mp election: हाईटेक हुई चुनावी जंग, बैनर पोस्टर गायब, डिजिटल प्रचार

सीधी, 23 जून: जिले में इन दिनों चुनावी माहौल गर्म है। गांव से लेकर शहर तक प्रचार-प्रसार जोरों पर है। दावेदार अब मतदाओं का लुभाने सोशल मीडिया का ज्यादा सहारा ले रहे हैं। दीवार लेखन, पोस्टर-बैनर सहित अन्य परंपरागत तरीके अब कम हो गए हैं। सोशल मीडिया पर आकर्षक पोस्टर व वीडियो आमजन को भी खूब भा रहे हैं।

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फेसबुक, व्हाट्सएप व इंस्टाग्राम बना माध्यम

जिला और जनपद पंचायतों के सदस्य सहित ग्राम पंचायतों के सरपंच, पंच और सीधी नगर पालिका परिषद समेत जिले की अन्य नगर पंचायतों में पार्षद पद के प्रत्याशी इस बार फेसबुक, वाट्सऐप, इंस्टाग्राम से प्रचार पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। वह व्हाट्सएप पर सुप्रभात और शुभरात्रि जैसे मैसेज भेजकर मतदाताओं के बीच पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। कई उम्मीदवार तो घर के बच्चों और युवाओं से अपनी फोटो और वीडियो बनवाकर उसे प्रचारित कर रहे हैं। अपने-अपने वार्ड और गांव के समग्र विकास की अपील भी वे इन्हीं माध्यमों से कर रहे हैं। इसी प्रकार डीजे भी प्रचार का नया माध्यम बनता जा रहा है। चुनाव प्रचार का यह तरीका मतदाताओं को भी पसंद आ रहा है।

कहीं उपलब्धि तो कहीं प्रतिद्वंद्वी की कमजोरी

सोशल मीडिया पर जारी चुनावी जंग के बीच प्रत्याशी कोरोना काल व जनता के बीच कराए जा रहे कामों को लेकर अपनी उपलब्धियां गिना रहे हैं। कुछ प्रत्याशी एक-दूसरे की कमजोरी भी उजागर कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर प्रत्याशी इसका भी अंदाजा लगा पा रहे हैं कि कौन उनके पक्ष में है और कौन नहीं। जिस वोटर ने प्रत्याशी का पोस्टर और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया आमतौर पर वह उनके समर्थन में होता है। कांग्रेस के आइटी सेल से जुड़े एक पदाधिकारी का कहना है कि पंचायत और नगरीय निकायों में सोशल मीडिया पर प्रचार तेजी से चल रहा है।अलग-अलग कार्यकर्ताओं की टीम बनाई गई है। जो सोशल मीडिया पर प्रचार प्रसार तो कर रही रही है। आमजन के कंटेंट से फीडबैक प्राप्त कर नई रणनीति बना रहे हैं। जिला व विधानसभा स्तर पर बने फेसबुक पेजों पर कंटेंट, स्लोगन उपलब्ध कराने की योजना है। मंडल स्तर पर कार्यकर्ताओं की टीम है, जो सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार का काम देख रही थी।

कम खर्च में संपर्क

आधा दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों के सरपंच और सीधी नगर पालिका परिषद के पार्षद पद के प्रत्याशियों से वनइंडिया हिंदी ने चुनाव प्रचार के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि अब शहर हो गांव में हर किसी के पास मोबाइल है। ऐसे में प्रचार का सोशल मीडिया से अच्छा दूसरा कोई विकल्प नहीं हो सकता। इससे पोस्टर-बैनर का खर्च भी बच रहा है। कम खर्च में अधिक से अधिक लोगों से आसानी से संपर्क कर अपनी बात उन तक पहुंचा पा रहे हैं।

प्रशासन की नजर

चुनाव में सोशल मीडिया के बढ़ते चलन के बीच प्रशासन भी पूरी मुस्तैद है। भ्रामक आपत्तिजनक और माहौल बिगाड़ने वाली पोस्ट करने पर प्रशासन और पुलिस अधिकारी पहले ही कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दे चुके हैं। प्रशासन की तकनीकी टीम सक्रिय है।

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