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खंडवा में शर्मनाक घटना: CHO ने आदिवासी महिला को खेत में घसीट-घसीटकर पीटा, वीडियो वायरल

MP News khandwa: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से सामने आई यह घटना न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ एक जिम्मेदार अधिकारी के आचरण को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।

पंधाना थाना क्षेत्र के टाकली कला गांव में गुरुवार को बैडियावं में पदस्थ कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) मनीषा वासुले द्वारा एक आदिवासी महिला के साथ की गई बेरहमी अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई है। खेत में हुई इस मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।

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घटना के अनुसार, टाकली कला गांव में ठाकुर रूस्तम, पिंकी बाई और कुंवर सिंह अपने खेत में काम कर रहे थे। महिलाएं भी खेत में फसल की देखरेख में लगी हुई थीं। इसी दौरान CHO मनीषा वासुले कुछ लोगों को अपने साथ लेकर खेत पर पहुंचीं। आते ही जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद शुरू हो गया। CHO मनीषा वासुले ने दावा किया कि यह जमीन उन्होंने खरीदी है, जबकि पिंकी बाई का कहना था कि यह उनकी पुश्तैनी जमीन है, जिस पर वे लंबे समय से खेती कर रही हैं और इसके लिए उन्होंने करीब 8 लाख रुपए भी खर्च किए हैं।

देखते ही देखते जमीन का विवाद हाथापाई में बदल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पहले दोनों महिलाओं के बीच कहासुनी हुई, फिर बाल खींचने और धक्का-मुक्की का सिलसिला शुरू हो गया। आरोप है कि CHO मनीषा वासुले ने पिंकी बाई को जोर से धक्का दिया, जिससे वह जमीन पर गिर गई। इसके बाद उसे बाल पकड़कर घसीटा गया और बेरहमी से पीटा गया। मारपीट इतनी गंभीर थी कि पिंकी बाई खेत में ही बेहोश हो गई।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि CHO के साथ आए लोगों ने खेत में खड़ी फसल को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की और दवाइयों का छिड़काव कर फसल बर्बाद करने का प्रयास किया। जब महिलाओं ने इसका विरोध किया, तो उनके साथ भी मारपीट की गई। इस पूरे घटनाक्रम का किसी ग्रामीण ने वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह एक सरकारी पद पर तैनात महिला अधिकारी एक आदिवासी महिला के साथ हिंसक व्यवहार कर रही है।

घटना के बाद गांव में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों और आदिवासी संगठनों ने CHO मनीषा वासुले के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि एक सरकारी अधिकारी ही इस तरह कानून हाथ में लेगी, तो आम लोगों को न्याय कैसे मिलेगा। वहीं, पीड़िता पिंकी बाई के परिजनों ने आरोप लगाया है कि यह जमीन विवाद लंबे समय से चला आ रहा है और CHO अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर दबाव बना रही थीं।

पंधाना थाना पुलिस का कहना है कि वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, जमीन के दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विवाद की असली जड़ क्या है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी मामले को गंभीर बताया है और आंतरिक जांच की बात कही है।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रशासनिक पदों पर बैठे लोग कानून से ऊपर हैं। आदिवासी महिला के साथ हुई इस बर्बरता ने न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोर दिया है, बल्कि शासन-प्रशासन की जवाबदेही पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना होगा कि पुलिस और सरकार इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करती है।

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