छिंदवाड़ा में प्रबंधक मुनीम प्रसाद पटेल 59,000 रुपये कैसे रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया, जानिए पूरा मामला
MP News: मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त संगठन की सख्ती ने एक बार फिर कमर तोड़ दी है। पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त श्री योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के निर्देश पर जबलपुर लोकायुक्त इकाई ने छिंदवाड़ा जिले में एक बड़ी ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया।
आदिम जाति एवं सेवा सहकारिता समिति मर्यादा झिरपा के प्रभारी समिति प्रबंधक मुनीम प्रसाद पटेल (55 वर्ष) को 59,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। यह रकम शिकायतकर्ता हरीश राय के वेयरहाउस को सुचारू रूप से चलाने और ब्लैकलिस्ट में न डालने की एवज में मांगी गई थी।

आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धाराओं 7, 13(1)बी और 13(2) के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की गई है। ट्रैप दल के प्रभारी निरीक्षक उमा कुशवाहा के नेतृत्व में यह कार्रवाई जिला सहकारी बैंक तामिया में की गई, जो आदिवासी बहुल छिंदवाड़ा जिले में भ्रष्टाचार की जड़ों को काटने का संकेत दे रही है।
यह घटना मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की बढ़ती सक्रियता का प्रतीक है, जहां 2025 में अब तक 50 से अधिक ट्रैप कार्रवाइयां हो चुकी हैं। डीजी योगेश देशमुख ने कहा, "भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस। कोई भी छूट नहीं मिलेगी।" छिंदवाड़ा SP ने जांच को तेज करने के निर्देश दिए हैं, जबकि विपक्ष ने इसे "BJP सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार" का प्रमाण बताया।
ट्रैप का पूरा घटनाक्रम: शिकायत से रंगे हाथों गिरफ्तारी तक
शिकायतकर्ता हरीश राय (26 वर्ष, पुत्र रमेश राय, निवासी ग्राम झिरपा, तहसील तामिया, जिला छिंदवाड़ा) ने 10 अक्टूबर 2025 को जबलपुर लोकायुक्त कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज की। उन्होंने बताया कि उनका वेयरहाउस "श्री हरि" नाम से झिरपा में चल रहा है, जहां अनाज भंडारण का काम होता है। प्रभारी समिति प्रबंधक मुनीम प्रसाद पटेल (पुत्र बाबूलाल पटेल, 55 वर्ष) ने भंडारण को सुचारू रूप से चलाने और वेयरहाउस को ब्लैकलिस्ट में न डालने के बदले 59,000 रुपये की रिश्वत की मांग की। हरीश ने कहा, "मेरे पिता का छोटा व्यवसाय चल रहा है। पटेल ने दबाव बनाया कि पैसे न दिए तो लाइसेंस रद्द और ब्लैकलिस्टिंग।"
लोकायुक्त जबलपुर ने शिकायत मिलते ही सत्यापन शुरू किया। सत्यापन में पुष्टि हुई कि मुनीम प्रसाद पटेल ने हरीश से रिश्वत की मांग की। इसके बाद, 14 अक्टूबर 2025 को डीजी योगेश देशमुख के निर्देश पर ट्रैप दल गठित किया गया। दल का नेतृत्व निरीक्षक उमा कुशवाहा ने किया, जिसमें निरीक्षक रेखा प्रजापति, निरीक्षक जितेंद्र यादव और लोकायुक्त जबलपुर का पूरा दल शामिल था।
14 अक्टूबर का ऑपरेशन:
- स्थान: जिला सहकारी बैंक तामिया, छिंदवाड़ा (मुनीम प्रसाद पटेल का कार्यालय)।
- समय: दोपहर करीब 2:30 बजे।
- विवरण: हरीश राय को रिश्वत की राशि (59,000 रुपये) के साथ ट्रैप के लिए तैयार किया गया। नोटों पर विशेष रासायनिक पाउडर लगाया गया था। जैसे ही पटेल ने रिश्वत ली, लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। रासायनिक टेस्ट में उनके हाथों पर निशान पाए गए, जो रिश्वत लेने का पक्का सबूत था।
आरोपी को तत्काल हिरासत में लिया गया। तामिया थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं 7 (रिश्वत लेना), 13(1)बी (अवैध लाभ) और 13(2) (आपराधिक कृत्य) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। प्रारंभिक पूछताछ में पटेल ने रिश्वत लेने की बात स्वीकारी, लेकिन दावा किया कि यह "फीस" थी। लोकायुक्त ने उसके बैंक खातों, संपत्ति और पिछले रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है।
ट्रैप की टाइमलाइन: शिकायत से गिरफ्तारी तक का सफर , तारीख/समय,घटना
- 10 अक्टूबर 2025,"हरीश राय ने जबलपुर लोकायुक्त में शिकायत दर्ज की: वेयरहाउस ब्लैकलिस्ट से बचने के लिए 59,000 रुपये रिश्वत की मांग।"
- 11-13 अक्टूबर 2025,लोकायुक्त का सत्यापन; मांग की पुष्टि। डीजी योगेश देशमुख के निर्देश पर ट्रैप दल गठित।
- "14 अक्टूबर 2025, 2:30 PM","जिला सहकारी बैंक तामिया में मुनीम प्रसाद पटेल को 59,000 रुपये लेते रंगे हाथों पकड़ा।"
- "14 अक्टूबर 2025, शाम","धारा 7, 13(1)बी, 13(2) के तहत केस दर्ज; गिरफ्तारी और रिमांड। जांच शुरू।"
लोकायुक्त का भ्रष्टाचार पर प्रहार: डीजी योगेश देशमुख की सख्ती
पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख ने 2025 में भ्रष्टाचार के खिलाफ "जीरो टॉलरेंस" नीति अपनाई है। जबलपुर संभाग में यह तीसरी बड़ी ट्रैप है। इससे पहले, सितंबर 2025 में बालाघाट में एक पटवारी को 20,000 रुपये रिश्वत लेते पकड़ा गया था। अगस्त 2025 में सिवनी में एक तहसीलदार पर 1 लाख की कार्रवाई हुई। डीजी देशमुख ने कहा, "भ्रष्टाचार आदिवासी क्षेत्रों में ज्यादा है। सहकारिता जैसे विभागों में सख्ती जरूरी।" 2025 में लोकायुक्त ने 60 से अधिक ट्रैप किए, जिनमें 40 सरकारी कर्मचारी पकड़े गए।
निरीक्षक उमा कुशवाहा ने कहा, "हरीश की शिकायत पर तुरंत एक्शन लिया। यह आम जनता को संदेश है कि आवाज उठाओ, न्याय मिलेगा।" छिंदवाड़ा SP ने विभागीय जांच के आदेश दिए। यह कार्रवाई भोपाल में सहायक आबकारी आयुक्त आलोक खरे के आय से अधिक संपत्ति मामले के बाद और महत्वपूर्ण हो जाती है।
शिकायतकर्ता की कहानी: वेयरहाउस ब्लैकलिस्ट का डर
हरीश राय ने वन इंडिया हिंदी को बताया, "मेरा वेयरहाउस परिवार का सहारा है। पटेल ने कहा कि भंडारण अनियमित है, पैसे दो तो ठीक कर दूंगा। वरना ब्लैकलिस्ट।" झिरपा जैसे आदिवासी गांवों में सहकारिता समितियां महत्वपूर्ण हैं, लेकिन भ्रष्टाचार आम है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: विपक्ष का हमला, सरकार की सफाई
कांग्रेस ने इसे "मोहन यादव सरकार में भ्रष्टाचार का प्रमाण" बताया। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ट्वीट किया, "छिंदवाड़ा में सहकारिता प्रबंधक रिश्वतखोर? BJP सरकार में आदिवासी हित बेचे जा रहे। CBI जांच हो।" पूर्व CM कमलनाथ: "लोकायुक्त सक्रिय, लेकिन सिस्टम सुधार कब?" BJP ने कार्रवाई की सराहना की। छिंदवाड़ा विधायक ने कहा, "हमारी सरकार भ्रष्टाचार मुक्त। दोषी को सजा मिलेगी।" लेकिन विपक्ष ने सवाल उठाया: "सहकारिता विभाग में रिश्वत क्यों बढ़ रही?"












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