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Bhopal News: जवाहरलाल नेहरू सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शर्मनाक घटना, PT टीचर ने छात्र को बेरहमी से पीटा

MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू सीनियर सेकेंडरी स्कूल (JNSSS), भेल में एक दिल दहलाने वाली घटना ने स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कक्षा नौवीं के छात्र ऋषि सिंह को पीटी टीचर सुनील शुक्ला और प्रिंसिपल सुनील पाठक द्वारा कथित तौर पर इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उसके गाल की चमड़ी उधड़ गई और उसे गंभीर चोटें आईं।

इस घटना ने न केवल परिजनों, बल्कि स्थानीय समुदाय और सोशल मीडिया पर व्यापक आक्रोश पैदा किया है। परिजनों ने गोविंदपुरा थाने में शिकायत दर्ज की है और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) तथा मध्य प्रदेश बाल संरक्षण आयोग से कार्रवाई की मांग की है। यह पहली बार नहीं है जब पीटी टीचर सुनील शुक्ला पर इस तरह के आरोप लगे हैं, जिससे स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।

Incident at Jawaharlal Nehru Senior Secondary School PT teacher slapped student

घटना का विवरण: क्या हुआ जवाहरलाल नेहरू स्कूल में?

घटना मंगलवार, 1 जुलाई 2025 की सुबह की है, जब जवाहरलाल नेहरू सीनियर सेकेंडरी स्कूल, भेल के परिसर में कक्षा नौवीं के दो छात्र समूहों के बीच मामूली विवाद हो गया। इस विवाद को सुलझाने के लिए कक्षा की शिक्षिका जस्सी ने नौवीं कक्षा के छात्र ऋषि सिंह को मध्यस्थता के लिए भेजा। ऋषि, जो एक जिम्मेदार और शांत स्वभाव का छात्र बताया जाता है, ने दोनों समूहों के बीच सुलह कराने की कोशिश की।

इसी दौरान, वहां से गुजर रहे पीटी टीचर सुनील शुक्ला ने बिना स्थिति को समझे या कोई सवाल पूछे ऋषि को दोषी मान लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुनील शुक्ला ने ऋषि को घुटनों पर बैठने का आदेश दिया और उसके बाल खींचकर 10-12 तमाचे जड़ दिए। यह सब स्कूल के खेल मैदान के पास हुआ, जहां अन्य छात्र भी मौजूद थे, जिससे ऋषि को सार्वजनिक रूप से अपमानित होना पड़ा।

मामला यहीं नहीं रुका। सुनील शुक्ला ने ऋषि को प्रिंसिपल सुनील पाठक के कार्यालय में ले गए। परिजनों और छात्र के बयान के अनुसार, प्रिंसिपल ने अपने कार्यालय में ऋषि को कैमरे की ओर इशारा करते हुए और अधिक बेरहमी से पीटा। प्रिंसिपल ने कथित तौर पर डंडे और हाथों से ऋषि पर प्रहार किए, जिससे उसके गाल की चमड़ी उधड़ गई और शरीर पर कई जगह गंभीर चोटें आईं। जब ऋषि के बड़े भाई, जो स्कूल में ही कक्षा 11वीं का छात्र है, ने प्रिंसिपल को रोकने की कोशिश की, तो उसे भी मारपीट का शिकार होना पड़ा।

छात्र की हालत और मेडिकल जांच

स्कूल की छुट्टी होने के बाद, ऋषि घर पहुंचा और रोते हुए अपने माता-पिता को पूरी घटना बताई। उसने सिर और गर्दन में तेज दर्द की शिकायत की। परिजनों ने उसके शरीर पर गहरे जख्म, खासकर गाल पर चमड़ी उधड़ने और पैरों पर लाल निशान देखे। हालत बिगड़ने पर उसे तुरंत भोपाल के जय प्रकाश नारायण (जेपी) अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका मेडिकल परीक्षण किया गया। मेडिकल रिपोर्ट में गाल पर गंभीर चोट, सिर और गर्दन में आंतरिक चोटें, और शरीर पर कई जगह खरोंच और निशान दर्ज किए गए। डॉक्टरों ने बताया कि ऋषि को शारीरिक और मानसिक आघात पहुंचा है, जिसके लिए उसे कुछ दिनों तक निगरानी में रखना होगा।

परिजनों का आक्रोश और गोविंदपुरा थाने में शिकायत

ऋषि के पिता अनिल सिंह, जो एक स्थानीय व्यवसायी हैं, ने अपने बेटे की हालत देखकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने मंगलवार शाम को गोविंदपुरा थाने में पीटी टीचर सुनील शुक्ला और प्रिंसिपल सुनील पाठक के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज की। शिकायत में मेडिकल रिपोर्ट को आधार बनाया गया, जिसमें चोटों की गंभीरता को स्पष्ट किया गया है। अनिल सिंह ने कहा, "मेरा बेटा सिर्फ सुलह कराने गया था, उसका कोई कसूर नहीं था। फिर भी उसे इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उसका चेहरा और शरीर जख्मों से भर गया। यह किसी भी स्कूल के लिए शर्मनाक है।"

गोविंदपुरा थाना प्रभारी (टीआई) ने पुष्टि की कि शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। टीआई ने बताया कि पीटी टीचर सुनील शुक्ला को मौखिक रूप से फटकार लगाई गई है, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक FIR दर्ज नहीं की गई है। पुलिस ने स्कूल प्रबंधन से जवाब मांगा है और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।

स्कूल प्रबंधन की प्रतिक्रिया और माफी

हादसे के बाद बुधवार (2 जुलाई 2025) को प्रिंसिपल सुनील पाठक ने परिजनों से मुलाकात की और लिखित रूप से माफी मांगी। प्रबंधन ने दावा किया कि यह एक "गलतफहमी" थी और भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी। हालांकि, परिजनों ने माफी को अपर्याप्त बताया और कहा कि वे इस मामले को जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और मध्य प्रदेश बाल संरक्षण आयोग तक ले जाएंगे ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और भविष्य में अन्य बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार न हो।

अनिल सिंह ने कहा, "यह सिर्फ मेरे बेटे की बात नहीं है। सुनील शुक्ला पहले भी कई बच्चों को पीट चुके हैं, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने कभी कार्रवाई नहीं की। हम चाहते हैं कि इस तरह के शिक्षकों को स्कूल से हटाया जाए और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।"

सुनील शुक्ला पर पहले भी आरोप

यह पहला मामला नहीं है जब पीटी टीचर सुनील शुक्ला पर मारपीट के आरोप लगे हैं। स्कूल के कुछ पूर्व छात्रों और परिजनों ने बताया कि सुनील शुक्ला का व्यवहार अक्सर आक्रामक रहता है। 2023 में एक कक्षा आठवीं के छात्र ने आरोप लगाया था कि सुनील ने उसे मामूली शरारत के लिए डंडे से पीटा था, जिसके बाद परिजनों ने स्कूल में शिकायत की थी। हालांकि, उस समय मामला थाने तक नहीं पहुंचा, और स्कूल प्रबंधन ने इसे आंतरिक रूप से सुलझाने का दावा किया था। स्थानीय निवासियों और अभिभावकों ने मांग की है कि सुनील शुक्ला को निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो।

कानूनी प्रावधान और संभावित कार्रवाई

भारतीय दंड संहिता (IPC) और जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) एक्ट, 2015 के तहत बच्चों के साथ मारपीट या शारीरिक प्रताड़ना एक गंभीर अपराध है। इस मामले में निम्नलिखित धाराएं लागू हो सकती हैं:

  • IPC धारा 323: स्वेच्छा से चोट पहुंचाना, जिसमें 1 वर्ष तक की सजा और/या जुर्माना हो सकता है।
  • IPC धारा 325: गंभीर चोट पहुंचाना, जिसमें 7 वर्ष तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।
  • जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, धारा 75: बच्चों के साथ क्रूरता, जिसमें 3 वर्ष तक की सजा और जुर्माना शामिल है।
  • RTE एक्ट, 2009: शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत स्कूलों में शारीरिक दंड निषिद्ध है, और उल्लंघन पर स्कूल प्रबंधन पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) नरेंद्र अहिरवार ने बताया कि परिजनों की शिकायत प्राप्त हुई है, और एक जांच समिति गठित की जाएगी। समिति स्कूल में जाकर छात्रों, शिक्षकों, और प्रबंधन के बयान दर्ज करेगी। DEO ने कहा, "ऐसी घटनाएं अस्वीकार्य हैं। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।" मध्य प्रदेश बाल संरक्षण आयोग ने भी इस मामले का स्वत: संज्ञान लेने का संकेत दिया है।

स्कूल प्रबंधन और भेल की भूमिका

जवाहरलाल नेहरू सीनियर सेकेंडरी स्कूल, भेल भोपाल का एक प्रतिष्ठित स्कूल है, जो भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) द्वारा संचालित है। यह स्कूल अपनी शैक्षिक गुणवत्ता और अनुशासन के लिए जाना जाता है, लेकिन इस घटना ने इसकी छवि को धक्का पहुंचाया है। अभिभावकों ने सवाल उठाया कि इतने बड़े संस्थान में बच्चों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त उपाय क्यों नहीं हैं। कुछ अभिभावकों ने बताया कि स्कूल में सीसीटीवी कैमरे मौजूद हैं, लेकिन उनकी कार्यक्षमता और निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।

सामाजिक और शैक्षिक प्रभाव

यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत मामला है, बल्कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों की जवाबदेही के व्यापक मुद्दे को उजागर करती है। मध्य प्रदेश में हाल के वर्षों में स्कूलों में मारपीट की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें ग्वालियर, भिंड, और छतरपुर के मामले शामिल हैं। ये घटनाएं शिक्षा के मंदिरों में अनुशासन के नाम पर बच्चों के साथ होने वाली क्रूरता को दर्शाती हैं।

  • ऋषि सिंह के साथ हुई इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं:
  • स्कूलों में शिक्षकों को बच्चों के साथ व्यवहार के लिए प्रशिक्षण क्यों नहीं दिया जाता?
  • अनुशासन के नाम पर शारीरिक दंड को क्यों बर्दाश्त किया जा रहा है?
  • स्कूल प्रबंधन और प्रशासन ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं?

सुझाव और समाधान

  • इस घटना को रोकने और भविष्य में ऐसी त्रासदियों से बचने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
  • शिक्षकों का प्रशिक्षण: शिक्षकों को बच्चों के साथ व्यवहार, तनाव प्रबंधन, और गैर-हिंसक अनुशासन तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया जाए।
  • सीसीटीवी निगरानी: स्कूल परिसर में कार्यरत सीसीटीवी कैमरों की नियमित जांच हो, और फुटेज को जांच के लिए संरक्षित रखा जाए।
  • शिकायत निवारण तंत्र: प्रत्येक स्कूल में एक स्वतंत्र शिकायत निवारण समिति हो, जिसमें अभिभावक और छात्र प्रतिनिधि शामिल हों।
  • कानूनी कार्रवाई: दोषी शिक्षकों और प्रबंधन के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई हो, ताकि अन्य के लिए नजीर बने।
  • जागरूकता अभियान: अभिभावकों और छात्रों को उनके अधिकारों, खासकर RTE एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, के बारे में जागरूक किया जाए।
  • मनोवैज्ञानिक सहायता: पीड़ित छात्रों को मानसिक आघात से उबरने के लिए काउंसलिंग और सहायता प्रदान की जाए।
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