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MP News: भोपाल में स्मार्ट मीटर का पूरा सच, ज्यादा बिल की 547 शिकायतें, क्या है सच्चाई?

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्मार्ट मीटर को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। उपभोक्ताओं की ओर से ज्यादा बिल आने की शिकायतों ने बिजली विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने दावा किया है कि स्मार्ट मीटर से संबंधित 547 शिकायतों की जांच की गई, और इनमें से एक भी शिकायत सही नहीं पाई गई। लेकिन सवाल यह है कि अगर स्मार्ट मीटर सही हैं, तो फिर उपभोक्ताओं को ज्यादा बिल क्यों थमाए जा रहे हैं? यह मुद्दा न केवल भोपाल, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

The complete truth about smart meters in MP Bhopal 547 complaints of high bills what is the truth

स्मार्ट मीटर की स्थिति: भोपाल में अब तक 1.89 लाख मीटर लगे

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अनुसार, उनके कार्यक्षेत्र में 16 जिलों में कुल 41 लाख 35 हजार 791 स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं। भोपाल शहर में अल्फनार पावर प्राइवेट लिमिटेड को 2 लाख 34 हजार 530 और अपरावा भोपाल स्मार्ट प्राइवेट लिमिटेड को 3 लाख 62 हजार 425 स्मार्ट मीटर लगाने का अनुबंध दिया गया है। सितंबर 2024 से शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के तहत 11 अगस्त 2025 तक भोपाल में 1 लाख 89 हजार 82 स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से 7,372 उपभोक्ताओं के परिसर में चेक मीटर के रूप में सामान्य डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक मीटर भी लगाए गए हैं, और कंपनी का दावा है कि इन मीटरों में खपत का कोई अंतर नहीं पाया गया।

ज्यादा बिल की शिकायतें: क्या है सच्चाई?

उपभोक्ताओं की ओर से स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल में भारी वृद्धि की शिकायतें सामने आई हैं। कई क्षेत्रों में बिल 200-500 रुपये से बढ़कर 5,000-15,000 रुपये तक पहुंच गए हैं। भोपाल के गोविंदपुरा, नारियलखेड़ा, सीहोर, और बुरहानपुर जैसे क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर के खिलाफ प्रदर्शन हो चुके हैं। कांग्रेस और यहां तक कि बीजेपी के कुछ विधायक भी स्मार्ट मीटर की तकनीकी खामियों की जांच की मांग कर चुके हैं।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के महाप्रबंधक सी.के. पवार ने दावा किया कि 547 शिकायतों की जांच में सभी को निराधार पाया गया। उन्होंने कहा, "स्मार्ट मीटर और सामान्य इलेक्ट्रॉनिक मीटर में बिजली खपत दर्ज करने का तरीका समान है। अंतर केवल इतना है कि स्मार्ट मीटर में रिमोट रीडिंग की सुविधा है, जिससे मानवीय गलती की संभावना नहीं रहती।" पवार ने यह भी बताया कि कुछ मामलों में पुराने मीटरों में छेड़छाड़ की वजह से कम बिल आ रहे थे, और स्मार्ट मीटर लगने के बाद सटीक खपत दर्ज होने से बिल ज्यादा दिखाई दे रहे हैं।

बिजली कंपनी की कार्यशाला: तकनीकी पहलुओं पर चर्चा

स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ते विवाद के बीच मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने सोमवार को भोपाल में दो घंटे की कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में स्मार्ट मीटर की तकनीकी विशेषताओं, उपभोक्ताओं के लाभ, और कार्यप्रणाली पर विस्तार से जानकारी दी गई। कंपनी ने दावा किया कि स्मार्ट मीटर बिजली चोरी को रोकने, सटीक बिलिंग सुनिश्चित करने, और उपभोक्ताओं को रीयल-टाइम खपत की जानकारी देने में मदद करते हैं।

स्मार्ट मीटर सेल प्रभारी सीके पवार ने कहा, "यदि किसी उपभोक्ता को लगता है कि स्मार्ट मीटर के कारण बिल ज्यादा आ रहा है, तो वे सीएम हेल्पलाइन या स्थानीय बिजली कार्यालय में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। हम हर शिकायत की गहन जांच करते हैं और उपभोक्ता को लिखित जवाब देते हैं।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि स्मार्ट मीटर की रीडिंग पूरी तरह स्वचालित होती है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप की संभावना खत्म हो जाती है।

उपभोक्ताओं का आक्रोश और सवाल

बिजली कंपनी के दावों के बावजूद, उपभोक्ताओं का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर के बिना भी उनके बिलों में वृद्धि देखी गई है, जिससे कंपनी की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। भोपाल के गोविंदपुरा निवासी रमेश शर्मा ने कहा, "मेरे घर में स्मार्ट मीटर नहीं है, फिर भी मेरा बिल 3,000 रुपये से बढ़कर 8,000 रुपये हो गया। यह सिर्फ स्मार्ट मीटर का मसला नहीं है, बिजली कंपनी मनमानी कर रही है।"

कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है और इसे "स्मार्ट लूट" करार दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को लूटने का एक नया तरीका है। बीजेपी के कुछ विधायकों ने भी स्मार्ट मीटर की तकनीकी जांच की मांग की है, जिससे यह विवाद और गहरा गया है।

पहले भी सामने आए हैं विवाद

स्मार्ट मीटर का विवाद मध्य प्रदेश में नया नहीं है। जुलाई 2025 में भोपाल, सीहोर, और बुरहानपुर में स्मार्ट मीटर के कारण बिलों में भारी वृद्धि की शिकायतें सामने आई थीं। कुछ मामलों में, बिल 200 रुपये से बढ़कर 7 लाख रुपये तक पहुंच गए थे, जिसने लोगों को हैरान कर दिया। खंडवा में स्मार्ट मीटर की रीडिंग शून्य दिखने की शिकायतें भी सामने आई थीं, जिससे यह संदेह पैदा हुआ कि मीटर बिना लैब टेस्टिंग के लगाए गए हैं।

उपभोक्ताओं के लिए सलाह

बिजली कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे ज्यादा बिल की शिकायत को सीएम हेल्पलाइन या स्थानीय बिजली कार्यालय में दर्ज कराएं। कंपनी ने यह भी कहा है कि स्मार्ट मीटर की जांच के लिए उपभोक्ता आधिकारिक लैब में टेस्टिंग की मांग कर सकते हैं। इसके अलावा, उपभोक्ता फोरम और राज्य विद्युत नियामक आयोग में भी अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।

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