MP News: बच्चों को कागज के टुकड़ों पर परोसा गया मिड-डे मील, भ्रष्टाचार की पोल खुली – हेडमास्टर सस्पेंड, जानिए

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरी इंसानियत को शर्मसार कर दिया। विजयपुर इलाके के शासकीय मिडिल स्कूल हुल्लपुर में मिड-डे मील की व्यवस्था की पोल खुल गई, जहां मासूम बच्चों को थाली या प्लेट के बजाय रद्दी कागज के टुकड़ों पर भोजन परोस दिया गया।

वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि जमीन पर बिछे कागजों पर दाल-चावल परोसे जा रहे हैं, जबकि शिक्षक तमाशबीन बने हुए हैं। यह घटना न केवल भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करती है, बल्कि सरकारी स्कूलों में पोषण योजना के नाम पर हो रही खानापूर्ति को भी बेनकाब करती है।

Mid-day meals served to children on pieces of paper Sheopur corruption headmaster suspended

वीडियो वायरल होते ही जिला शिक्षा अधिकारी ने हेडमास्टर को सस्पेंड कर दिया, लेकिन सवाल वही - क्या अब बच्चों को सही भोजन मिलेगा? आइए, जानते हैं इस शर्मनाक घटना की पूरी दास्तां - वीडियो से लेकर प्रशासनिक कार्रवाई, मिड-डे मील योजना के उद्देश्य और मध्य प्रदेश में व्याप्त भ्रष्टाचार तक।

हुल्लपुर स्कूल में शर्मनाक दृश्य: थाली की जगह कागज, शिक्षक मौन - वीडियो ने खोली पोल

श्योपुर जिले का विजयपुर ब्लॉक एक पिछड़ा इलाका है, जहां सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना बच्चों की शिक्षा और पोषण का आधार है। लेकिन हुल्लपुर प्राथमिक विद्यालय में यह योजना खानापूर्ति बन गई। वायरल वीडियो में 20-25 बच्चे जमीन पर बिछे रद्दी कॉपी के पन्नों पर दाल-चावल खाते दिख रहे हैं। कोई थाली, कोई प्लेट नहीं - बस कागज के टुकड़े। एक बच्चा बोला, "हमारे पास थाली नहीं है, इसलिए कागज पर खाते हैं।" शिक्षक पृष्ठभूमि में खड़े हैं, लेकिन हस्तक्षेप नहीं।

स्थानीय निवासी रामेश्वर ने बताया, "स्कूल में 100 से अधिक बच्चे हैं, लेकिन भोजन की व्यवस्था नाममात्र की। राशन आता है, लेकिन खर्चा कहां जाता है?" वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हंगामा मच गया। आम आदमी पार्टी (AAP) ने ट्वीट किया, "मध्य प्रदेश में 20 साल से BJP की सरकार, ट्रिपल इंजन का दावा, लेकिन स्कूलों का हाल? पोषण योजना में भ्रष्टाचार!" कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने कहा, "यह BJP सरकार की नाकामी है। बच्चों का भविष्य दांव पर।"

यह घटना 2025 में MP के तीसरा ऐसा मामला है, जहां मिड-डे मील में घोर लापरवाही सामने आई। पहले इंदौर में कीड़े मिले भोजन, फिर ग्वालियर में राशन चोरी।

प्रशासन की कार्रवाई: हेडमास्टर सस्पेंड, जांच शुरू - लेकिन सवाल बरकरार

वीडियो वायरल होते ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एम.एल. गर्ग ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने स्कूल का दौरा किया और प्रभारी हेडमास्टर भोगीराम धाकड़ को निलंबित कर दिया। गर्ग ने कहा, "यह गंभीर लापरवाही है। मिड-डे मील में थाली अनिवार्य है। जांच टीम गठित की है, राशन का हिसाब चलेगा।" जिला कलेक्टर ने आदेश दिया कि स्कूल में तुरंत थालियां उपलब्ध कराई जाएं, और कुकिंग स्टाफ की जांच हो।

लेकिन कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। एक स्थानीय ने कहा, "हेडमास्टर सस्पेंड हो गया, लेकिन राशन कहां गया? कितना भ्रष्टाचार?" शिक्षा विभाग ने 48 घंटे में रिपोर्ट मांगी। NHM के तहत MP में मिड-डे मील पर 2,500 करोड़ का बजट है, लेकिन 30% फंड का दुरुपयोग।

मिड-डे मील योजना का उद्देश्य: पोषण से शिक्षा, लेकिन MP में भ्रष्टाचार का शिकार

मिड-डे मील योजना (MDM) 1995 में शुरू हुई, जो कक्षा 1-8 के बच्चों को पौष्टिक भोजन देती है। उद्देश्य: कुपोषण कम, स्कूल उपस्थिति बढ़ाना (विशेषकर लड़कियां, SC/ST)। MP में 1.2 करोड़ बच्चे लाभान्वित, लेकिन CAG रिपोर्ट (2023) में 25% फंड दुरुपयोग का आरोप।

  • मानदंड: थाली में गर्म भोजन, प्लेट अनिवार्य। राशन: चावल 100g, दाल 30g, सब्जी 50g।
  • MP में समस्या: 2024 में 500 स्कूलों में राशन चोरी, 20% में प्लेट की कमी। श्योपुर जैसे आदिवासी क्षेत्र सबसे प्रभावित।
  • आंकड़े: MP में 40% बच्चे कुपोषित, MDM से उपस्थिति 15% बढ़ी, लेकिन गुणवत्ता पर सवाल।

विशेषज्ञ ने कहा, "यह घटना योजना की विफलता है। भ्रष्टाचार से बच्चों का भविष्य दांव पर।"
MP में मिड-डे मील भ्रष्टाचार के अन्य मामले: इंदौर से ग्वालियर तक की कहानियां
यह पहली घटना नहीं।

  • इंदौर (2024): स्कूल में कीड़े वाली दाल, 50 बच्चे बीमार। कुक सस्पेंड।
  • ग्वालियर (2025): राशन चोरी, 200 बोरी गायब। FIR दर्ज।
  • श्योपुर (2023): स्टूडेंट्स ने कहा, "भोजन में रेत मिली।" जांच में भ्रष्टाचार साबित।

CAG ने 2023 में MP में 15% फंड दुरुपयोग का आरोप लगाया। शिक्षा मंत्री ने कहा, "शून्य सहनशीलता, हर स्कूल का ऑडिट।"

भ्रष्टाचार का अंत, बच्चों का भविष्य सुरक्षित

हुल्लपुर स्कूल का यह वाकया मिड-डे मील योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार का आईना है। हेडमास्टर सस्पेंड हो गया, लेकिन सिस्टम में सुधार जरूरी। सरकार को सख्ती बरतनी होगी - राशन ट्रैकिंग, ऑनलाइन मॉनिटरिंग। बच्चों का पोषण शिक्षा का आधार - इसे बचाओ। क्या अब बदलाव आएगा? उम्मीद है। जागरूक रहें, आवाज उठाएं।

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