MP News: नर्सिंग शिक्षा का क्या होगा, जानिए किन 17 सरकारी कॉलेजों की मान्यता रद्द, छात्रों के भविष्य पर सवाल
Nursing Education News: मध्य प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। राज्य के 17 सरकारी नर्सिंग कॉलेजों को शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए मान्यता नहीं मिली है, जिससे बीएससी नर्सिंग के छात्रों के पास अब केवल चार सरकारी कॉलेजों के विकल्प बच गए हैं। यह फैसला मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) द्वारा लिया गया है, जो छात्रों के लिए बड़ा झटका साबित हो रहा है।
जहां पहले 21 सरकारी कॉलेजों (16 पुराने सहित) ने आवेदन किया था, वहीं अब सीटों की संख्या 1,340 से घटकर मात्र 515 रह गई है। यानी, 825 सीटें कम हो गईं हैं। इस बीच, 188 निजी बीएससी नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता मिली है, जिनमें 10,390 सीटें उपलब्ध हैं। विपक्षी छात्र संगठन NSUI ने इसे 'निजी लॉबी का दबदबा' बताते हुए काउंसिल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और सीबीआई जांच की मांग की है।

यह मामला न केवल छात्रों की शिक्षा को प्रभावित कर रहा है, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी कॉलेजों की कमी से ग्रामीण क्षेत्रों में नर्सिंग स्टाफ की कमी और बढ़ जाएगी, जबकि निजी कॉलेजों की बढ़ती संख्या फर्जी डिग्री घोटाले को नई जान दे सकती है। आइए, इस पूरे विवाद को विस्तार से समझते हैं।
छात्रों पर पड़ा सबसे बुरा असर: प्रवेश की उम्मीदें चूर
मध्य प्रदेश में नर्सिंग प्रवेश प्रक्रिया जून 2025 में ही शुरू हो चुकी थी। प्री-नर्सिंग सिलेक्शन टेस्ट (PNST) और जनरल नर्सिंग मिडवाइफरी ट्रेनिंग सिलेक्शन टेस्ट (GNTST) का आयोजन 24 से 27 जून तक हुआ था। कुल 78,157 अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड जारी किए गए, जिनमें से 60,707 ने परीक्षा दी। इनमें से अधिकांश छात्र सरकारी कॉलेजों में प्रवेश की आस लगाए बैठे थे, जहां फीस कम और सुविधाएं बेहतर होती हैं। लेकिन अब, सरकारी सीटों की भारी कटौती से उनकी उम्मीदें आधी से भी कम रह गई हैं।
एक प्रभावित छात्रा, भोपाल की नेहा शर्मा ने बताया, "मैंने साल भर की तैयारी की थी। सरकारी कॉलेज में प्रवेश मिल जाता तो परिवार का बोझ कम होता। अब निजी कॉलेजों की ऊंची फीस (50,000 से 1 लाख रुपये सालाना) वहन करना मुश्किल है।" राज्य स्तर पर यह समस्या और गंभीर है। ग्रामीण जिलों से आने वाले 70% छात्रों के लिए सरकारी सीटें ही एकमात्र विकल्प थीं। अब काउंसलिंग प्रक्रिया में निजी कॉलेजों पर दबाव बढ़ेगा, जिससे कई योग्य छात्र शिक्षा से वंचित रह सकते हैं।
मान्यता प्रक्रिया का खुलासा: नियमों की कड़ाई या साजिश?
काउंसिल के अधिकारियों के अनुसार, मान्यता न मिलने का मुख्य कारण इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) के सख्त नियम हैं। इनमें फैकल्टी की कमी, इंफ्रास्ट्रक्चर की अपर्याप्तता और लैब सुविधाओं का अभाव शामिल है। 2025-26 सत्र के लिए कुल 393 कॉलेजों (33 नए और 360 पुराने) ने आवेदन किया था, जिनमें 21 सरकारी शामिल थे। लेकिन केवल चार सरकारी बीएससी नर्सिंग कॉलेजों को हरी झंडी मिली:
कॉलेज का नाम,स्थान
- "नर्सिंग स्कूल, सिविल अस्पताल सिवनी",सिवनी
- "शासकीय नर्सिंग कॉलेज, सिवनी",सिवनी
- "शासकीय नर्सिंग कॉलेज, उज्जैन",उज्जैन
- "शासकीय जीएनएम स्कूल, राजगढ़",राजगढ़
- "शासकीय जीएनएम स्कूल, झाबुआ",झाबुआ
- "शासकीय रानी दुर्गावती नर्सिंग कॉलेज, जबलपुर",जबलपुर
- "शासकीय नर्सिंग कॉलेज, इंदौर",इंदौर
- "शासकीय नर्सिंग कॉलेज, विदिशा",विदिशा
- "शासकीय जीएनएम स्कूल, रायसेन",रायसेन
- "शासकीय जीएनएम प्रशिक्षण केंद्र, देवास",देवास
- "शासकीय नर्सिंग कॉलेज, जीएम अस्पताल, रीवा",रीवा
- "नर्सिंग स्कूल, मुख्य अस्पताल दतिया",दतिया
- "शासकीय जीएनएम स्कूल, सतना",सतना
- "भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (BMHRC), भोपाल",भोपाल
- "शासकीय नर्सिंग कॉलेज, जीएमसी भोपाल",भोपाल
- "शासकीय नर्सिंग कॉलेज, जेए अस्पताल, ग्वालियर",ग्वालियर
- "शासकीय नर्सिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज जबलपुर",जबलपुर
कुल 515 सीटें।
वहीं, जिन 17 सरकारी कॉलेजों को झटका लगा, वे हैं:
सबसे चौंकाने वाली बात BMHRC की मान्यता रद्द होना है, जो राज्य का प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान है। काउंसिल ने कहा कि निरीक्षण में फैकल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर में कमियां पाई गईं। लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह 'नियमों की आड़ में साजिश' है।
दूसरी ओर, निजी क्षेत्र में खुशहाली है। 188 निजी बीएससी नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता मिली, जिनमें 10,390 सीटें हैं। जीएनएम कोर्स के लिए 231 निजी कॉलेजों में 10,838 सीटें उपलब्ध हैं। कुल मिलाकर, निजी कॉलेज छात्रों का 'बड़ा विकल्प' बन चुके हैं, लेकिन फीस और गुणवत्ता के सवाल बरकरार हैं।
NSUI का तीखा प्रहार: निजी कॉलेजों पर भ्रष्टाचार के आरोप
एनएसयूआई ने इस फैसले को 'निजी लॉबी का दबदबा' बताते हुए काउंसिल पर हमला बोला है। प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा, "हमने शासकीय और निजी कॉलेजों की फैकल्टी व अन्य अनियमितताओं पर विस्तृत शिकायतें दी थीं। लेकिन सरकारी कॉलेजों की मान्यता रोक दी गई, जबकि निजी वाले फर्जी फैकल्टी के साथ अनुमति पा गए।" परमार ने दावा किया कि कई निजी कॉलेज 'कागजों पर' चल रहे हैं - बिना भवन, लैब या योग्य शिक्षकों के।
एनएसयूआई की मुख्य मांगें:
- पारदर्शिता: मान्यता प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना।
- रद्दीकरण: फर्जी फैकल्टी वाले निजी कॉलेजों की मान्यता रद्द करना।
- जांच: नर्सिंग कॉलेज घोटाले की निष्पक्ष CBI जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई।
परमार ने चेतावनी दी, "यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो हम हाईकोर्ट और CBI से शिकायत करेंगे। छात्रों का भविष्य दांव पर है।" यह पहली बार नहीं है जब एनएसयूआई ने नर्सिंग काउंसिल पर सवाल उठाए। 2024 में भी उन्होंने फर्जी कॉलेजों के खिलाफ प्रदर्शन किया था, जिसके बाद कई मान्यताएं रद्द हुई थीं।
नर्सिंग घोटाले का काला अध्याय
मध्य प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा का इतिहास घोटालों से भरा पड़ा है। 2022-23 में CBI जांच में 66 से अधिक कॉलेजों की मान्यता रद्द हुई थी, क्योंकि वे INC मानकों पर खरे नहीं उतरे। हाईकोर्ट ने 2024 में 169 कॉलेजों का पुनर्निरीक्षण कराया, जिसमें दो CBI अधिकारियों पर रिश्वत लेने के आरोप लगे। 2025 में नए नियम लागू हुए - आधार-आधारित फैकल्टी सत्यापन और गूगल लोकेशन अनिवार्य। लेकिन काउंसिल पर पूर्वाग्रह के आरोप लग रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "सरकारी कॉलेजों पर दबाव कम है, लेकिन निजी वाले लॉबी से प्रभावित हैं।"
राज्य में कुल नर्सिंग कॉलेजों की संख्या 448 के आसपास है, जिनमें अधिकांश निजी हैं। INC की 2024-25 रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में 294 कॉलेजों को मान्यता मिली थी, लेकिन 2025 में सरकारी हिस्सेदारी घट गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए खतरा है - नर्सों की कमी से अस्पताल प्रभावित होंगे।
राज्य सरकार और काउंसिल की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की सरकार ने अभी आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री विश्वास सारंग ने कहा, "मान्यता INC नियमों पर आधारित है। हम छात्रों के हित में काउंसलिंग प्रक्रिया तेज करेंगे।" MPNRC के रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर फैसला लिया गया, और अपील की गुंजाइश है। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि 'भाजपा सरकार निजी शिक्षा को बढ़ावा दे रही है।'
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