Bhopal News: भोपाल जेल में ईद पर खुली मुलाकात की अनुमति, कांग्रेस प्रवक्ता की पहल लाई रंग
Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की सेंट्रल जेल में ईद-उल-फित्र के पावन अवसर पर कैदियों को अपने परिजनों से खुली मुलाकात करने का मौका मिलेगा। जेल प्रशासन ने इस मांग को स्वीकार करते हुए शनिवार, 29 मार्च 2025 को औपचारिक आदेश जारी कर दिया।
इस निर्णय से जेल में बंद करीब 800 कैदियों और उनके परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस पहल के पीछे कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता अब्बास हफीज की अहम भूमिका रही, जिनकी मेहनत और लगन ने इस मानवीय मांग को सफलता तक पहुंचाया।

मांगपत्र से शुरू हुई मुहिम
शुक्रवार, 28 मार्च 2025 को अब्बास हफीज़ ने नेशनल और स्थानीय मीडिया की मौजूदगी में भोपाल जेल अधीक्षक को एक मांगपत्र सौंपा था। इस मांगपत्र में ईद के त्योहार पर कैदियों को खुली मुलाकात की सुविधा देने की अपील की गई थी। हफीज़ ने इस मौके पर कहा था कि होली और दीपावली की तरह ईद पर भी खुली मुलाकात की परंपरा रही है, लेकिन इस बार जेल अधीक्षक ने इसे रोकने का निर्णय लिया था, जिससे 800 परिवार परेशान थे। उनकी इस पहल को समर्थन देने के लिए कई सामाजिक कार्यकर्ता और कांग्रेस के साथी भी आगे आए।
इसके बाद हफीज़ ने आईजी जेल से भी मुलाकात की और इस मुद्दे को मानवीय आधार पर उठाया। उनकी कोशिशों का असर हुआ और जेल प्रशासन ने इस मांग पर विचार करते हुए शनिवार को खुली मुलाकात की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल कैदियों के लिए राहत लेकर आया, बल्कि यह भी दिखाया कि एकजुट प्रयास और सकारात्मक पहल से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
"यह मानवीय जीत है" - अब्बास हफीज
अनुमति मिलने के बाद अब्बास हफीज़ ने इस फैसले को मानवीय जीत करार दिया। उन्होंने कहा, "ईद का त्योहार खुशियों और अपनों के साथ मिलन का मौका होता है। जेल में बंद कैदी भी इंसान हैं, और उनके परिवारों को यह हक है कि वे इस खास दिन पर अपनों से मिल सकें। मैं जेल प्रशासन, डीजीपी और सभी साथियों का शुक्रिया अदा करता हूं, जिन्होंने इस मुहिम में मेरा साथ दिया।" हफीज़ ने नेशनल और स्थानीय मीडिया का भी आभार जताया, जिन्होंने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और इसे जनता तक पहुंचाया।

कैदियों और परिजनों में खुशी की लहर
भोपाल सेंट्रल जेल में इस निर्णय से उत्साह का माहौल है। हर साल ईद, होली और दीपावली जैसे त्योहारों पर खुली मुलाकात की परंपरा रही है, लेकिन इस बार जेल अधीक्षक के शुरुआती फैसले से यह सुविधा बंद होने की आशंका थी। अब अनुमति मिलने से कैदी अपने परिजनों के साथ ईद की खुशियां मना सकेंगे। एक कैदी के भाई मोहम्मद राशिद ने कहा, "हमें उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी यह मांग पूरी हो जाएगी। अब हम अपने भाई से मिलकर ईद मनाएंगे। यह हमारे लिए बड़ी राहत है।"
जेल प्रशासन का संवेदनशील कदम
जेल प्रशासन ने इस फैसले को लागू करने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं शुरू कर दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, ईद के दिन सुबह से दोपहर तक खुली मुलाकात का समय निर्धारित किया जाएगा, ताकि सभी परिवार व्यवस्थित ढंग से अपने प्रियजनों से मिल सकें। डीजीपी कैलाश मकवाना ने भी इस पहल की सराहना की और इसे समाज की एकता को मजबूत करने वाला कदम बताया। उनके हस्तक्षेप के बाद ही जेल अधीक्षक ने इस मांग को मंजूरी दी।
त्योहारों पर मुलाकात की परंपरा
भोपाल जेल में पहले भी बड़े त्योहारों पर खुली मुलाकात की सुविधा दी जाती रही है। हाल ही में होली के मौके पर भी कैदियों को यह अवसर दिया गया था। अब्बास हफीज़ ने अपनी अपील में इसी परंपरा का हवाला देते हुए कहा था कि ईद पर भी ऐसा ही होना चाहिए। उनकी यह मांग न केवल कैदियों के हक की बात थी, बल्कि यह परिवारों के बीच रिश्तों को मजबूत करने का भी एक प्रयास था।
एक सकारात्मक संदेश
यह घटना सिर्फ एक प्रशासनिक फैसले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सकारात्मक संदेश भी देती है। अब्बास हफीज़ की इस पहल ने दिखाया कि मानवीय आधार पर उठाई गई आवाजें नक्कारखाने में तूती नहीं, बल्कि बदलाव की वजह बन सकती हैं। ईद के इस मौके पर भोपाल जेल के कैदी और उनके परिवार अब साथ मिलकर खुशियां मनाएंगे, और यह त्योहार उनके लिए और भी खास बन जाएगा।












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