MP का कुबेरेश्वर धाम हादसा: 7 श्रद्धालुओं की मौत, मंत्री के बयान से विवाद, पंडित प्रदीप मिश्रा ने जताया दुख!
MP News Kubereshwar Dham: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित कुबेरेश्वर धाम में कांवड़ यात्रा के दौरान पिछले तीन दिनों में 7 श्रद्धालुओं की मौत और कई लोगों के घायल होने की घटनाओं ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। पंडित प्रदीप मिश्रा के नेतृत्व में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में 2.5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोल दी।
मंगलवार (5 अगस्त 2025) को रुद्राक्ष वितरण के दौरान भगदड़ में दो महिलाओं की मौत, बुधवार (6 अगस्त 2025) को तीन अन्य श्रद्धालुओं की अलग-अलग कारणों से मृत्यु, और गुरुवार (7 अगस्त 2025) को दो और लोगों की हार्ट अटैक से मौत ने आयोजन की सुरक्षा और व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस बीच, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के बयान और पलटने ने भी विवाद को जन्म दिया है। आइए, इस घटना की पूरी कहानी विस्तार से जानते हैं।

कुबेरेश्वर धाम में क्या हुआ?
6 अगस्त 2025 को सीहोर की सीवन नदी से शुरू हुई 11 किलोमीटर लंबी कांवड़ यात्रा में देशभर से आए लाखों श्रद्धालु शामिल हुए। इस भव्य आयोजन का नेतृत्व प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने किया। यात्रा में हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा, ढोल की थाप, और 'हर हर महादेव' के जयघोष के साथ उत्साह चरम पर था। लेकिन, इस आयोजन की तैयारियों में भारी कमी ने इसे एक त्रासदी में बदल दिया।
मंगलवार की भगदड़: दो महिलाओं की मौत
5 अगस्त 2025 को कुबेरेश्वर धाम में रुद्राक्ष वितरण के दौरान भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई। इस हादसे में दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें से दो की हालत गंभीर थी। घायलों को तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। सीहोर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनीता रावत ने इस घटना की पुष्टि की। यह पहली बार नहीं था जब कुबेरेश्वर धाम में भगदड़ हुई; फरवरी 2023 में भी शिव महापुराण कथा और रुद्राक्ष महोत्सव के दौरान ऐसा ही हादसा हुआ था।
बुधवार: तीन और श्रद्धालुओं की मौत
6 अगस्त को कांवड़ यात्रा के दिन तीन और श्रद्धालुओं की मौत की खबर आई। इनमें चतुर सिंह (50, पंचवाल, गुजरात), ईश्वर सिंह (65, रोहतक, हरियाणा), और संगीता गुप्ता (48, फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश) शामिल थे। इन मौतों के कारणों में भीड़ में धक्का-मुक्की, स्वास्थ्य समस्याएं, और प्रशासनिक अव्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया गया।
गुरुवार: हार्ट अटैक से दो और मौतें
7 अगस्त को दो और श्रद्धालुओं-उपेंद्र (22, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश) और दिलीप सिंह (57, रायपुर, छत्तीसगढ़)-की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इनमें से एक की मौत कुबेरेश्वर धाम परिसर में अचानक चक्कर खाकर गिरने से हुई, जबकि दूसरा एक होटल के सामने खड़े-खड़े गिर पड़ा। इन घटनाओं ने आयोजन की अव्यवस्था और भीड़ प्रबंधन की कमी को और उजागर किया।
पंडित प्रदीप मिश्रा का बयान
पंडित प्रदीप मिश्रा ने इन मौतों पर दुख जताते हुए कहा, "कुछ लोगों के प्राण चले गए, इसका मुझे बहुत दुख है। आपका यह परिवार और समिति हमेशा आपके साथ खड़ी है।" उन्होंने श्रद्धालुओं से शांति और भक्ति के साथ यात्रा में शामिल होने की अपील की। हालांकि, पंडित मिश्रा के पिछले बयानों और आयोजनों में अव्यवस्था के इतिहास ने उनकी जिम्मेदारी पर सवाल उठाए हैं। फरवरी 2023 में भी एक महिला की मौत के बाद उन्होंने कहा था, "मृत्यु तो आएगी ही, लोग काशी में मरने जाते हैं।" इस बयान की तब भी आलोचना हुई थी।
राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का यू-टर्न
राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने पहले इन मौतों पर न्यायिक जांच की बात कही थी, लेकिन बाद में अपने बयान से पलट गए। गुरुवार को उन्होंने कहा, "जब प्रशासन ने अपने स्तर पर जांच कर बता दिया है कि किसकी मौत किस कारण से हुई, तो अब न्यायिक जांच की जरूरत नहीं है।" उन्होंने इसे श्रद्धा का विषय बताते हुए खुद को इस मामले से अलग कर लिया। इस बयान ने विपक्ष और जनता के बीच नाराजगी को बढ़ा दिया, क्योंकि लोग इसे प्रशासन की जवाबदेही से बचने की कोशिश मान रहे हैं।
पूर्व मंत्री और जनता की नाराजगी
पूर्व बीजेपी मंत्री कुसुम सिंह मेहंदेले ने पंडित प्रदीप मिश्रा की कड़ी आलोचना की। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, "कथावाचक प्रदीप मिश्रा जी, क्यों इतने हादसे करवा रहे हो भाई? लोगों को धर्म के प्रति उन्मादी मत बनाओ। धर्म से लोगों का ज्ञान बढ़ाओ। तुम्हारे रुद्राक्ष बांटने से पुण्य मिल रहा है या हत्याएं हो रही हैं, हादसे हो रहे हैं?" उन्होंने सरकार से रुद्राक्ष वितरण पर रोक लगाने और पंडित मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
कई नागरिकों और नेटिजन्स ने भी सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की। कुछ ने पंडित प्रदीप मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने और सीहोर कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक को निलंबित करने की मांग की। मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया है और जांच शुरू की है।
प्रशासनिक अव्यवस्था: श्रद्धालुओं की शिकायतें
श्रद्धालुओं ने आयोजन में प्रशासनिक अव्यवस्था की कड़ी शिकायत की। NDTV से बात करते हुए एक श्रद्धालु ने कहा, "पानी नहीं था, शौचालय नहीं थे, और खाना भी खरीदना पड़ा। समिति ने कुछ नहीं किया। महिलाएं धक्का खा रही थीं, बुजुर्ग गिर रहे थे, और पुलिस बस देखती रही। हम श्रद्धा के लिए आए, लेकिन डर लेकर जा रहे हैं।"
भीड़ का अनुमान नाकाम: आयोजकों ने 4 हजार श्रद्धालुओं की व्यवस्था की थी, लेकिन 2.5 लाख से अधिक लोग पहुंच गए।
सुविधाओं की कमी: पीने का पानी, शौचालय, और सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी थे।
ट्रैफिक जाम: भोपाल-इंदौर हाईवे मंगलवार रात से जाम था, जिससे हजारों वाहन फंस गए।
पुलिस की निष्क्रियता: भारी भीड़ के बावजूद पुलिस और प्रशासन प्रभावी नियंत्रण नहीं कर सका।
कैबिनेट मंत्री गोविंद राजपूत ने स्वीकार किया, "भीड़ उम्मीद से कहीं ज्यादा थी। व्यवस्था कम पड़ गई। मैं प्रशासन से कहता हूं कि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।" लेकिन, उनकी यह बात प्रभावित परिवारों को खोखली लग रही है।
विपक्ष का हमला: कांग्रेस ने की FIR की मांग
कांग्रेस ने इस हादसे को प्रशासनिक विफलता और आयोजकों की लापरवाही का नतीजा बताया। पूर्व मंत्री डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा, "श्रद्धा नाकामी का बहाना नहीं हो सकती। पंडित प्रदीप मिश्रा रुद्राक्ष बांटें या न बांटें, यह उनका फैसला है, लेकिन व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रशासन की थी।" कांग्रेस ने पंडित प्रदीप मिश्रा और आयोजन समिति के खिलाफ FIR दर्ज करने और जिम्मेदार अधिकारियों के निलंबन की मांग की है।
कुबेरेश्वर धाम में पहले भी हादसे
यह पहली बार नहीं है जब कुबेरेश्वर धाम में ऐसी त्रासदी हुई है।
फरवरी 2023: शिव महापुराण कथा और रुद्राक्ष महोत्सव के दौरान भगदड़ में एक महिला की मौत हुई थी। पंडित मिश्रा ने तब भीड़ को अनुमान से ज्यादा बताकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया था।
2023 में 5 दिन में 5 मौतें: कुबेरेश्वर धाम में अव्यवस्था के कारण 5 लोगों की मौत हुई थी, जिसमें एक पुलिसकर्मी को हार्ट अटैक और एक 40 वर्षीय महिला की मौत शामिल थी।
2024: पिछले साल भी कांवड़ यात्रा के दौरान भोपाल-इंदौर हाईवे पर जाम और अव्यवस्था की शिकायतें आई थीं।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को इस हादसे का संज्ञान लिया और इसे "दुखद दुर्घटना" बताते हुए अधिकारियों को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बेहतर व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, "मैंने अधिकारियों से कहा है कि इस घटना का संज्ञान लें। ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए व्यवस्थाएं की जाएंगी।"
प्रशासन ने गुरुवार को 8 डीजे संचालकों के खिलाफ केस दर्ज किया, क्योंकि उनकी तेज आवाज और भीड़ को उकसाने की हरकतों ने भगदड़ को बढ़ावा दिया। साथ ही, एक जांच कमेटी गठित की गई है, लेकिन राजस्व मंत्री के ताजा बयान ने इस जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठा दिए हैं।
धार्मिक प्रभाव
कुबेरेश्वर धाम की कांवड़ यात्रा में लाखों श्रद्धालु शिव भक्ति और रुद्राक्ष वितरण के लिए आते हैं। लेकिन, बार-बार होने वाली इन त्रासदियों ने धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा और प्रबंधन की जरूरत को रेखांकित किया है। सोशल मीडिया पर लोग इसे "श्रद्धा का दुरुपयोग" बता रहे हैं। एक एक्स यूजर ने लिखा, "पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा में भक्ति कम, शक्ति प्रदर्शन ज्यादा दिखता है। डीजे और हेलीकॉप्टर से फूल बरसाने से क्या भगवान प्रसन्न होंगे?"
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