Bhopal News: भाजपा प्रवक्ता डॉ दुर्गेश केसवानी ने फादर्स डे को बनाया 'ग्रीन डे', दिया वृक्षारोपण का संदेश"
Bhopal News: फादर्स डे के मौके पर जब दुनिया भर में पिता के प्रेम और योगदान को याद किया जा रहा था, उसी दिन मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के ग्राम धामनिया में एक अनोखा और प्रेरणादायक आयोजन हुआ।
जाग्रत हिंदू मंच के संरक्षक एवं भाजपा प्रवक्ता डॉ दुर्गेश केसवानी ने इस अवसर को केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ते हुए वृक्षारोपण किया। उनका यह कदम समाज को एक गहरा संदेश देता है-कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ा तोहफा एक सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण है।

पर्यावरण संरक्षण को बनाया उत्सव
गांव में आयोजित इस कार्यक्रम में नीम, पीपल और बरगद जैसे छायादार और औषधीय गुणों वाले पेड़ लगाए गए। डॉ. केसवानी ने स्थानीय ग्रामीणों और जाग्रत हिंदू मंच के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर वृक्षारोपण करते हुए कहा:
"फादर्स डे पर पेड़ लगाना प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी का संकेत है। एक पिता की तरह हमें भी धरती माता की रक्षा करनी है ताकि हमारे बच्चे शुद्ध हवा में सांस ले सकें।" उन्होंने ग्लोबल वॉर्मिंग, जलवायु परिवर्तन, और प्रदूषण को आधुनिक युग की सबसे बड़ी चुनौतियाँ बताया और कहा कि इन समस्याओं से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका वृक्षारोपण है।
मोदी और मोहन यादव के विजन से प्रेरणा
डॉ. केसवानी ने बताया कि इस पहल की प्रेरणा उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पर्यावरणीय प्रयासों से मिली। उन्होंने कहा: "प्रधानमंत्री मोदी का मंत्र-'पर्यावरण के प्रति संवेदनशील विकास'-दुनिया के लिए मार्गदर्शन है। 'स्वच्छ भारत', 'नमामि गंगे' और 'एक पेड़ मां के नाम' जैसे अभियानों ने देशभर में चेतना जगाई है।"
मुख्यमंत्री मोहन यादव के 'हरित मध्यप्रदेश' अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लाखों पेड़ लगाकर नर्मदा जैसी नदियों के संरक्षण का कार्य प्रशंसनीय है।
भोपाल-सीहोर को बनाना है 'हरित ज़ोन'
डॉ. केसवानी ने यह भी घोषणा की कि वे भोपाल और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को ग्रीन कवर से आच्छादित करने का अभियान चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसके लिए वे स्कूलों, कॉलेजों, सामाजिक संगठनों और पंचायतों को साथ लेकर जन आंदोलन का स्वरूप दे रहे हैं।
"हम चाहते हैं कि हर नागरिक साल में कम से कम एक पेड़ लगाए और उसकी देखभाल करे। यह अभियान भावनात्मक नहीं, बल्कि दीर्घकालीन सामूहिक जिम्मेदारी है।"
समाजिक और सियासी प्रतिक्रियाएं
इस आयोजन की सोशल मीडिया पर खूब तारीफ हो रही है। X (पूर्व Twitter) पर कई यूजर्स ने इसे "फादर्स डे का सर्वश्रेष्ठ और सार्थक उपयोग" बताया। एक यूजर ने लिखा: "पेड़ लगाकर पिता जैसी भूमिका निभाना-यह सच में प्रेरक है।"
हालांकि, विपक्ष ने इसे एक "राजनीतिक नौटंकी" करार दिया। कांग्रेस नेता राजेश वर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा एक तरफ वृक्षारोपण की बात करती है और दूसरी तरफ अवैध खनन और जंगल कटाई पर मौन है। इसके जवाब में जाग्रत हिंदू मंच के अध्यक्ष विपुल बंसल ने कहा: "यह किसी राजनीतिक स्टंट का हिस्सा नहीं, बल्कि पीढ़ियों के लिए हरियाली का संकल्प है।"
फादर्स डे का असली अर्थ: आने वाली पीढ़ियों को उपहार
डॉ केसवानी ने कहा कि "एक पेड़ सौ पीढ़ियों का वरदान" है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे इसे केवल एक दिन का आयोजन न मानें, बल्कि दीर्घकालिक पर्यावरणीय मिशन के रूप में अपनाएं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पेड़ों की देखभाल को "परिवार की जिम्मेदारी" माना जाए, जैसे हम अपने बच्चों की करते हैं।
जाग्रत हिंदू मंच की भूमिका
कार्यक्रम में जाग्रत हिंदू मंच के अध्यक्ष विपुल बंसल, धीरज कुमार, जितेंद्र कुशवाहा, लोकेंद्र मेवाड़ा, बबलू मेवाड़ा, मोहन अहिरवार, प्रशांत कुमार सहित कई ग्रामीणों की भागीदारी रही। मंच ने भविष्य में और अधिक वृक्षारोपण अभियानों, स्कूलों में 'हरित विद्यार्थी' अभियान, और पर्यावरण पर कार्यशालाओं की रूपरेखा साझा की।
फादर्स डे पर जब लोग अपने पिता को उपहार में घड़ी, कपड़े या फोन दे रहे थे, वहीं सीहोर में एक नेता ने पर्यावरण को उपहार में पेड़ देकर सच्ची जिम्मेदारी निभाई। यह पहल केवल एक गांव तक सीमित न रहकर पूरे प्रदेश में हरियाली की लहर ला सकती है-बशर्ते हर व्यक्ति इस वृक्षारोपण के बीज को अपने दिल में बो दे।












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