पत्रकारों पर पुलिस की गुंडागर्दी के खिलाफ भिंड में कांग्रेस का हल्ला बोल, दिग्विजय और जीतू पटवारी होंगे शामिल
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में पत्रकारों पर पुलिस की बर्बरता और उत्पीड़न की घटना ने न केवल प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कुचलने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। इस घटना के खिलाफ जनता का आक्रोश बढ़ता जा रहा है, और अब कांग्रेस पार्टी ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार देते हुए बड़ा आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है।
11 सितंबर 2025 को भिंड में कांग्रेस एक विशाल प्रदर्शन और सभा का आयोजन करेगी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। यह आंदोलन पुलिस की गुंडागर्दी और रेत माफिया के साथ कथित साठगांठ के खिलाफ एक मजबूत प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

पत्रकारों पर हमला: क्या है पूरा मामला?
भिंड जिले में 1 मई 2025 को एक सनसनीखेज घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा। पत्रकार शशिकांत गोयल (दैनिक बेजोड़ रत्न) और अमरकांत चौहान (स्वराज एक्सप्रेस, भिंड ब्यूरो प्रमुख) सहित कई पत्रकारों ने आरोप लगाया कि भिंड के पुलिस अधीक्षक (एसपी) असित यादव ने उन्हें अपने कक्ष में चाय के बहाने बुलाया और वहाँ उनके साथ मारपीट की गई। इन पत्रकारों का कहना है कि पुलिस चंबल नदी में रेत माफिया द्वारा स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से किए जा रहे अवैध खनन की उनकी लगातार रिपोर्टिंग से नाराज थी।
प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित पत्रकारों के अनुसार, एसपी के कक्ष में उन्हें न केवल चप्पलों से पीटा गया, बल्कि उनके कपड़े उतारकर जातिगत अपमान और धमकियाँ भी दी गईं। खास तौर पर दलित समुदाय से आने वाले पत्रकार शशिकांत गोयल को उनकी जाति (जाटव) के आधार पर अपमानित किया गया। एक पत्रकार, धर्मेंद्र ओझा, ने बताया कि पुलिस ने रात 12 बजे उनके घर पर छापेमारी की, उनका मोबाइल छीन लिया, और सबूत मिटाने की कोशिश की।
इसके बाद, पुलिस ने गोयल और चौहान पर दबाव डालकर एक वीडियो बयान रिकॉर्ड करवाया, जिसमें कहा गया कि उनके और पुलिस के बीच सभी विवाद सुलझ गए हैं। इस वीडियो को भिंड पुलिस ने व्हाट्सएप के जरिए वायरल कर दिया, ताकि पत्रकारों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचाया जा सके। इस घटना का एक ऑडियो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें पुलिस की बर्बरता स्पष्ट दिखाई दे रही है।
पत्रकारों का दिल्ली तक संघर्ष
पुलिस की इस कार्रवाई से डरकर कई पत्रकारों ने अपने परिवारों को भिंड से बाहर भेज दिया और भोपाल पहुंचकर डीजीपी कैलाश मकवाना से न्याय की गुहार लगाई। इसके बाद, शशिकांत गोयल और अमरकांत चौहान 19 मई को दिल्ली पहुँचे और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) तथा राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत दर्ज की। अमरकांत चौहान ने दिल्ली हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें दो महीने तक दिल्ली पुलिस की सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन वीमेन्स प्रेस कॉर्प्स, और दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने इस घटना की कड़ी निंदा की और भिंड पुलिस, विशेष रूप से एसपी असित यादव, के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। इन संगठनों ने डीजीपी मध्य प्रदेश, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, और NHRC से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। NHRC ने 5 जून 2025 को इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया और जांच शुरू करने का आदेश दिया।
कांग्रेस का आंदोलन: 11 सितंबर को भिंड में हल्ला बोल
कांग्रेस पार्टी ने इस घटना को लोकतंत्र पर हमला करार दिया है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने कहा, "भिंड में पत्रकारों पर पुलिस की गुंडागर्दी निंदनीय है। यह न केवल प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है, बल्कि पूरे जिले की जनता इस तरह की दमनकारी नीतियों से त्रस्त है। सरकार दोषी पुलिस अधिकारियों को संरक्षण दे रही है, जो अस्वीकार्य है।"
कांग्रेस ने 11 सितंबर 2025 को भिंड में एक विशाल प्रदर्शन और सभा का आयोजन करने की घोषणा की है। इस आंदोलन में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, और वरिष्ठ नेता विवेक तनखा सहित कई दिग्गज नेता शामिल होंगे। जीतू पटवारी ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, "खनन माफियाओं से सवाल पूछने पर पत्रकारों को चप्पलों से पीटा जाता है। क्या यही BJP का नया लोकतंत्र है? भिंड में 11 सितंबर को हम इस गुंडागर्दी के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे।"
दिग्विजय सिंह ने भी इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, "पत्रकारों पर हमला लोकतंत्र पर हमला है। सच्चाई को दबाने की कोशिश करने वाली यह सरकार मध्य प्रदेश को जंगलराज में बदल रही है। हम इस अत्याचार के खिलाफ चुप नहीं रहेंगे।"
रेत माफिया और पुलिस की कथित साठगांठ
पत्रकारों का आरोप है कि भिंड में चंबल नदी के किनारे अवैध रेत खनन बड़े पैमाने पर चल रहा है, और इसमें स्थानीय पुलिस की मिलीभगत है। शशिकांत गोयल और अमरकांत चौहान ने हाल ही में इस अवैध खनन और पुलिस की वसूली की खबरें प्रकाशित की थीं, जिसके बाद उन्हें निशाना बनाया गया।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि रेत माफिया का बोलबाला भिंड में लंबे समय से है, और पुलिस उनकी मदद कर रही है। एक स्थानीय कार्यकर्ता ने कहा, "पत्रकारों ने जब इस माफिया को उजागर करने की कोशिश की, तो उन्हें सबक सिखाने की कोशिश की गई। यह साफ दिखाता है कि सत्ता का संरक्षण माफियाओं को मिल रहा है।"
सरकार और पुलिस का रुख
भिंड के एसपी असित यादव ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि पत्रकारों ने भावनाओं में बहकर ये आरोप लगाए और बाद में वीडियो बयान में स्वीकार किया कि उनके और पुलिस के बीच कोई विवाद नहीं है। हालांकि, पत्रकारों का कहना है कि यह बयान जबरदस्ती रिकॉर्ड करवाया गया था।
मुख्यमंत्री मोहन यादव और गृह विभाग ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। जीतू पटवारी ने इस चुप्पी को माफियाओं के संरक्षण का सबूत बताते हुए कहा, "मुख्यमंत्री की खामोशी बता रही है कि उनकी सरकार में पुलिस की गुंडागर्दी को बढ़ावा दिया जा रहा है।"
सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट का हस्तक्षेप
इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। सुप्रीम कोर्ट ने 4 जून 2025 को शशिकांत गोयल और अमरकांत चौहान की याचिका पर मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया। याचिका में पत्रकारों ने पुलिस द्वारा हिरासत में मारपीट, अपहरण, और जातिगत अपमान का आरोप लगाया है।
इससे पहले, दिल्ली हाई कोर्ट ने 28 मई 2025 को अमरकांत चौहान को दो महीने के लिए दिल्ली पुलिस की सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि पत्रकारों को भोपाल लौटने में खतरा है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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