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MP News: रिटायर्ड PWD चीफ इंजीनियर जीपी मेहरा के 4 ठिकानों पर छापे, करोड़ों की नकदी-सोना-चांदी-प्रॉपर्टी बरामद

मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त संगठन की सख्ती एक बार फिर सुर्खियों में है। पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त श्री योगेश देशमुख के मार्गदर्शन में भोपाल लोकायुक्त टीम ने सेवानिवृत्त इंजीनियर-इन-चीफ जी.पी. मेहरा (गोविंद प्रसाद मेहरा) के निवास और संपत्तियों पर छापेमारी की।

यह कार्रवाई 'आय से अधिक संपत्ति' (डिस्प्रॉपोर्शनेट एसेट्स) के गंभीर आरोपों के तहत की गई, जहां मेहरा पर अपनी वैध आय से कई गुना ज्यादा संपत्ति अर्जित करने का शक है। फरवरी 2024 में रिटायरमेंट के बाद भी उनकी 'काली कमाई' का राज खुलने लगा।

Lokayukta raids on the houses of former PWD Chief Engineer GP Mehra in Bhopal

छापों से करोड़ों की नकदी, सोना-चांदी के गहने, फिक्स डिपॉजिट (FD), प्रॉपर्टी दस्तावेज और ग्रामीण संपत्तियां बरामद हुईं। कार्रवाई जारी है, और यह मामला लोक निर्माण विभाग (PWD) में व्याप्त भ्रष्टाचार को नंगा कर रहा है। आइए, इस पूरे मामले को सीधे तरीके से समझते हैं-मेहरा कौन हैं, आरोप कैसे लगे, छापों में क्या-क्या मिला, और कानूनी प्रक्रिया क्या होगी।

जीपी मेहरा कौन हैं? PWD के 'टॉप इंजीनियर' का बैकग्राउंड

गोविंद प्रसाद मेहरा (पिता: अमृतलाल मेहरा) मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) के पूर्व इंजीनियर-इन-चीफ थे। वे फरवरी 2024 में इस पद से रिटायर हुए। PWD राज्य का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर विभाग है, जहां सड़कें, पुल, सरकारी भवन और करोड़ों के प्रोजेक्ट्स का काम होता है। मेहरा के जिम्मे ठेकेदारों से डीलिंग, टेंडर पास करना और निर्माण की निगरानी थी। विभागीय सूत्र बताते हैं कि वे 'सबसे प्रभावशाली इंजीनियरों' में गिने जाते थे, क्योंकि उनके साइन से अरबों के प्रोजेक्ट्स मंजूर होते थे।

रिटायरमेंट के बाद भी मेहरा की संपत्तियां संदेहास्पद थीं। गोपनीय सूत्रों से लोकायुक्त को जानकारी मिली कि उन्होंने सेवा के दौरान भ्रष्टाचार से वैध आय से 5-10 गुना ज्यादा संपत्ति बनाई। यह संपत्ति खुद और परिवार (पत्नी, बेटे रोहित मेहरा आदि) के नाम पर बेनामी रूप से छिपाई गई। लोकायुक्त ने इसे 'सिस्टमैटिक लूट' बताया।

Lokayukta raids on the houses of former PWD Chief Engineer GP Mehra in Bhopal

फरवरी 2024: रिटायरमेंट और शक की शुरुआत

मेहरा PWD के इंजीनियर-इन-चीफ पद से रिटायर हुए। गोपनीय सूत्रों (ठेकेदारों और विभागीय अफसरों) से लोकायुक्त को टिप मिली कि उनकी संपत्तियां (भोपाल, नर्मदापुरम, सोहागपुर) वैध आय से मेल नहीं खातीं। अनुमान: 20-30 साल की सेवा में सैलरी 1-2 करोड़, लेकिन संपत्ति 50 करोड़+।

2024-मध्य 2025: सत्यापन और जांच

पुलिस अधीक्षक विपुस्था, लोकायुक्त भोपाल संभाग ने गुप्त जांच शुरू की। आयकर रिटर्न, बैंक स्टेटमेंट और प्रॉपर्टी रिकॉर्ड चेक किए। प्रथम दृष्टया (प्रिलिमिनरी) सत्यापन में आरोप सही पाए गए। ठेकों में कमीशन, फर्जी बिलिंग और बेनामी डीलिंग के सुराग मिले।

अक्टूबर 2025: FIR और छापे

  • धारा 13(2) रीड विथ 13(1)(b) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (2018 संशोधन) के तहत FIR दर्ज। आवश्यक अनुमति (कोर्ट से) मिलते ही 10 अक्टूबर को सुबह चार ठिकानों पर छापेमारी। डीएसपी वीरेंद्र सिंह, आशीष भट्टाचार्य, मंजू सिंह और बी.एम. द्विवेदी के नेतृत्व में 50+ सदस्यीय टीम ने ऑपरेशन चलाया। कार्रवाई जारी-दोपहर तक प्रमुख बरामदगी।
  • यह लोकायुक्त की 2025 की 100वीं+ कार्रवाई है। MP में PWD में ऐसे केस आम हैं-2024-25 में 50+ इंजीनियरों पर जांच।

चार ठिकानों पर छापे: क्या-क्या बरामद हुआ? ठिकाना,मुख्य बरामदगी,अनुमानित मूल्य

  • "मणिपुरम कॉलोनी, ए-6 बंगला",नकदी: 8.79 लाख; सोना-चांदी गहने: 50 लाख; FD: 56 लाख; अन्य सामान: 60 लाख; प्रॉपर्टी दस्तावेज,1.75 करोड़+
  • "ओपल रेजेंसी, दाना पानी, फ्लैट 508",नकदी: 26 लाख; सोना: 2.649 किलो (3.05 करोड़); चांदी: 5.523 किलो (5.93 लाख); प्रॉपर्टी दस्तावेज,3.37 करोड़+
  • "केटी इंडस्ट्रीज, गोविंदपुरा फैक्ट्री","उपकरण, कच्चा/तैयार माल (PVC पाइप); नकदी: 1.25 लाख; प्रॉपर्टी दस्तावेज; पार्टनरशिप: रोहित मेहरा + कैलाश नायक",50 लाख+ (जांचाधीन)
  • "ग्राम सैनी, सोहागपुर (नर्मदापुरम)",17 टन शहद; कृषि भूमि; महंगे उपकरण; 6 ट्रैक्टर; 32 निर्माणाधीन कॉटेज; 7 निर्मित कॉटेज; 1 भवन; 2 मछली पालन केंद्र; 2 गौशाला; 2 बड़े तालाब; मंदिर; प्रॉपर्टी दस्तावेज,5-10 करोड़+ (जांचाधीन)

परिवार के नाम पर 4 लग्जरी कारें (फोर्ड एंडेवर, स्कोडा स्लाविया, किया सोनेट, मारुति सियाज)-तस्दीक हो रही। शेयर, इंश्योरेंस और FD दस्तावेजों का परीक्षण चलेगा।

कुल अनुमान: 10-15 करोड़ की संपत्ति। नकदी गिनने के लिए मशीनें लगीं; गहनों की वैल्यूएशन ज्वेलर्स से। दस्तावेजों से मुंबई/दुबई प्रॉपर्टी के सुराग।

कानूनी प्रक्रिया: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत क्या सजा?

  • धारा 13(1)(b) + 13(2): सार्वजनिक सेवक द्वारा वैध आय से अधिक संपत्ति रखना अपराध। सजा: 5-10 साल जेल + जुर्माना। संपत्ति जब्ती संभव।
  • आगे: 7-15 दिनों में चार्जशीट। कोर्ट में ट्रायल। लोकायुक्त संपत्ति वसूली की सिफारिश करेगा। अगर साबित, तो परिवार की संपत्तियां भी जब्त।
  • लोकायुक्त का रुख: डीजी योगेश देशमुख ने कहा, "भ्रष्टाचार की जड़ें उखाड़ेंगे। PWD में ट्रांसपेरेंसी लाएंगे।"
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