मध्य प्रदेश भाजपा में आसान नहीं होगी सिंधिया की राह, जानें क्या कहते हैं जानकार?
भोपाल। मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार गंभीर संकट में घिर गई है। कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने होली के दिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और पार्टी से इस्तीफा दे दिया। अब ऐसा माना जा रहा है कि सिंधिया जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, बीजेपी में उनकी राह आसान नहीं होगी। बता दें, ज्योतिरादित्य ने 9 मार्च को ही यह इस्तीफा दे दिया था और आज उन्होंने इसका ऐलान किया है।

ज्योतिरादित्य के इस्तीफे की वजह
मध्य प्रदेश में जारी सियासी उठा-पटक के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। सिंधिया ने अपना इस्तीफा कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंप दिया है। ज्योतिरादित्य ने करीब 18 साल तक कांग्रेस पार्टी में शामिल रहने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा, मैं कांग्रेस में रहते हुए लोगों की सेवा नहीं कर पा रहा था। सिंधिया ने कहा कि मैं कार्यकर्ताओं की आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर पा रहा था, इसलिए अब नई शुरुआत करने जा रहा हूं।

मध्य प्रदेश भाजपा में आसान नहीं सिंधिया की राह
ज्योतिरादित्य के इस्तीफे के बाद ही ऐसी चर्चा शुरू हो गई है कि वह बीजेपी में शामिल होंगे। सिंधिया को भाजपा की ओर से राज्यसभा का टिकट और क्रेंद में मंत्री भी बनाया जा सकता है। सिंधिया बुधवार को राज्यसभा के लिए नामांकन करेंगे। हालांकि, सूत्रों का यह भी कहना है कि सिंधिया को राज्य में डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि मध्य प्रदेश बीजेपी में सिंधिया की राह आसान नहीं होने जा रही है। ज्योतिरादित्य बीजेपी में शामिल होकर अपनी पहचान खो सकते हैं। उन्हें अपनी बुआ यशोधरा राजे सिंधिया की तरह से बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की बात माननी होगी। ज्योतिरादित्य के ग्वालियर क्षेत्र के 18 विधायक हैं और ये सभी विधायक बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़कर जीते हैं। अब आगामी चुनाव में बीजेपी को इन सिंधिया समर्थक विधायकों को टिकट देना होगा जो आसान नहीं होने जा रहा है।

मध्य प्रदेश भाजपा में सिंधिया के कई विरोधी
विश्लेषकों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य को कोई अहम जिम्मेदारी मिलने की संभावना बेहद कम है। ऐसे में सिंधिया के लिए केंद्र सरकार में मंत्री पद और राज्यसभा सदस्यता लेना ही सबसे अच्छा विकल्प होगा। उनके समर्थकों को मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार में मंत्री पद दिया जा सकता है। विश्लेषकों की मानें तो ज्योतिरादित्य की बुआ यशोधरा राजे सिंधिया शिवपुरी से विधायक हैं, लेकिन पार्टी में उनकी खास अहमियत नहीं है। बता दें, ग्वालियर क्षेत्र भाजपा के नेता नरेंद्र तोमर, अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा, बीडी शर्मा, जयभान सिंह पवैया, अरविंद भदौरिया, नरोत्तम मिश्रा सिंधिया के विरोधी माने जाते हैं। ऐसे में मध्य प्रदेश भाजपा में सिंधिया के लंबे समय तक चलने पर संदेह है।












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