MP News: स्कूल शिक्षा विभाग में बड़ा एक्शन, मंत्री राव उदय सिंह ने संचालक और उपसंचालक को हटाने के दिए निर्देश
MP School Education Department: मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग में हुए करोड़ों रुपये के कथित घोटाले पर आज बड़ा एक्शन हुआ। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने सदन में स्पष्ट ऐलान किया कि विभाग के संचालक डी.के. कुशवाहा और उपसंचालक पीके सिंह को तत्काल प्रभाव से हटा दिया जाएगा।
मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि इन दोनों अधिकारियों को हटाकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी, ताकि स्कूलों के मरम्मत, रख-रखाव और मजबूतीकरण के लिए जारी किए गए करोड़ों रुपये के दुरुपयोग की सच्चाई सामने आ सके।

यह मामला विधानसभा में विधायक लखन घनघोरिया (कांग्रेस) और श्रीकांत चतुर्वेदी (भाजपा, मैहर) द्वारा उठाया गया था। दोनों विधायकों ने सदन में आरोप लगाया कि प्रदेश की हजारों सरकारी स्कूलों के भवनों की मरम्मत और मजबूतीकरण के लिए जारी किए गए करोड़ों रुपये का सही इस्तेमाल नहीं हुआ। कई स्कूलों में काम अधूरा पड़ा है, जबकि फंड का बड़ा हिस्सा कागजों पर ही खर्च दिखाया गया है। विधायकों ने मांग की थी कि दोषी अधिकारियों को हटाकर स्वतंत्र जांच कराई जाए।
मंत्री का सदन में ऐलान
प्रश्नकाल के दौरान जब मामला उठा, तो स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने लिखित और मौखिक दोनों रूप से जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश की स्कूलों के रख-रखाव और मजबूतीकरण के लिए जारी फंड का पारदर्शी उपयोग होना चाहिए। यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है, तो बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मैंने संचालक डीके कुशवाहा और उपसंचालक पीके सिंह को तत्काल हटाने के निर्देश दे दिए हैं।
"इन अधिकारियों को हटाकर पूरे घोटाले की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, चाहे वे किसी भी पद पर हों।" मंत्री ने यह भी कहा कि विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए जल्द ही नई गाइडलाइंस जारी की जाएंगी और फंड के उपयोग की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू होगा।
घोटाले का आरोप क्या है?
विधायकों के अनुसार: स्कूल शिक्षा विभाग ने पिछले 2-3 वर्षों में स्कूल भवनों के मरम्मत, रख-रखाव और मजबूतीकरण (रिनोवेशन, स्ट्रक्चरल स्ट्रेंग्थनिंग, टॉयलेट, बाउंड्री वॉल, डेस्क-बेंच आदि) के लिए कई सौ करोड़ रुपये जारी किए। कई जिलों में काम नाममात्र का हुआ या बिल्कुल नहीं हुआ, लेकिन ठेकेदारों और अधिकारियों के खाते में पैसा चला गया। कुछ जगहों पर फर्जी बिल, अधूरे काम और कागजी खर्च दिखाए गए।
विधायक लखन घनघोरिया ने कहा कि "स्कूलों में बच्चे टूटे-फूटे भवनों में पढ़ते हैं, जबकि फंड का दुरुपयोग हो रहा है।"
श्रीकांत चतुर्वेदी ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में कहा कि "मेंटेनेंस में लापरवाही से स्कूलों की हालत बदतर हो रही है, बच्चों की सुरक्षा खतरे में है।"
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
कांग्रेस: विधायक लखन घनघोरिया ने मंत्री के फैसले का स्वागत किया, लेकिन कहा कि "यह सिर्फ शुरुआत है। पूरी जांच CBI या लोकायुक्त से कराई जाए।"
भाजपा: श्रीकांत चतुर्वेदी ने कहा कि "मंत्री जी ने सही कदम उठाया। सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर है।" विपक्ष ने मांग की कि जांच रिपोर्ट सदन में पेश की जाए और दोषियों को सजा मिले।
आगे क्या होगा?
संचालक और उपसंचालक को हटाने का आदेश आज ही जारी होने की संभावना। जांच के लिए विशेष टीम गठित होगी, जिसमें GAD (सामान्य प्रशासन विभाग) और वित्त विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। जांच में ठेकेदारों, इंजीनियरों और अन्य अधिकारियों की भूमिका भी देखी जाएगी। अगर घोटाला साबित हुआ तो करोड़ों रुपये की वसूली और आपराधिक मुकदमे हो सकते हैं।
यह फैसला प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले भी प्रशासनिक सुधारों पर जोर दे चुके हैं, और यह कार्रवाई उसी कड़ी का हिस्सा लगती है। फिलहाल, हजारों स्कूलों के बच्चों और अभिभावकों की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।












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