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MP News: मध्य प्रदेश में अंधेरे की गूंज, भोपाल में वक्फ कानून के खिलाफ मुस्लिम समाज का लाइट बंद आंदोलन

MP News: मध्य प्रदेश में बुधवार रात एक ऐतिहासिक और अनोखा नजारा देखने को मिला, जब मुस्लिम समुदाय ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के खिलाफ शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली तरीके से अपनी आवाज बुलंद की।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) और तहफ्फुज-ए-औकाफ की अपील पर पूरे प्रदेश में रात 9:00 से 9:30 बजे तक घरों, दुकानों, कारखानों और कार्यालयों की लाइटें बंद कर सांकेतिक ब्लैकआउट किया गया। यह 'लाइट बंद' अभियान न केवल एक प्रतीकात्मक कदम था, बल्कि वक्फ संपत्तियों पर कथित सरकारी अतिक्रमण के खिलाफ मुस्लिम समाज की एकजुटता और गुस्से का जीवंत प्रदर्शन भी था।

MP News Historical protest of Muslim society against Waqf law Lights switched off MLA Arif Masood in mp

अंधेरे में उजागर हुआ विरोध का जज्बा

जैसे ही रात के 9 बजते ही घड़ी की सुइयाँ थमीं, मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, रतलाम, गुना, बुरहानपुर और अन्य छोटे-बड़े शहरों के मुस्लिम बहुल इलाकों में एक असामान्य सन्नाटा और अंधेरा छा गया। सड़कों पर स्ट्रीट लाइट्स की रोशनी बरकरार रही, लेकिन घरों, दुकानों और कारोबारी प्रतिष्ठानों की बत्तियाँ गुल हो गईं। कहीं 15 मिनट तो कहीं आधे घंटे तक यह सांकेतिक ब्लैकआउट जारी रहा, जो सरकार के लिए एक सख्त चेतावनी बनकर उभरा।

भोपाल के इकबाल मैदान, सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड और जहांगीराबाद जैसे इलाकों में लोग अपने घरों की बालकनियों और छतों पर खड़े होकर इस अभियान में शामिल हुए। इंदौर के खजराना और आजाद नगर, ग्वालियर के दौलतगंज, जबलपुर के गोरखपुर और उज्जैन के महाकाल मंदिर के आसपास के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी सड़कें और गलियाँ अंधेरे में डूब गईं। यह विरोध न तो शोर-शराबे से भरा था, न ही इसमें कोई नारेबाजी या हंगामा हुआ। फिर भी, इस खामोश विरोध ने एक गहरा संदेश दिया, जो राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में गूंज उठा।

बुरहानपुर, एकजुटता का प्रतीक

बुरहानपुर में इस अभियान का जोश और जज्बा देखते ही बनता था। इकबाल चौक, आजाद नगर, गांधी चौक, रोशन चौक और अन्य मुस्लिम बहुल इलाकों में रात 9:00 से 9:15 बजे तक सभी घरों, दुकानों, कारखानों और छोटे-बड़े उद्योगों की लाइटें बंद रहीं। स्थानीय निवासी मोहम्मद फैजान, जो एक छोटा व्यवसाय चलाते हैं, ने भावुक होकर कहा, "वक्फ संपत्तियाँ हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान हैं। इस कानून के जरिए हमारी धरोहरों पर कब्जा करने की साजिश हो रही है। हमारा यह शांतिपूर्ण विरोध सरकार को बताने के लिए है कि हम अपनी विरासत की रक्षा के लिए एकजुट हैं।"

बुरहानपुर के एक अन्य निवासी, शहनाज बी, ने कहा, "हमने अपनी बेटियों और बच्चों को भी इस अभियान में शामिल किया। यह सिर्फ आज की लड़ाई नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के हक की रक्षा का सवाल है।" इस विरोध ने न केवल समुदाय को एकजुट किया, बल्कि यह भी दिखाया कि शांति और संयम के साथ भी एक बड़ा संदेश दिया जा सकता है।

AIMPLB और तहफ्फुज-ए-औकाफ की अगुवाई

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस अभियान को 'वक्फ बचाओ मुहिम' का हिस्सा बताया, जो 10 अप्रैल से शुरू होकर 7 जुलाई तक चलेगा। AIMPLB के प्रवक्ता डॉ. एस.क्यू.आर. इलियास ने कहा, "यह प्रतीकात्मक विरोध हमारी लड़ाई की शुरुआत है। वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 अन्यायपूर्ण, अलोकतांत्रिक और इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ है। यह कानून मुस्लिम समुदाय की धार्मिक संपत्तियों में सरकारी दखलंदाजी को बढ़ावा देता है। हम इसे पूरी तरह वापस लेने की माँग करते हैं।"

भोपाल मध्य से विधायक और AIMPLB के सदस्य आरिफ मसूद ने भोपाल में इस अभियान का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा, "यह काला कानून हमारी मस्जिदों, कब्रिस्तानों और दरगाहों को खत्म करने की साजिश है। हमने शांतिपूर्ण तरीके से अपना गुस्सा जाहिर किया है, लेकिन अगर सरकार हमारी बात नहीं सुनती, तो हम सुप्रीम कोर्ट जाएँगे और इस कानून के खिलाफ और बड़े आंदोलन करेंगे।"

तहफ्फुज-ए-औकाफ कारवाँ के तहत AIMPLB ने पूरे देश में इस तरह के विरोध प्रदर्शनों का आह्वान किया है। बोर्ड ने 50 बड़े शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस, बुद्धिजीवियों के साथ बैठकें, और महिलाओं को जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रमों की योजना बनाई है। AIMPLB ने यह भी ऐलान किया कि वह 1 करोड़ हस्ताक्षर जुटाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपेगा।

वक्फ कानून, विवाद की जड़

वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को 2 अप्रैल को लोकसभा और 3 अप्रैल को राज्यसभा में पारित किया गया था। 5 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे मंजूरी दी, जिसके बाद यह कानून लागू हो गया। इस कानून में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और निगरानी के लिए कई नए प्रावधान शामिल किए गए हैं, जैसे:

  • वक्फ संपत्ति घोषित करने के लिए कलेक्टर से प्रमाणीकरण अनिवार्य करना।
  • वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण।
  • वक्फ बोर्ड में महिलाओं और अन्य समुदायों की भागीदारी बढ़ाना।
  • वक्फ संपत्तियों की जाँच के लिए केंद्रीय और राज्य स्तर पर निगरानी समितियों का गठन।

मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों का दावा है कि यह कानून वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता को खत्म करता है और मस्जिदों, कब्रिस्तानों, दरगाहों और अन्य वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाता है। AIMPLB ने इसे "इस्लामी मूल्यों, धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ" करार दिया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने संसद में इस कानून का विरोध करते हुए कहा, "यह कानून मुस्लिमों की धार्मिक संपत्तियों पर हमला है। इसका मकसद वक्फ संपत्तियों को छीनना और उनकी पहचान मिटाना है।"

दूसरी ओर, केंद्र सरकार का दावा है कि यह कानून वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाने और उनके दुरुपयोग को रोकने के लिए बनाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "यह कानून गरीब मुस्लिमों के हित में है। हम वक्फ संपत्तियों की अवैध बिक्री और भ्रष्टाचार पर रोक लगाना चाहते हैं। यह कानून समाज के कमजोर वर्गों को मजबूत करेगा।"

MP News: शांतिपूर्ण विरोध, सख्त संदेश

मध्य प्रदेश में इस विरोध की सबसे खास बात इसका शांतिपूर्ण और संयमित स्वरूप था। न कोई नारेबाजी हुई, न बैनर-पोस्टर लहराए गए, और न ही कोई जुलूस निकाला गया। भोपाल के शहर काजी मुश्ताक अली नदवी ने कहा, "हमारा विरोध मजहबी नहीं, बल्कि हमारे हक और हमारी धरोहरों की रक्षा के लिए है। यह कानून हमारी मस्जिदों और कब्रिस्तानों पर कब्जे की साजिश है। हम अपने युवाओं से अपील करते हैं कि वे शांति और चरित्र के साथ इस लड़ाई में शामिल हों।"

जमीयत-ए-उलेमा के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने इस कानून को "औपनिवेशिक मानसिकता" का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, "अंग्रेजों के जमाने में भी कानून बनाने से पहले समुदायों से सलाह ली जाती थी। लेकिन आज बिना किसी मशवरे के यह काला कानून थोप दिया गया। यह लोकतंत्र के खिलाफ है।"

MP News: आगे की रणनीति, सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक

AIMPLB ने स्पष्ट कर दिया है कि यह विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता। बोर्ड ने 1 करोड़ हस्ताक्षर जुटाने का लक्ष्य रखा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपे जाएँगे। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट में इस कानून के खिलाफ छह याचिकाएँ दायर हो चुकी हैं, जिनमें से एक केरल जमीयतुल उलेमा ने दायर की है।

मध्य प्रदेश में इस अभियान को और तेज करने की योजना है। भोपाल में विधायक आरिफ मसूद ने कहा, "जैसे किसान आंदोलन ने तीन कृषि कानूनों को रद्द करवाया, वैसे ही हमारा यह आंदोलन भी इस काले कानून को खत्म करवाएगा। हम सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपनी लड़ाई लड़ेंगे।"

सामाजिक और राजनीतिक हलचल

इस विरोध ने मध्य प्रदेश में मुस्लिम समुदाय को एकजुट करने के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी, इस मुद्दे पर मुस्लिम समुदाय के साथ खड़े हैं। कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने इसे "असंवैधानिक" और "मुस्लिम समुदाय को टारगेट करने वाला" कानून बताया। उन्होंने कहा, "यह कानून संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। हम संसद और सड़क पर इसका विरोध करेंगे।"

समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा, "मुस्लिम समुदाय को इस कानून के खिलाफ राजनीतिक रूप से सबक सिखाना चाहिए। यह कानून न केवल धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है, बल्कि सामाजिक एकता को भी कमजोर करता है।"

दूसरी ओर, भाजपा ने इस कानून को "गरीब मुस्लिमों के हित में" बताते हुए विपक्ष पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "हमारी सरकार गरीब मुस्लिमों के साथ है। यह कानून शराफत अली जैसे लोगों के लिए है, न कि शरारत खान जैसे नेताओं के लिए। विपक्ष इस मुद्दे पर भ्रम फैला रहा है।"

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