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MP News: खरगोन कलेक्टर IAS भव्या मित्तल के नाम से अफसरों को भेजे फर्जी WhatsApp MSG, जानिए कैसे हुआ खुलासा

मध्य प्रदेश में साइबर अपराधियों के हौसले अब सरकारी तंत्र को ही निशाना बनाने लगे हैं। खरगोन जिले की कलेक्टर आईएएस भव्या मित्तल के नाम से एक फर्जी WhatsApp अकाउंट बनाकर कई अधिकारियों को धमकी भरे मैसेज भेजे गए, जिसमें पैसे मांगने का मामला सामने आया है।

कलेक्टर मित्तल ने खुद इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि आधा दर्जन से अधिक अधिकारियों को उनके नाम, फोटो और डिस्प्ले पिक्चर (DP) के साथ मैसेज मिले। जांच में पता चला कि नंबर वियतनाम से संचालित है। यह घटना न केवल जिला प्रशासन को हिलाकर रख गई है, बल्कि पूरे राज्य में साइबर सतर्कता की घंटी बजा रही है। आइए, इस सनसनीखेज मामले की पूरी परतें खोलते हैं।

Khargone Collector Bhavya Mittal IAS sent fake WhatsApp messages to officers major revelation

घटना का पूरा ब्यौरा: फर्जी अकाउंट से अफसरों पर निशाना

26 अक्टूबर 2025 की शाम को खरगोन जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों के फोन पर एक अजीबोगरीब WhatsApp मैसेज आया। मैसेज कलेक्टर भव्या मित्तल के नाम से था, जिसमें उनकी आधिकारिक फोटो DP पर लगी हुई थी। संदेश में लिखा था, "मुझे तुरंत आर्थिक मदद चाहिए, अन्यथा कार्रवाई होगी।" कुछ मैसेजों में तो आपातकालीन बैठक का बहाना बनाकर UPI लिंक शेयर किया गया था। प्राप्तकर्ताओं में एसडीएम, तहसीलदार और अन्य जिला अधिकारी शामिल थे।

कलेक्टर मित्तल ने एक प्रेस रिलीज में कहा, "मुझे व्यक्तिगत रूप से आधा दर्जन से ज्यादा अफसरों ने फोन किया। वे घबरा गए थे, क्योंकि मैसेज बिल्कुल असली लग रहा था। मैंने तुरंत सभी को सतर्क किया और साइबर सेल को सूचना दी।" एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "मैसेज रात 8 बजे आया। कलेक्टर मैम की DP देखकर मैंने सोचा शायद कोई आधिकारिक जरूरत है। लेकिन पैसे मांगने पर शक हुआ।" गनीमत रही कि किसी ने पैसे ट्रांसफर नहीं किए, लेकिन यह घटना प्रशासनिक भरोसे को हिला गई।

जांच में खुलासा हुआ कि फर्जी नंबर वियतनाम (+84 कोड) से रजिस्टर्ड है। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, यह इंटरनेशनल साइबर गैंग का काम लगता है, जो डार्क वेब पर अफसरों की प्रोफाइल खरीदकर इस्तेमाल करते हैं। खरगोन पुलिस ने तुरंत WhatsApp को शिकायत भेजी, जिसके बाद नंबर ब्लॉक हो गया।

साइबर ठगों की तिकड़म: कैसे बनाते हैं फर्जी अकाउंट?

  • फोटो चोरी: कलेक्टर मित्तल की आधिकारिक वेबसाइट या सोशल मीडिया से फोटो ली।
  • नंबर स्पूफिंग: वॉयस ओवर IP (VoIP) टूल से वियतनाम नंबर बनाया, जो भारत में लोकल लगे।
  • संदेश का लालच: "आपातकालीन मदद" या "गोपनीय मीटिंग" का बहाना।
  • UPI ट्रैप: लिंक क्लिक करने पर वायरस या डायरेक्ट ट्रांसफर।

मध्य प्रदेश पुलिस के साइबर विंग के अनुसार, 2025 में राज्य में साइबर फ्रॉड के 45% केस इम्पर्सनेशन (नकली पहचान) से जुड़े हैं, जिनसे 150 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। दमोह जिले में हाल ही में कलेक्टर सुधीर कोचर के नाम से फर्जी अकाउंट बनाकर ठगी की कोशिश हुई, जो साइबर सेल ने नाकाम कर दी।

कलेक्टर भव्या मित्तल की प्रतिक्रिया: सतर्कता का संदेश

आईएएस भव्या मित्तल, जो 2023 बैच की अधिकारी हैं और खरगोन में जून 2025 से पदस्थ हैं, ने तुरंत जिला स्तर पर अलर्ट जारी किया। उन्होंने कहा, "यह साइबर अपराध का नया रूप है। सभी अफसरों को निर्देश दिया है कि किसी भी संदिग्ध मैसेज पर तुरंत सत्यापन करें। हमने जिला वेबसाइट पर हेल्पलाइन नंबर डाला है।" मित्तल ने अफसरों को व्हाट्सएप सिक्योरिटी सेटिंग्स चेक करने की सलाह दी, जैसे टू-स्टेप वेरिफिकेशन।

खरगोन कलेक्टर ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में जोर दिया, "प्रशासनिक पद की वजह से हम टारगेट बनते हैं। लेकिन जागरूकता से ही हम बच सकते हैं।" यह घटना उनके नेतृत्व में चल रहे डिजिटल इंडिया अभियान को मजबूत बनाने का अवसर भी बनेगी।

पुलिस की कार्रवाई: इंटरनेशनल जांच, लेकिन चुनौतियां बाकी

खरगोन एसपी ने तुरंत साइबर सेल को केस सौंपा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "वियतनाम नंबर होने से इंटरपोल के जरिए जांच हो रही है। CCTV और मोबाइल डेटा ट्रैक कर रहे हैं।" मध्य प्रदेश पुलिस ने राज्यव्यापी अलर्ट जारी किया, जिसमें कहा गया है: "किसी भी सरकारी अधिकारी के नाम से पैसे मांगने वाले मैसेज पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन कॉल करें।"

हालांकि, चुनौतियां हैं। वियतनाम जैसे देशों से संचालित गैंग्स को पकड़ना मुश्किल, क्योंकि वे VPN और प्रॉक्सी यूज करते हैं। NCRB के 2024 आंकड़ों के अनुसार, MP में साइबर क्राइम 30% बढ़ा, जिनमें 20% इंटरनेशनल।

2025 में नुकसान: 150 करोड़ रुपये से अधिक।

  • इम्पर्सनेशन केस: 45% कुल फ्रॉड।
  • हालिया घटनाएं: दमोह में कलेक्टर कोचर का फर्जी अकाउंट (24 अक्टूबर), इंदौर में वैज्ञानिक से 71 लाख की ठगी (डिजिटल अरेस्ट)।
  • ट्रेंड: दिवाली जैसे त्योहारों में 25% इजाफा, क्योंकि लोग घर से दूर होते हैं।

विशेषज्ञ डॉ. राजेश शर्मा, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट, ने कहा, "व्हाट्सएप अब ठगों का पसंदीदा प्लेटफॉर्म है। सरकारी अफसरों को टारगेट करने से डर फैलता है।"

बचाव के टिप्स: साइबर ठगों से कैसे निपटें?

  • सत्यापन: किसी अफसर का मैसेज आए तो आधिकारिक नंबर से कॉल कर चेक करें।
  • सिक्योरिटी: व्हाट्सएप पर प्राइवेसी सेटिंग्स स्ट्रॉन्ग रखें, अनजान नंबर ब्लॉक करें।
  • रिपोर्ट: तुरंत 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत।
  • जागरूकता: परिवार और सहकर्मियों को अलर्ट रखें।
  • टूल्स: ऐप्स जैसे Truecaller यूज करें।

जागरूकता ही हथियार, सिस्टम को मजबूत बनाएं

यह घटना MP के साइबर इकोसिस्टम की कमजोरी उजागर करती है। कलेक्टर मित्तल जैसे अधिकारी टारगेट बन रहे हैं, तो आम नागरिकों का क्या हाल होगा? सरकार को साइबर फॉरेंसिक लैब्स बढ़ानी होंगी और जागरूकता कैंपेन चलाने पड़ेंगे। फिलहाल, खरगोन प्रशासन ने सतर्कता बरती, लेकिन अगली बार देरी न हो। साइबर दुनिया में भरोसा टूटना आसान है, लेकिन जागरूकता से ही इसे जोड़ा जा सकता है।

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