जहरीली कफ सिरप से मासूमों की मौत पर सरकार का सख्त रुख, जानिए कैसे शुरू हुई अवैध दवा बिक्री पर कार्रवाई
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में जहरीली कफ सिरप 'कोल्ड्रिफ' से 16 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस त्रासदी के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने बच्चों को दी जाने वाली दवाओं, खासकर कंबिनेशन मेडिसिन (संयोजन औषधियों) पर सख्ती का ऐलान किया है।
भोपाल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की एक अहम बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने स्पष्ट किया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कदम उठाए जाएंगे। साथ ही, बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट के दवा बिक्री पर भी कार्रवाई शुरू हो गई है।

NHM बैठक में बड़े फैसले: दवाओं पर सख्ती
भोपाल में आयोजित NHM की बैठक में तय हुआ कि बच्चों के लिए सिरप लिखते समय डॉक्टर अतिरिक्त सावधानी बरतेंगे। केंद्र और राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। बैठक में यह भी माना गया कि छिंदवाड़ा की घटना रासायनिक टॉक्सिसिटी का परिणाम थी। प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) संदीप यादव ने बताया कि बच्चों की रीनल बायोप्सी रिपोर्ट में एक्यूट ट्यूबुलर नेक्रोसिस पाया गया, जो डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) जैसे विषाक्त रसायन की मौजूदगी की ओर इशारा करता है। यह रसायन कोल्ड्रिफ सिरप में 48.6% मात्रा में पाया गया, जो किडनी फेलियर का कारण बना।
मेडिकल स्टोर पर कार्रवाई: लाइसेंस रद्द, परिसर सील
जांच में खुलासा हुआ कि विषाक्त सिरप की बिक्री परासिया के स्टेशन रोड स्थित 'अपना मेडिकल स्टोर' से हो रही थी, जो ज्योति सोनी के नाम से पंजीकृत था। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि स्टोर में कोई पंजीकृत फार्मासिस्ट मौजूद नहीं था। यह परिसर डॉ. प्रवीण सोनी के अधिपत्य में था, जिनकी जानकारी में अवैध रूप से दवाओं का वितरण हो रहा था। सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मेडिकल स्टोर को सील कर दिया और इसका लाइसेंस निरस्त कर दिया। दोनों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
उपमुख्यमंत्री का बयान: दोषियों को सजा, ऐसी त्रासदी दोबारा नहीं
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा, "छिंदवाड़ा की घटना अत्यंत हृदयविदारक है। यह सरकार की प्राथमिकता है कि दोषियों को कठोर सजा मिले और प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य से कोई खिलवाड़ न हो।" उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र और राज्य के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा। शुक्ल ने बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट के दवा बिक्री पर सख्त कार्रवाई का आदेश दिया और कहा कि ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे।
केंद्र की चेतावनी की अनदेखी: कंबिनेशन मेडिसिन पर प्रतिबंध
बैठक में यह भी सामने आया कि केंद्र सरकार ने दिसंबर 2023 में क्लोरफेनिरामाइन मैलिएट (2 mg) और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड (5 mg) के संयोजन वाली दवाओं को 4 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। अक्टूबर 2025 में भी स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने कफ सिरप के उपयोग में विशेष सावधानी बरतने का पत्र जारी किया था। इसके बावजूद, मध्य प्रदेश में ऐसी दवाएं बाजार में बिक रही थीं, जिसने इस त्रासदी को जन्म दिया।
सरकार की कार्रवाई: जांच और सख्ती
छिंदवाड़ा कांड की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) पहले ही गठित हो चुका है। श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स (तमिलनाडु) के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जिसने कोल्ड्रिफ सिरप का निर्माण किया। प्रमुख सचिव संदीप यादव ने बताया कि सभी पहलुओं-दवा निर्माण, वितरण, और गुणवत्ता नियंत्रण-की गहन जांच की जा रही है। इसके अलावा, बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट के चल रहे मेडिकल स्टोर्स पर नकेल कसी जाएगी। ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि तमिलनाडु सरकार की पहले दी गई चेतावनी को नजरअंदाज किया गया।
विपक्ष का दबाव और जनता का गुस्सा
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस घटना को "सरकारी हत्या" करार देते हुए स्वास्थ्य मंत्री की बर्खास्तगी और दोषियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। आज परासिया में उनके अनशन और पीड़ित परिवारों से मुलाकात ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है।












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