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Bhopal News: कोईनसाला IPO घोटाला, सायबर क्राइम भोपाल ने जोधपुर से तीन अंतर्राज्यीय आरोपियों को किया गिरफ्तार

Bhopal MP News: भोपाल साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान के जोधपुर से तीन ऐसे अंतरराज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार किया है जो 'कोईनसाला मीडिया प्रा. लि. ' नामक एक फर्जी क्रिप्टो कंपनी के नाम पर भोपाल निवासी एक युवक से 18.60 लाख रुपये की ठगी कर चुके थे।

गिरफ्तार आरोपियों में नरेंद्र (21), निम्बाराम (22) और चंदन मांझी (37) शामिल हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस कमिश्नर हरिनारायणाचारी मिश्र, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अनुराग शर्मा, अतिरिक्त उपायुक्त शैलेंद्र चौहान और सहायक पुलिस आयुक्त साइबर सुजीत तिवारी के मार्गदर्शन में हुई।

Koinsala IPO scam Cyber Crime Bhopal arrested three interstate accused from Jodhpur

कैसे फंसा जाल में फरियादी

यह मामला तब सामने आया जब भोपाल के अवधपुरी निवासी सुधीर सिंह (38) ने 20 अक्टूबर 2024 को सायबर क्राइम, कोहेफिजा में शिकायत दर्ज की। सुधीर ने बताया कि सितंबर 2024 में वह टेलीग्राम के जरिए कोईनसाला मीडिया (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी से जुड़े, जो क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन का दावा करती थी। शुरुआत में सुधीर ने 2,000, 5,000, और 8,000 रुपये का निवेश किया, जिसके बदले उन्हें कुछ ही दिनों में 20,000 रुपये का रिटर्न मिला। यह रिटर्न देखकर उनका भरोसा बढ़ा और वे कंपनी के जाल में फंसते चले गए।

आरोपियों ने सुधीर को टेलीग्राम पर एक विशेष ग्रुप में जोड़ा, जहां निवेश से जुड़ी गतिविधियां करवाई जाती थीं। इन गतिविधियों में 5,000, 30,000, और 1,20,000 रुपये का निवेश करने के बाद, जब सुधीर ने पैसे निकालने की कोशिश की, तो उन्हें 3.60 लाख रुपये की एक और "एक्टिविटी" में हिस्सा लेने को कहा गया। इधर-उधर से पैसे जुटाकर सुधीर ने यह राशि भी निवेश कर दी। लेकिन जब दोबारा निकासी की कोशिश की, तो 6.80 लाख रुपये की एक और एक्टिविटी में निवेश की मांग की गई।

कंपनी का ऐप डैशबोर्ड सुधीर को भारी रिटर्न दिखा रहा था, जिससे उनका भरोसा और पक्का हो गया। इस तरह विभिन्न किस्तों में कुल 18.60 लाख रुपये की ठगी की गई। शिकायत के बाद 8 फरवरी 2025 को धारा 318(4) और 319(2) भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

आरोपियों का तरीका, कॉलेज स्टूडेंट्स को बनाया निशाना

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी नरेंद्र ने अपने भाई के बंद हो चुके बंधन बैंक खाते को 10,000 रुपये में निम्बाराम को बेचा। निम्बाराम ने 50 से अधिक बैंक खाते फरार आरोपी बीराराम (परिवर्तित नाम) को सौंपे। ये लोग गरीब और कॉलेज स्टूडेंट्स को पैसे का लालच देकर उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर ऑनलाइन और ऑफलाइन बैंक खाते खुलवाते थे। साथ ही, सिम कार्ड भी इन्हीं के नाम पर लिए जाते थे।

खास बात यह है कि नेट बैंकिंग शुरू करने के लिए ये लोग अपने मोबाइल सिम के इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते थे। इसके बजाय, वाई-फाई डोंगल का उपयोग कर अपनी पहचान छिपाते थे, ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके। इसके बाद फरार आरोपी इन खातों में ठगी के पैसे डलवाने का काम करते थे। चंदन मांझी ने भी पैसे के लालच में अपना खाता खुलवाया, जिसमें ठगी के पैसे ट्रांसफर किए गए।

पुलिस की कार्रवाई: जब्त हुआ सामान

सायबर क्राइम भोपाल की टीम ने तकनीकी विश्लेषण और साक्ष्यों के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को जोधपुर से गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से 7 मोबाइल फोन, 2 वाई-फाई डोंगल, 5 चेकबुक, 62 एटीएम कार्ड, और 28 सिम कार्ड जब्त किए गए। पुलिस अभी अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है।

पुलिस टीम की मेहनत

इस ऑपरेशन में उप-निरीक्षक भरत प्रजापति, प्रआर प्रतीक उईके, प्रआर आदित्य साहू, आर. विकास, आर. अंकित सिंह, आर. अभिषेक चौधरी, आर. गुंजन शर्मा, आर. अशोक शर्मा, आर. सूरज पारा, और चालक सुमित समद की अहम भूमिका रही।

आरोपियों का विवरण

  1. नरेंद्र (21): बाड़मेर, राजस्थान। 12वीं पास। भाई का खाता बेचने में शामिल। कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं।
  2. निम्बाराम (22): बाड़मेर, राजस्थान। 12वीं पास। बैंक खाते इकट्ठा कर फरार आरोपी को सौंपता था। कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं।
  3. चंदन मांझी (37): गया, बिहार (वर्तमान पता: जोधपुर)। साक्षर। खाता धारक। कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं।

जनता के लिए सायबर क्राइम एडवायजरी

पुलिस ने जनता से सतर्क रहने की अपील की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे टेलीग्राम, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, और फेसबुक पर अज्ञात लोगों द्वारा दिए जाने वाले "हजारों रुपये कमाने" के लालच से सावधान रहें। ये लोग पहले छोटी राशि (50-100 रुपये) ट्रांसफर कर भरोसा जीतते हैं, फिर बड़े निवेश के लिए उकसाते हैं।

जरूरी सुझाव:

  1. सोशल मीडिया पर ज्यादा कमाई के झांसे में न आएं।
  2. यूट्यूब/इंस्टाग्राम सब्सक्राइब के बदले पैसे देने वाले ऑफर फर्जी होते हैं।
  3. ₹50-100 ट्रांसफर कर भरोसा जीतने की कोशिश की जाती है।
  4. किसी भी अनजान व्यक्ति से बैंक या KYC की जानकारी साझा न करें।
  5. OTP, PIN, पासवर्ड कभी किसी के साथ शेयर न करें।
  6. अनजाने लिंक पर क्लिक करके कोई ऐप न डाउनलोड करें।
  7. किसी संदिग्ध कॉल या स्कीम की जानकारी तुरंत 1930 या 9479990636 पर दें।
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