Bhopal News: कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने ऐसा क्यों कहा कि कुछ दिनों बाद भाजपा ठेला लगाकर गली-गली लगाएगी आवाजे
MP Congress News: मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष के.के.मिश्रा ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने वालों के खिलाफ तीखी टिप्पणी की है। मिश्रा ने कहा कि "दौलत के शौकीन लोग कभी वफादार नहीं हो सकते, ऐसे लोग दरअसल राजनैतिक वेश्याओं के ही समान होते हैं"।
मिश्रा ने कहा कि राजनीति में दो तरह के लोग होते हैं, एक वे जो पार्टी से भी बड़ी उसकी विचारधारा को समर्पित होते हैं, जिनकी पार्टी को भी जरूरत होती है। दूसरे वे जिन्हें पार्टी की जरूरत होती है,ताकि वे अपने राजनैतिक, पारिवारिक और आर्थिक हितों को साध सकें!

मिश्रा ने कहा कि आज वे ही लोग पार्टी और विचारधारा को छोड़ कर अंधेरी खाई में गिरने जा रहे हैं, उनका कल क्या हश्र होगा शायद वे अनभिज्ञ हैं ? उन्होंने यह भी कहा कि जो विचारधारा देश और अपनी ही पार्टी के नेताओं की नहीं हुई, वह ऐसे दलबदलुओं की क्या होगी?
मिश्रा ने उजागर किया कि भाजपा का ग्राफ अब धीरे-धीरे नीचे की ओर जा रहा है, और उन्हें इस बात का भय है। इसी कारण वह कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के मानसिक मनोबल कम करने के लिए ऐसे माइंड गेम खेल रही हैं। उन्होंने यह भी देखा कि भाजपा ने अपनी पार्टी में "न्यू ज्वाइनिंग विभाग" तक बना रखा है, और उन्हें नए शामिल होने वाले लोगों को बड़े पैमाने पर आमंत्रित करने की भी कड़ी की है।
मिश्रा ने एक हास्यपूर्ण नोट के साथ दावा किया कि यदि ऐसी ही स्थिति बनी रही तो भाजपा के नेता आने वाले दिनों में गली-गली में दुकान लगाकर लोगों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करेंगे।
मिश्रा ने दरबार और संघवी पर निशाना साधा
उन्होंने कहा कि इन लोगों का भाजपा में शामिल होना भारी अफसोसनाक है, और इससे केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि पूरी पार्टी को भी चोट पहुंचेगी। वे स्वयं भी वास्तविक पार्टी मिश्रा ने आज भाजपा में प्रवेश लेने वाले कांग्रेस से कई बार महू निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित हुए विधायक और इंदौर प्रीमियम कोऑपरेटिव बैंक के उपाध्यक्ष/अध्यक्ष रहे अंतरसिंह दरबार और कांग्रेस पार्टी के टिकट पर महापौर, विधायक व सांसद का चुनाव लड़ चुके पंकज संघवी पर भी जमकर हमला बोला। मिश्रा ने कहा कि दरबार को दरबार की हैसियत ही कांग्रेस ने दी, इन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी ने समझाइश भी दी किंतु उन्होंने श्री पटवारी को यह बताया कि उन्हें एक कैबिनेट मंत्री ने उक्त कोऑपरेटि बैंक का अध्यक्ष बनाने का वायदा किया है, मेरी उम्र 72 साल है,अगले 5 सालों में 77 साल का हो जाऊंगा! शायद यही उनकी भाजपा के प्रति निष्ठा होगी?
दूसरी ओर संघवी तो कभी दिल से कांग्रेसी रहे ही नहीं, उनका पूरा परिवार भू-माफिया रहा है, भूमि संबंधित मामलों में अभी भी सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर है, उन्होंने हर चुनाव में कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी का सेबोटेज कर भाजपा को लाभ पंहुचाया है, संभवत: ये जब-जब कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लडे तभी इन्होंने और इनके परिवार ने कांग्रेस को वोट दिया होगा? इन्होंने खुद ही स्वीकारा है कि मेरे स्व पिता जयंतीलाल संघवी आरएसएस के संस्थापकों में रहे हैं, ऐसी स्थिति में क्या ये वास्तविक कांग्रेसी हो सकते हैं ? ऐसे लोगों को कांग्रेस में शामिल करना ही हमारी पार्टी की बड़ी और अक्षम्य भूल थी, जिसके लिए मैं स्वयं भी वास्तविक पार्टीजनों से क्षमाप्रार्थी हूं।












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