वेंटीलेटर पर मध्य प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था, 8000 पद खाली
भोपाल। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने राज्य की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर होने का दावा किया है। मंत्री ने यद्यपि यह बात भी स्वीकार की कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में सात से आठ हजार चिकित्सकों एवं पारा मेडिकल कर्मचारियों की कमी है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों और कर्मचारियों की जल्द ही भर्ती की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की एक वर्ष की उपलब्धियों का सोमवार को मीडिया के सामने ब्यौरा देते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि राज्य की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हो रहा है। अस्पतालों में मरीजों की नि:शुल्क जांच हो रही है, दवाएं दी जा रही हैं। यही कारण है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों और संस्थागत प्रसव के मामलों में इजाफा हुआ है।
स्वास्थ्य मंत्री से जब पूछा गया कि यदि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हुई हैं और आम जनता का इनके प्रति भरोसा बढ़ा है, तो राज्य के मुख्यमंत्री से लेकर कई मंत्री और अधिकारी निजी अस्पतालों का रुख क्यों करते हैं, इस पर उनका जवाब था कि किसी को सरकारी अस्पतालों में जाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
स्वास्थ्य मंत्री मिश्रा ने एक सवाल के जवाब में यह स्वीकार किया कि राज्य में चिकित्सकों व पारा मेडिकल कर्मचारियों की कमी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 तक राज्य में पांच हजार चिकित्सकों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है, वहीं पारा मेडिकल कर्मचारियों को 24 तरह की दवाओं का प्रशिक्षण दिया गया है।
छत्तीसगढ़ का नसबंदी शिविर
मंत्री से जब पूछा गया कि छत्तीसगढ़ में नसबंदी शिविर के दौरान संक्रमण और अमानक दवाओं के इस्तेमाल से हुई महिलाओं की मौत के मामले से राज्य सरकार ने क्या सबक लिया, तो उन्होंने अजीबो गरीब जवाब दिया।
मंत्री का कहना था कि उन्हें किसी से सबक लेने की कतई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, "हम तो एहतियात बरतते ही हैं। छत्तीसगढ़ में अमानक पाई गई सिप्रोसिन 500 मध्य प्रदेश में अमानक नहीं पाई गई है, इसलिए यहां उसका इस्तेमाल किया गया।"
हाल ही में सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत राज्य के सरकारी अस्पतालों में 147 दवाओं के अमानक पाए जाने का खुलासा हुआ है, स्वास्थ्य मंत्री यद्यपि यह मानने को तैयार नहीं हैं कि राज्य में एक भी दवा अमानक पाई गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।













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