Jabalpur MP News: लोकायुक्त की कार्रवाई, वन विभाग के डिप्टी रेंजर ढेलन यादव रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त इकाई ने एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। वन परिक्षेत्र पाटन कार्यालय में तैनात डिप्टी रेंजर ढेलन सिंह यादव (59 वर्ष) को गुरुवार (25 सितंबर 2025) को 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। यह कार्रवाई एक स्थानीय कारपेंटर शकील (38 वर्ष) की शिकायत पर आधारित थी, जो आरोपी द्वारा वन क्षेत्र में लकड़ी के काम और परिवहन के बदले मासिक रिश्वत की मांग करने का आरोप लगाया था।
घटना आरोपी के ही शासकीय आवास पर हुई, जहां लोकायुक्त का ट्रैप दल मौके पर पहुंचा और साक्ष्य संग्रह के साथ आरोपी को हिरासत में ले लिया। यह घटना न केवल वन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर कर रही है, बल्कि आम नागरिकों के बीच भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता भी फैला रही है।

मासिक रिश्वत की लंबी मांग, कारपेंटर की मजबूरी
आरोपी ढेलन सिंह यादव, पिता स्वर्गीय बुद्धू राम यादव, वन परिक्षेत्र पाटन में डिप्टी रेंजर के पद पर तैनात हैं। वे पाटन तहसील के एक प्रमुख वन अधिकारी हैं, जहां लकड़ी के परिवहन और वन उत्पादों से जुड़े कार्यों की निगरानी का दायित्व संभालते हैं। शिकायतकर्ता शकील, पिता मोहम्मद वहीद, कटरा मोहल्ला, तहसील पाटन, जिला जबलपुर का निवासी है। शकील एक सामान्य कारपेंटर हैं, जो लकड़ी के काम और उसके परिवहन का व्यवसाय करते हैं। पाटन क्षेत्र के घने जंगलों में लकड़ी का कारोबार जीविका का प्रमुख स्रोत है, लेकिन वन नियमों की सख्ती के कारण छोटे व्यापारियों को अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
शकील ने लोकायुक्त को दी गई शिकायत में बताया कि ढेलन सिंह यादव ने कई महीनों से उनके वन परिक्षेत्र में लकड़ी काटने, परिवहन करने और संबंधित अनुमतियां प्राप्त करने के एवज में प्रतिमाह 5,000 रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही थी। "बिना पैसे दिए काम नहीं चलेगा, वरना चेकिंग में फंस जाओगे," आरोपी का कथित दबाव था। शकील ने शुरू में मना किया, लेकिन व्यवसाय प्रभावित होने के डर से मजबूर हो गए। उन्होंने कहा, "मेरा परिवार इसी काम पर निर्भर है। रिश्वत न देने पर लाइसेंस रद्द करने की धमकी दी जाती थी।" सत्यापन के बाद लोकायुक्त इकाई ने तुरंत ट्रैप की योजना बनाई। यह मामला छोटे व्यापारियों पर सरकारी अमलों के अत्याचार का एक उदाहरण है, जहां वन संरक्षण के नाम पर निजी हित साधे जाते हैं।
ट्रैप की पूरी कार्यवाही: शासकीय आवास पर जाल बिछा, रंगे हाथों पकड़ा गया
ट्रैप कार्यवाही 25 सितंबर 2025 को दोपहर करीब 2 बजे आरोपी के शासकीय आवास पर अंजाम दी गई। लोकायुक्त जबलपुर इकाई के दल ने सावधानीपूर्वक योजना बनाई। शकील को रिश्वत की राशि (5,000 रुपये) उपलब्ध कराई गई, जो रासायनिक युक्त थी ताकि हाथों पर निशान छूट जाए। शकील आरोपी से मिलने पहुंचे और बातचीत के दौरान ढेलन सिंह ने रुपये ले लिए। तुरंत लोकायुक्त का दल मौके पर दाखिल हुआ। आरोपी के हाथों पर रसायन का निशान मिला, जो अपराध के पक्के सबूत के रूप में काम आया।
ट्रैप दल में दल प्रभारी निरीक्षक राहुल गजभिये, निरीक्षक रेखा प्रजापति, निरीक्षक जितेंद्र यादव और अन्य सदस्य शामिल थे। दल ने घटनास्थल पर साक्ष्य संग्रह किया, जिसमें आरोपी के आवास से रिश्वत की राशि बरामद की गई। आरोपी को तुरंत हिरासत में ले लिया गया और थाने ले जाया गया। पूछताछ में ढेलन सिंह ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। लोकायुक्त के एक अधिकारी ने बताया, "यह ट्रैप शिकायत के सत्यापन के बाद किया गया। आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।" कार्यवाही के दौरान कोई हंगामा नहीं हुआ, लेकिन स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बन गया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज
आरोपी ढेलन सिंह यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (2018 संशोधन) की धारा 7 (लोक सेवक द्वारा रिश्वत लेना), 13(1)बी (अपदस्थ लाभ के लिए रिश्वत) और 13(2) (आपराधिक आचरण) के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये धाराएं लोक सेवकों पर रिश्वतखोरी के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करती हैं - न्यूनतम 3 से 7 वर्ष की कैद और जुर्माना। लोकायुक्त इकाई अब आरोपी की संपत्ति, बैंक खातों और अन्य संभावित अपराधों की जांच कर रही है। यदि अन्य शिकायतें मिलीं, तो मामला और गंभीर हो सकता है।
मध्य प्रदेश में लोकायुक्त संगठन भ्रष्टाचार के खिलाफ सक्रिय है। इस वर्ष जबलपुर इकाई ने 15 से अधिक ट्रैप कार्रवाइयां की हैं, जिनमें वन, राजस्व और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "वन विभाग में लकड़ी तस्करी से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले बढ़ रहे हैं। हम छोटी-छोटी शिकायतों पर भी कार्रवाई करते हैं।"
वन अधिकारी के रूप में लंबा अनुभव, लेकिन दागदार छवि?
ढेलन सिंह यादव 59 वर्ष के हैं और वन विभाग में डिप्टी रेंजर के पद पर कई वर्षों से कार्यरत हैं। पाटन क्षेत्र के वनों की निगरानी उनका प्रमुख दायित्व था, जहां अवैध कटाई और परिवहन रोकना होता है। लेकिन ironically, यही अधिकारी रिश्वत के जाल में फंस गया। स्थानीय स्रोतों के अनुसार, उनके खिलाफ पहले भी अनियमितताओं की शिकायतें आई थीं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गिरफ्तारी के बाद उनके परिवार ने चुप्पी साध ली है। एक सहकर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "वे सख्त अधिकारी माने जाते थे, लेकिन छोटे व्यापारियों पर दबाव बनाते थे।"
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