सैकड़ों ग्रामीण डिब्बा-बाल्टी लेकर पहुंचे एसडीएम कार्यालय, लगाई गुहार हम प्यासे हैं कोई हमें पानी पिला दो

सतना, 9 जून: जिले के मिचकुरिन गांव से पेयजल की किल्लत एक बार फिर सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी में फिर से पेयजल संकट सामने आन खड़ा है कई बार जिम्मेदारों से पेयजल की व्यवस्था कराएं जाने की गुहार लगाई गई लेकिन उनकी समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। वहीं ग्रामीणों ने मझगवां तहसील मुख्यालय पहुंच कर ज्ञापन सौंपते हुए समस्या से निजात दिलाए जाने की गुहार लगाई है। दरअसल पूरा मामला सतना जिले की मझगवां तहसील के मिचकुरिन गांव का है यहां पानी की बड़ी किल्लत है। अपनी समस्या को बयां करने पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि आदिवासी बाहुल्य गांवों में जल संकट हमेशा बना रहता है इस गांव में बरसात के 4 महीने को छोड़कर पूरे साल भर पानी की एक-एक बूंद को तरसना पड़ता है। लेकिन बार-बार गुहार लगाए जाने के बाद भी जिम्मेदार भी पेयजल संकट की सुध नही ले रहे हैं। पीएचई विभाग द्वारा आदिवासी बस्ती में पाइप लाइन डालकर जलापूर्ति करने का दावा किया था। लेकिन घर घर नल की टोटी तो लगाई गई लेकिन जल की आपूर्ति शून्य ही रही। गांव के बाहर से एक नल की टोटी से पानी आता है वह भी हफ्ते में एक या दो बार ही पानी आता है । जिसके चलते लोग सुबह 4 बजे से ही लाइन लगाकर पानी के इंतजार में बैठ जाते हैं। कई बार तो घंटों बैठने के बाद भी उनको पानी नसीब नही हो पाता। साथ ही ग्रामीणों ने बताया कि कई बार इस समस्या को लेकर तहसील से लेकर जिले तक के अधिकारियों को अवगत कराया गया। जिसके बाद नल जल योजना के तहत पाइप लाइन तो डाली गई लेकिन जलापूर्ति नहीं हो सकी और समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। वह अपनी प्यास को बुझाने के लिए गांव के बाहर बने एक कुएं से पानी भरते हैं। जिसमें दिसंबर माह के बाद पानी समाप्त हो जाता है और ग्रामीण फिर से बरसात का इंतजार करते हैं। फिलहाल गांव के ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर समस्या से निजात दिलाए जाने की मांग की है।

pani satna

कई बार सौंपा ज्ञापन

गांव में पानी की समस्या को लेकर यहां के ग्रामीण कई बार जनपद से लेकर एसडीएम को ज्ञापन सौंप चुके हैं। इसके बाद भी जस की तस समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पाइपलाइन पड़ी है तो फिर इस पाइपलाइन में से पानी घरों तक क्यों नहीं पहुंचता।

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Hundreds of villagers reached the SDM office with buckets, we are thirsty, someone give us water

सिर्फ एक ही कुआं

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गांव में सिर्फ एक ही कुआं है जिसका पानी दिसंबर माह तक में समाप्त हो जाता है। इसके बाद से समस्या शुरू होती है और यहां तब तक बनी रहती है जब तक बरसात नहीं शुरू हो जाती।

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