MP News: मध्य प्रदेश के धान किसानों की बल्ले-बल्ले, CM यादव ने खातों में डाले 337 करोड़ रुपये, जानिए पूरी खबर

मध्य प्रदेश सरकार ने अपने किसान हितैषी वादों को एक बार फिर साकार कर दिखाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को बालाघाट जिले के कटंगी तहसील में आयोजित भव्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रदेश के 6 लाख 69 हजार से अधिक धान उत्पादक किसानों के खातों में कुल 337 करोड़ 12 लाख रुपये की बोनस राशि का अंतरण किया।

यह राशि 'मुख्यमंत्री कृषि उन्नति योजना' के तहत प्रति हेक्टेयर न्यूनतम 4 हजार रुपये (अधिकतम 10 हजार रुपये तक) के बोनस के रूप में दी गई है, जो धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी पर आधारित है। बालाघाट जिले के ही एक लाख से अधिक किसान इस योजना से सीधे लाभान्वित हुए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

Paddy farmers are in luck as CM Yadav deposits Rs 337 crore in their accounts in Balaghat

यह वितरण न केवल किसानों के लिए आर्थिक राहत का प्रतीक है, बल्कि राज्य सरकार की किसान-केंद्रित नीतियों का भी प्रमाण है। कार्यक्रम के दौरान सीएम ने 4,315 युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे और जिले में 244 करोड़ 52 लाख रुपये की लागत से बने 75 विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमिपूजन भी किया। यह आयोजन किसानों, युवाओं और स्थानीय निवासियों के बीच जबरदस्त उत्साह का केंद्र बना, लेकिन इसी बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन की कोशिश ने भी राजनीतिक रंग भर दिया। आइए, इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।

धान बोनस वितरण: किसानों के लिए बड़ी राहत, कैसे हुआ अमल?

मध्य प्रदेश में धान उत्पादन राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। 2025-26 खरीफ सीजन में धान की एमएसपी 2,369 रुपये प्रति क्विंटल (ग्रेड-ए के लिए 2,389 रुपये) तय की गई थी। लेकिन सरकार ने किसानों को और अधिक लाभ पहुंचाने के लिए अतिरिक्त बोनस की घोषणा की थी, जो अब साकार हो गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मार्च 2025 में बालाघाट के किसान सम्मेलन में ही इसकी घोषणा की थी, जहां उन्होंने कहा था कि पहले 2,000 रुपये के बोनस को बढ़ाकर 4,000 रुपये प्रति हेक्टेयर किया जाएगा। यह बोनस उन किसानों को मिला, जिन्होंने विपरीत मौसम की चुनौतियों के बावजूद धान को एमएसपी पर विक्रय केंद्रों पर बेचा।

कार्यक्रम में एक सिंगल क्लिक से 6,69,272 किसानों के बैंक खातों में राशि ट्रांसफर होते ही बालाघाट जिले के किसानों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई। जिले के एक लाख से अधिक किसान इस लाभ से जुड़े, जिनमें छोटे-किसान भी शामिल हैं। एक स्थानीय किसान रामलाल पटेल ने बताया, "यह राशि हमारे लिए संजीवनी बूटी की तरह है। बारिश की मार झेलने के बाद भी सरकार ने वादा निभाया, अब हम अगली फसल के लिए बेहतर तैयारी कर सकेंगे।" सरकार के अनुसार, यह योजना किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

इसके अलावा, सीएम ने गौपालन को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष आर्थिक सहायता की भी घोषणा की। उन्होंने कहा, "राज्य सरकार ने धान की एमएसपी बढ़ाई है और अब गौपालन के लिए भी विशेष पैकेज तैयार किया जा रहा है, ताकि किसान पशुपालन से भी आय बढ़ा सकें।" यह घोषणा ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बालाघाट की तस्वीर बदलने की दिशा में कदम

कार्यक्रम का दूसरा बड़ा आकर्षण बालाघाट जिले के विकास कार्य थे। सीएम मोहन यादव ने 244 करोड़ 52 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुए 75 निर्माण कार्यों का उद्घाटन किया और कई नई परियोजनाओं का भूमिपूजन किया। इनमें सड़कें, पुल, स्कूल भवन, स्वास्थ्य केंद्र और सिंचाई परियोजनाएं शामिल हैं। कटंगी तहसील मुख्यालय पर आयोजित इस आयोजन में स्थानीय विधायक, जिला प्रशासन और हजारों ग्रामीण उपस्थित थे।

सीएम ने अपने संबोधन में कांग्रेस सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा, "पिछली कांग्रेस सरकारों ने कटंगी और बालाघाट को उपेक्षित रखा था। लोग यहां के नाम से ही डरते थे, लेकिन आज किसानों और जवानों की मेहनत से यह इलाका विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।" उन्होंने युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर जोर देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य हर युवा को सम्मानजनक नौकरी देना है। इस कार्यक्रम में 4,315 युवाओं को विभिन्न विभागों में नियुक्ति पत्र सौंपे गए, जो जिले के लिए ऐतिहासिक क्षण साबित हुआ। एक युवा लाभार्थी ने कहा, "यह नौकरी मेरे परिवार की उम्मीदों को पूरा करेगी। सीएम सराहनीय कार्य कर रहे हैं।"

उत्साह और सुरक्षा व्यवस्था

कटंगी के कृषि उपज मंडी प्रांगण में आयोजित इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में भारी भीड़ उमड़ आई। कटंगी और आसपास के क्षेत्रों से हजारों किसान, युवा और ग्रामीण ट्रैक्टर, जीप और पैदल पहुंचे। उत्साह का आलम यह था कि मंडी का मैदान खचाऊभर हो गया। कार्यक्रम स्थल पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों, लोक नृत्यों और किसान गीतों ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।

सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने व्यापक इंतजाम किए। यातायात व्यवस्था को बदल दिया गया और कई प्रमुख मार्गों पर डायवर्ट किए गए। कटंगी से भोपाल और जबलपुर हाईवे पर वाहनों की आवाजाही सुचारू रखने के लिए अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई। ड्रोन से निगरानी और सीसीटीवी कैमरों की मदद से पूरे इलाके पर नजर रखी गई। यह आयोजन न केवल किसानों के बीच उत्साह का कारण बना, बल्कि राज्य सरकार की लोकप्रियता को भी बढ़ावा दिया।

कांग्रेस का विरोध और पुलिस कार्रवाई

कार्यक्रम की चमक के बीच राजनीतिक तनाव भी देखने को मिला। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सीएम मोहन यादव को काले झंडे दिखाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें कटंगी से करीब 5 किलोमीटर पहले जामनाला क्षेत्र में ही रोक लिया। दर्जनों कांग्रेस समर्थक, जिनके साथ बड़ी संख्या में किसान भी थे, आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। वे सीएम से मिलकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराना चाहते थे।

कांग्रेस के जिला अध्यक्ष संजय उइके ने बताया, "सरकार हेक्टेयर पर बोनस देकर किसानों को बहला रही है। असल में वादे पूरे नहीं हो रहे। धान का समर्थन मूल्य 3,100 रुपये और गेहूं का 2,700 रुपये किया जाए। इसके अलावा, महिलाओं से किए गए वादे जैसे लाड़ली बहना योजना के पूर्ण कार्यान्वयन पर भी ध्यान दें।" पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से समझा-बुझाकर लौटाया, लेकिन यह घटना राज्य की राजनीति में नया विवाद पैदा कर सकती है। भाजपा नेताओं ने इसे कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति करार दिया है।

किसानों और युवाओं के हित में नई पहल

सीएम मोहन यादव ने कार्यक्रम में किसानों और युवाओं के हित में कई नई योजनाओं की रूपरेखा भी पेश की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कोदो-कुटकी जैसी मिलेट फसलों की एमएसपी पर खरीदी शुरू की जाएगी और इनके उत्पादों को देश-विदेश तक पहुंचाने का प्रयास होगा। गेहूं उपार्जन के लिए भी 2,600 रुपये प्रति क्विंटल की दर सुनिश्चित करने की बात कही गई। युवाओं के लिए कौशल विकास और स्टार्टअप योजनाओं पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, "मध्य प्रदेश को किसानों का राज्य बनाना है, जहां हर खेत समृद्ध हो।"

यह कार्यक्रम न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी योजनाएं ग्रामीण मध्य प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होंगी। हालांकि, विपक्ष की मांगें जैसे एमएसपी में वृद्धि और महिलाओं के वादों का पूर्ण क्रियान्वयन सरकार के सामने नई चुनौतियां पेश करती हैं।

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