के लिए मदद करने वाले अधिकृत संगठन बेहद एक्टिव हैं। सोशल माहौल भी दिया जा रहा है, ताकि जिंदगी के पुराने जख्म, मन की चोट दूर होने में मदद मिले।

बायोडाटा में लिखा जा रहा 'रेप विक्टिम'
ख़ास बात यह है कि शादी योग्य ऐसी सर्वाइवर की पहचान नहीं छिपाई जा रही हैं। बाल कल्याण समिति के तत्कालीन सदस्य ने सभी शेल्टर होम को निर्देश दिए थे कि बायोडाटा में 'रेप विक्टिम' लिखा जाए। भोपाल शेल्टर होम के संचालक अफजल खान बताते है कि पहली ही मुलाकात में रेप पीड़िता अपनी आप बीती संबंधित लड़के को बताती हैं। इससे न सिर्फ दोनों के बीच भरोसा बढ़ता है कि बल्कि रिश्ते की बुनियाद भी मजबूत रहती हैं।
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