MP News: चिंटू चौकसे के बयान पर पटवारी की चुप्पी, BJP सांसद आलोक शर्मा का तंज– दिग्विजय सिंह को दी ये सलाह
Bhopal MP news: मध्य प्रदेश कांग्रेस में आंतरिक कलह का नया दौर शुरू हो गया है। इंदौर के शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे के एक बयान ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के दौरे को लेकर हलचल मचा दी है। रविवार को इंदौर में दिग्विजय सिंह के दौरे पर आयोजित जिला स्तरीय समन्वय बैठक में चौकसे ने बिना नाम लिए कहा कि 'बाहरी नेता बिना सूचना के आकर आयोजन कर लेते हैं, ऐसा नहीं चलेगा'। इस बयान को दिग्विजय पर तंज माना जा रहा है।
अब पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने चुप्पी साध ली है, जबकि भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने पटवारी को 'मास्टरमाइंड' ठहराते हुए दिग्विजय को 'हिमालय चले जाने' की नसीहत सुना दी। यह विवाद न केवल कांग्रेस की गुटबाजी को उजागर कर रहा है, बल्कि आगामी संगठनात्मक चुनावों से पहले पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है।

विवाद की शुरुआत: इंदौर बैठक में चिंटू चौकसे का 'तंज भरा बयान'
सब कुछ शुरू हुआ रविवार, 29 सितंबर 2025 को इंदौर के गांधी भवन में। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के हालिया दौरे पर समन्वय समिति की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने मंच से खुलकर कहा, "इंदौर में कोई बड़ा नेता आए, छोटा नेता आए और उसे किसी इश्यू पर चर्चा करना है, इंदौर में किसी विषय पर स्टैंड लेना है, किस पर नहीं लेना है - यह पहले से तय होना चाहिए। कोई भी नेता आए और बोले कि मैं यहां जाऊंगा, वहां जाऊंगा, मैं ऐसा करूंगा, मैं वैसा करूंगा। ऐसा नहीं चलेगा।" हालांकि उन्होंने दिग्विजय सिंह का नाम नहीं लिया, लेकिन बैठक में मौजूद नेताओं ने इसे स्पष्ट तंज माना। दिग्विजय सिंह का इंदौर दौरा हाल ही में हुआ था, जहां उन्होंने स्थानीय मुद्दों पर बिना जिला नेतृत्व से पूर्वानुमति के कार्यक्रम किए थे।
पटवारी की चुप्पी: सवाल पर मुंह मोड़ लिया, भोपाल में कार्यक्रम से रवाना
मंगलवार, 1 अक्टूबर 2025 को भोपाल पहुंचे पीसीसी चीफ जीतू पटवारी से जब पत्रकारों ने चौकसे के बयान पर सवाल किया, तो उन्होंने पूरा सवाल सुनने के बाद चेहरा दूसरी ओर मोड़ लिया। बिना एक शब्द कहे वे प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से रवाना हो गए, जहां वे महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। पटवारी की यह चुप्पी पार्टी में हलचल मचा रही है। सूत्रों के मुताबिक, पटवारी चौकसे के करीबी हैं, और इंदौर में चौकसे को शहर अध्यक्ष बनवाने में उनकी भूमिका रही। क्या यह चुप्पी समर्थन का संकेत है, या आंतरिक दबाव?
पटवारी के एक करीबी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "चौकसे ने सही कहा। दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेता भी स्थानीय नेतृत्व का सम्मान करें। पटवारी जी अनुशासन पर जोर देते हैं।" लेकिन दिग्विजय समर्थक इसे 'गुटबाजी का प्रमाण' बता रहे हैं।
आलोक शर्मा का तीखा तंज: पटवारी मास्टरमाइंड, दिग्विजय का अपमान
विवाद को हवा देने वाले भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने बुधवार को मीडिया से कहा, "कांग्रेस के जिला अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने जिस प्रकार से बयान दिया है, वो कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह का अपमान है। इस स्टेटमेंट के पीछे का मास्टरमाइंड और ब्रेन जीतू पटवारी हैं।" शर्मा ने पटवारी पर सीधा निशाना साधा, "जीतू पटवारी प्रदेश अध्यक्ष हैं, वो अपने पठ्ठे को जिला अध्यक्ष बनवाते हैं। कोई बात सामने से न कहकर पीछे से दिग्विजय सिंह के ऊपर इस प्रकार से हमला कराना। ये कहीं न कहीं दिग्विजय सिंह का अपमान है।"
शर्मा ने दिग्विजय को नसीहत देते हुए कहा, "मुझे लगता है कि दिग्विजय सिंह को भी आत्मचिंतन करना चाहिए। उन्हीं की पार्टी के लोग उनका अपमान कर रहे हैं। हमारे यहां तो वरिष्ठ नेता कहीं जाते हैं तो जिला अध्यक्ष पूछते हैं कि आप कितने बजे आ रहे हैं, कितने बजे कहां जा रहे हैं - हम आपको लेने आ जाएं? कांग्रेस में तो ठीक इसके विपरीत हो रहा है। दिग्विजय सिंह को आत्मचिंतन करना चाहिए। उन्हें संन्यास लेकर हिमालय की कंदराओं में जाना चाहिए और कांग्रेस की दुर्दशा पर विचार करना चाहिए।"
कांग्रेस की गुटबाजी: इंदौर से भोपाल तक फैला विवाद
मध्य प्रदेश कांग्रेस लंबे समय से गुटों में बंटी हुई है - एक ओर दिग्विजय सिंह-कमलनाथ गुट, दूसरी ओर जीतू पटवारी जैसे युवा चेहरे। इंदौर, जो पटवारी का गढ़ है, में यह विवाद और गहरा गया। अगस्त 2025 में जिला अध्यक्षों की घोषणा के बाद इंदौर में ही बड़े पैमाने पर इस्तीफे हुए थे। चिंटू चौकसे को शहर अध्यक्ष बनाए जाने पर विपक्षी गुट ने विरोध प्रदर्शन किया था। सितंबर में पटवारी को सीएम बनाने के नारे लगे, जो दिग्विजय समर्थकों को खल गया।
विपक्ष ने इसे 'कांग्रेस का अंतर्कलह' बताते हुए कहा कि पार्टी 2028 चुनाव से पहले ही बिखर रही है। कांग्रेस प्रवक्ता रविकांत चौधरी ने बचाव किया, "यह आंतरिक चर्चा है। पटवारी जी अनुशासन बनाए रखेंगे।" लेकिन दिग्विजय सिंह ने अभी तक चुप्पी साधी है।












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