बोत्सवाना से आए 9 चीते कूनो नेशनल पार्क पहुंचे, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव करेंगे रिलीज
मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) में आज सुबह अफ्रीका से आठ नए चीते लाए गए हैं। इस बैच में छह मादा और दो नर चीते शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव इन चीतों को कूनो में बनाए गए विशेष बाड़ों में छोड़ेंगे।
दरअसल, श्योपुर जिले का कूनो नेशनल पार्क एक बार फिर विश्व पटल पर छा गया है। अफ्रीकी महाद्वीप के बोत्सवाना से 8 चीतों (6 मादा और 2 नर) का तीसरा बड़ा जत्था विशेष विमान के जरिए मध्य प्रदेश पहुंच चुका है। ये 'सुपरफास्ट' शिकारी न केवल कूनो के पारिस्थितिकी तंत्र को समृद्ध करेंगे, बल्कि भारत में चीतों की आबादी को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।

ग्वालियर से कूनो तक का 'मिशन एयरलिफ्ट'
बोत्सवाना से भारत आने के बाद, सभी आव्रजन (Immigration), सीमा शुल्क और पशु चिकित्सा औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद, आज 28 फरवरी की सुबह ठीक 8:30 बजे भारतीय वायु सेना के दो विशेष हेलीकॉप्टरों ने इन चीतों को लेकर ग्वालियर से कूनो के लिए उड़ान भरी। सुबह 9:30 बजे तक ये चीते सुरक्षित रूप से पार्क के अंदर बनाए गए 5 विशेष हेलीपैडों पर उतार लिए गए। वैज्ञानिकों के प्रोटोकॉल के तहत अब इन्हें करीब एक महीने तक क्वारंटीन बाड़ों में रखा जाएगा।
सफलता की नई कहानी
प्रोजेक्ट चीता अब केवल स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सफल प्रजनन के दौर में प्रवेश कर चुका है।
- ऐतिहासिक उपलब्धि: भारत की धरती पर जन्मी पहली वयस्क मादा चीता 'मुखी' ने 5 शावकों को जन्म देकर इतिहास रच दिया है।
- गामिनी का जलवा: 'गामिनी' दूसरी बार मां बनी है। उसकी पहली खेप के 3 शावक स्वस्थ हैं और अब उसने 3 और शावकों को जन्म दिया है।
- स्वस्थ कुनबा: दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीतों में से 8 पूरी तरह स्वस्थ और कूनो में सेटल हैं। वर्तमान में दक्षिण अफ्रीकी माताओं से जन्मे 10 शावक बिल्कुल तंदुरुस्त हैं।
- खुले जंगल में सैर: 'वीरा' अपने 13 महीने के शावक के साथ खुले जंगल में घूम रही है, जबकि 'निर्वा' अपने तीन शावकों के साथ सुरक्षित बाड़े में है।
एशिया में चीतों की वापसी का पॉवरफुल उदाहरण
एशिया से विलुप्त हो चुके चीतों को महज तीन साल के भीतर भारत के जंगलों में फिर से स्थापित करना वन्यजीव संरक्षण के इतिहास का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है। कूनो से अब कुछ चीतों को गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में भी स्थानांतरित किया जा रहा है। प्रजनन करने वाली मादाओं और स्वस्थ शावकों की दूसरी पीढ़ी के साथ, यह स्पष्ट है कि चीता एक बार फिर भारतीय जंगलों का अभिन्न अंग बन चुका है।












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