MP News: भोपाल में गायत्री शक्तिपीठ की एक दिवसीय कार्यशाला, AI, रोजगार और वैज्ञानिक अध्यात्मवाद पर हुई चर्चा
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को गायत्री शक्तिपीठ में अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा जोड़ो अभियान के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में टेक्नोलॉजी, रोजगार, नशा मुक्ति, साहित्य, संस्कृति और वैज्ञानिक अध्यात्मवाद जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
भोपाल के साथ-साथ हरदा, नर्मदापुरम, सीहोर, विदिशा और रायसेन से लगभग 240 युवाओं ने इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं को सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों के प्रति जागरूक करना और उन्हें देश सेवा के लिए प्रेरित करना था।

कार्यशाला का उद्देश्य और महत्व
गायत्री परिवार के युवा जोड़ो अभियान के तहत आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य युवाओं को आधुनिक तकनीक, सामाजिक समस्याओं और आध्यात्मिकता के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में युवाओं को नशा मुक्ति, रोजगार सृजन और देश सेवा जैसे विषयों पर जागरूक किया गया। गायत्री परिवार के प्रांतीय युवा समन्वयक अमर धाकड़ ने सभी प्रतिभागियों को नशा मुक्ति और देश सेवा का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा, "युवा देश का भविष्य हैं। हमें उन्हें सही दिशा दिखानी होगी ताकि वे समाज और राष्ट्र के लिए योगदान दे सकें।"
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी पर चर्चा
कार्यशाला में प्रवक्ता डॉ. उर्वशी सोनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और चैट जीपीटी जैसे आधुनिक तकनीकी उपकरणों के प्रभावी और जिम्मेदार उपयोग पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने युवाओं को बताया कि AI और अन्य तकनीकों का उपयोग रोजगार सृजन, शिक्षा और सामाजिक विकास में कैसे किया जा सकता है। डॉ. सोनी ने जोर देकर कहा, "टेक्नोलॉजी एक शक्तिशाली उपकरण है, लेकिन इसका उपयोग सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों के लिए होना चाहिए।" उन्होंने युवाओं को डिजिटल दुनिया में नैतिकता और जिम्मेदारी के साथ काम करने की सलाह दी।
इसके अलावा, कार्यशाला में साहित्य और संस्कृति पर भी गहन चर्चा हुई। डॉ. सोनी ने बताया कि भारतीय संस्कृति और साहित्य युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे तकनीक के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी संजोए रखें।
वैज्ञानिक अध्यात्मवाद: विज्ञान और आध्यात्मिकता का संगम
कार्यशाला में भौतिक शास्त्र के प्रवक्ता अजय शर्मा ने वैज्ञानिक अध्यात्मवाद पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, "विज्ञान हमें जीवन में सुविधाएं देता है, जबकि आध्यात्मिकता हमें आंतरिक संतोष और शांति प्रदान करती है। दोनों का समन्वय ही एक संपूर्ण जीवन की कुंजी है।" उन्होंने गायत्री मंत्र के वैज्ञानिक महत्व को समझाते हुए बताया कि यह न केवल आध्यात्मिक, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। उनके इस सत्र ने युवाओं को विज्ञान और अध्यात्म के बीच संतुलन की महत्ता को समझने में मदद की।
गायत्री परिवार का 70 सालों का योगदान
कार्यक्रम में गायत्री परिवार के वरिष्ठ सदस्य अनमोल पाठक ने संगठन के 70 सालों के इतिहास और योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गायत्री परिवार पिछले सात दशकों से युवाओं को देश हित और सामाजिक कार्यों के लिए प्रेरित कर रहा है। "हमारा उद्देश्य युवाओं को नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय गौरव के साथ जोड़ना है। यह कार्यशाला उसी दिशा में एक कदम है," पाठक ने कहा।
नशा मुक्ति और देश सेवा का संकल्प
कार्यशाला का एक प्रमुख आकर्षण रहा नशा मुक्ति और देश सेवा के लिए युवाओं का संकल्प। प्रांतीय युवा समन्वयक अमर धाकड़ ने युवाओं को नशे से दूर रहने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा, "नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को नष्ट करता है। युवाओं को इसके खिलाफ एकजुट होकर काम करना होगा।" इस संकल्प में शामिल युवाओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और देश सेवा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
गायत्री परिवार के दिग्गजों की मौजूदगी
कार्यक्रम में गायत्री परिवार मध्यप्रदेश के प्रांतीय समन्वयक आर.के. गुप्ता, विजय गुप्ता, आर.पी. हजारी, डॉ. दयानंद समेले, पंकज बड़ौदे और राजूराम सहित कई वरिष्ठ सदस्य मौजूद रहे। इन सदस्यों ने युवाओं को संबोधित करते हुए गायत्री परिवार के मिशन और दृष्टिकोण को साझा किया। आर.के. गुप्ता ने कहा, "युवा शक्ति ही समाज और देश को नई दिशा दे सकती है। गायत्री परिवार इस दिशा में युवाओं को प्रेरित करने के लिए प्रतिबद्ध है।"
सामाजिक मुद्दों पर गहन चर्चा
कार्यशाला में रोजगार सृजन, नशा मुक्ति, और सामाजिक जागरूकता जैसे मुद्दों पर भी गहन चर्चा हुई। वक्ताओं ने युवाओं को स्वरोजगार और स्टार्टअप की दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता जताते हुए इसे सामाजिक बुराई के रूप में चिह्नित किया। डॉ. दयानंद समेले ने कहा, "नशा मुक्ति केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि सामुदायिक स्तर पर एक आंदोलन बनना चाहिए।"
युवाओं की प्रतिक्रिया
कार्यशाला में शामिल युवाओं ने इसे एक प्रेरणादायक अनुभव बताया। भोपाल के एक युवा प्रतिभागी, रोहित वर्मा ने कहा, "इस कार्यशाला ने हमें तकनीक और अध्यात्म के बीच संतुलन समझने में मदद की। नशा मुक्ति का संकल्प लेने के बाद मैं अपने दोस्तों को भी इसके लिए प्रेरित करूंगा।" विदिशा से आईं राधिका साहू ने कहा, "AI और टेक्नोलॉजी पर चर्चा ने मुझे अपने करियर के लिए नए विचार दिए। साथ ही, गायत्री परिवार का संदेश मुझे देश सेवा के लिए प्रेरित करता है।"
गायत्री परिवार का योगदान
अखिल विश्व गायत्री परिवार दशकों से सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जागरूकता के लिए कार्य कर रहा है। मध्य प्रदेश में यह संगठन युवाओं को नैतिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण, और सामाजिक सेवा से जोड़ने के लिए कई अभियान चला रहा है। युवा जोड़ो अभियान इसी का हिस्सा है, जिसके तहत युवाओं को सामाजिक मुद्दों पर जागरूक किया जाता है और उन्हें सकारात्मक कार्यों के लिए प्रेरित किया जाता है।












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