MP DGP के सख्त निर्देशों का असर: मध्य प्रदेश में रीलबाजों पर शिकंजा, जबलपुर फ्लाईओवर पर 83 हजार के चालान
मध्य प्रदेश में सोशल मीडिया रील्स के क्रेज ने अब कानूनी रंग ले लिया है। डीजीपी कैलाश मकवाना के हालिया निर्देशों के बाद पुलिस ने रील बनाने वालों पर सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। प्रदेश के सबसे बड़े फ्लाईओवर-जबलपुर के 7 किलोमीटर लंबे केबल-स्टे ब्रिज-पर रील बनाने वालों से अब तक रिकॉर्ड 83 हजार रुपये वसूले जा चुके हैं। यहां तक कि एक वायरल किन्नर रील पर भी चालान काटा गया। ॉ
दूसरी ओर, पुलिसकर्मियों द्वारा वर्दी में रील बनाने के मामलों में भी विभाग सक्रिय हो गया है, खासकर रीवा जोन में। डीजीपी के आदेश के मुताबिक, यह सिविल सेवा आचरण संहिता का उल्लंघन माना जाएगा, जिसके लिए कारण बताओ नोटिस से लेकर निलंबन तक की कार्रवाई हो सकती है।

डीजीपी के निर्देश: रील्स पर रोक, अनुशासन की नई लकीर
मध्य प्रदेश के नए डीजीपी कैलाश मकवाना, जो 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और दिसंबर 2024 से पदभार संभाल रहे हैं, ने जुलाई 2025 में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। इसमें स्पष्ट कहा गया कि पुलिसकर्मी वर्दी पहनकर या थाने में रील्स बनाना सिविल सेवा आचरण संहिता का उल्लंघन है। आदेश के अनुसार, यदि कोई पुलिसकर्मी वर्दी में या बिना वर्दी के ऐसी रील्स बनाता है, जो विभाग की छवि खराब करें (जैसे रोमांटिक गाने, फिल्मी डायलॉग या अश्लील कंटेंट), तो निंदा, विभागीय जांच, कारण बताओ नोटिस या निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई हो सकती है। डीजीपी ने सभी जिलों के एसपी को निर्देश दिए कि ऐसी गतिविधियों पर नजर रखी जाए।
यह आदेश यूपी जैसे राज्यों की एसओपी से प्रेरित है, जहां पहले ही रील्स पर रोक लगाई गई है। मध्य प्रदेश में भी जल्द ही विस्तृत एसओपी जारी करने की तैयारी है। डीजीपी मकवाना ने कहा, "पुलिस की वर्दी का सम्मान सर्वोपरि है। सोशल मीडिया पर वायरल होने का शौक विभाग की गरिमा को ठेस पहुंचा सकता है।" हालांकि, जन जागरूकता या विभागीय कार्यों के लिए रील्स बनाने की छूट बरकरार है।
जबलपुर फ्लाईओवर पर कार्रवाई: रीलबाजों का 'हॉटस्पॉट' बना खतरा
प्रदेश के सबसे बड़े फ्लाईओवर-जबलपुर का 1100 करोड़ रुपये की लागत से बना 7 किलोमीटर लंबा केबल-स्टे ब्रिज-अगस्त 2025 में उद्घाटित हुआ था। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा 23 अगस्त को इसका लोकार्पण किया गया, लेकिन जल्द ही यह रील्स और स्टंट्स का केंद्र बन गया। युवा यहां डांस, स्टंट और वीडियो शूटिंग करने लगे, जिससे ट्रैफिक जाम और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया।
डीजीपी के निर्देशों का असर यहां दिखा। अगस्त के अंतिम सप्ताह में पुलिस ने सख्ती बरती और एक हफ्ते में 190 लोगों के चालान काटे। कुल 83,000 रुपये वसूले गए। सबसे चर्चित मामला एक किन्नर का था, जिसकी रील 'माही शुक्ला' ने बनाई। वेस्टर्न ड्रेस में फ्लाईओवर पर डांस करते हुए यह वीडियो दो दिनों में लाखों व्यूज बटोर चुका था। पुलिस ने माही को तलाशा, चालान किया और हिदायत दी कि भविष्य में सड़क या फ्लाईओवर पर ऐसा न करें।
अन्य उदाहरणों में:
- एक युवक ने आमिर खान की फिल्म 'पीके' के गेटअप में गाड़ियों में उल्टा बैठकर रील बनाई।
- कुछ युवकों ने फ्लाईओवर पर ब्रेक डांस और डिस्को डांस की रिहर्सल की।
- एक वीडियो में युवक कार की छत पर चढ़कर स्टंट करते दिखे।
पुलिस ने इन सभी को चालान किया और दोबारा दोहराने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। जबलपुर एसपी ने कहा, "फ्लाईओवर यातायात सुगम बनाने के लिए है, न कि रील्स के लिए। इससे दुर्घटनाएं हो सकती हैं।"
रीवा जोन में पुलिस वर्दी वाली रील्स: पुरानी वीडियो का दुरुपयोग
रीवा जोन (रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मैहर, मऊगंज) में पुलिस वर्दी में रील बनाने के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। डीआईजी राजेश सिंह ने जुलाई 2025 में सभी जिलों को पत्र जारी कर चेतावनी दी। हाल ही में सगरा थाना प्रभारी अंकिता मिश्रा की एक रील वायरल हुई, जिसमें वे ड्यूटी के दौरान फिल्मी गाने पर डांस कर रही थीं।
जांच में पता चला कि कई वीडियो 4-5 साल पुरानी हैं, जिन्हें कुछ यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया हैंडल डाउनलोड कर अपलोड कर रहे हैं। इसके बाद कई पुलिसकर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी हुए। डीआईजी ने कहा, "रील बनाने का रोग पुलिस की छवि को धूमिल कर रहा है। सख्त कार्रवाई होगी।" रीवा जोन में अब तक दर्जनों मामलों में जांच चल रही है, और कुछ पर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
सिविल सेवा आचरण संहिता का उल्लंघन: क्यों गंभीर है यह मुद्दा?
डीजीपी के आदेश में साफ कहा गया है कि वर्दी में रील्स बनाना मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियमों का उल्लंघन है। यदि कंटेंट अश्लील या विभाग की छवि खराब करने वाला हो, तो निलंबन तक की कार्रवाई हो सकती है। यह नियम सरकारी कर्मचारियों पर लागू होता है, जो वर्दी को 'सम्मान का प्रतीक' मानते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ में पुलिसकर्मी अनुशासन भूल जाते हैं, जिससे जनता का विश्वास कम होता है।
हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया कि जागरूकता फैलाने वाली रील्स (जैसे ट्रैफिक नियम या महिला सुरक्षा) को प्रोत्साहन मिलेगा। लेकिन रोमांटिक या मनोरंजक कंटेंट पर पूर्ण रोक है।
सोशल मीडिया का दोहरा चेहरा
ये कार्रवाइयां सोशल मीडिया के दोहरे प्रभाव को उजागर करती हैं। एक ओर, रील्स से युवाओं को प्रसिद्धि मिलती है-जैसे किन्नर माही की रील ने लाखों व्यूज पाए-लेकिन दूसरी ओर, यह ट्रैफिक सुरक्षा और विभागीय अनुशासन को खतरे में डालता है। जबलपुर फ्लाईओवर पर स्टंट्स से दुर्घटना का खतरा बढ़ा, जबकि पुलिस रील्स से विभाग की गरिमा प्रभावित हुई।
सोशल मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में 50 करोड़ से अधिक इंस्टाग्राम यूजर्स हैं, और रील्स का क्रेज युवाओं में बेरोजगारी और प्रसिद्धि की चाहत से जुड़ा है। लेकिन कानूनी रूप से, सड़क पर स्टंट्स मोटर व्हीकल एक्ट के तहत दंडनीय हैं, जबकि पुलिसकर्मियों के लिए आचरण नियम सख्त हैं।
क्या बनेगी एसओपी?
डीजीपी मकवाना के नेतृत्व में मध्य प्रदेश पुलिस अब प्रदेशव्यापी अभियान चला रही है। रीवा और जबलपुर जैसे जिलों में जागरूकता कैंप लगाए जा रहे हैं। जल्द ही रील्स पर विस्तृत एसओपी जारी होने की उम्मीद है, जिसमें क्या अनुमत है और क्या नहीं, स्पष्ट होगा।
यह अभियान न केवल ट्रैफिक सुरक्षा बढ़ाएगा, बल्कि पुलिस की छवि को मजबूत भी करेगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या युवा इस सख्ती को स्वीकार करेंगे, या रील्स का क्रेज और बढ़ेगा? डीजीपी के इन कदमों से उम्मीद है कि संतुलन बनेगा-सोशल मीडिया की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी का।












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